Tata Steel के CEO TV Narendran ने कहा है कि भारत में घरेलू मांग तो मजबूत है, लेकिन महंगी एनर्जी और ऊंची ब्याज दरें औद्योगिक विस्तार की राह में बड़ी बाधा हैं। कंपनी अब वॉल्यूम की जगह मुनाफे पर फोकस कर रही है।
नई दिल्ली में आयोजित IFQM Symposium 2026 में बोलते हुए Tata Steel के CEO और MD TV Narendran ने मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर की चुनौतियों को खुलकर सामने रखा है। उन्होंने बताया कि भले ही ऑटोमोबाइल जैसे सेक्टर में मांग अच्छी है, लेकिन इंडस्ट्री पर लागत का दबाव काफी बढ़ गया है।
मुनाफे पर कंपनी का जोर
Narendran ने साफ किया कि इस माहौल में कंपनियों को आक्रामक विस्तार के बजाय 'प्रॉफिटेबल ग्रोथ' पर ध्यान देना चाहिए। स्टील सेक्टर एनर्जी पर बहुत ज्यादा निर्भर है, इसलिए ऊंची बिजली और फ्यूल की कीमतें सीधे मुनाफे को प्रभावित कर रही हैं। जून 2026 तिमाही में कंपनी का कंसोलिडेटेड EBITDA ₹9,370 करोड़ रहा है। कंपनी फिलहाल ₹84,173 करोड़ के नेट डेट (Net Debt) के बोझ को कम करने पर काम कर रही है, जिसका नेट डेट-टू-EBITDA रेशियो 2.3x है।
ग्लोबल चुनौतियां और CBAM का असर
कंपनी सिर्फ घरेलू ही नहीं, बल्कि ग्लोबल ट्रेड बैरियर्स से भी जूझ रही है। EU का 'Carbon Border Adjustment Mechanism' (CBAM) भारतीय स्टील कंपनियों के लिए एक बड़ी चुनौती बनकर उभरा है। Narendran के मुताबिक, भारतीय माल को ग्लोबल बाजार में कॉम्पिटिटिव बनाने के लिए सरकार और इंडस्ट्री के बीच तालमेल जरूरी है, ताकि लॉजिस्टिक्स कॉस्ट कम की जा सके।
कॉरपोरेट हलचल
Tata Steel अपने स्ट्रक्चर को सरल बनाने के लिए लगातार काम कर रही है। हाल ही में 1 अक्टूबर, 2026 को NCLT मुंबई बेंच ने Rujuvalika Investments Limited के साथ अमलगमेशन (Amalgamation) की मंजूरी दे दी है।
शेयर पर नजर
अक्टूबर 2026 की शुरुआत में Tata Steel का शेयर ₹175 से ₹180 के दायरे में ट्रेड कर रहा है। निवेशकों के लिए कंपनी का कर्ज कम करना और रॉ मटेरियल की कीमतों पर मैनेजमेंट का रुख आने वाले दिनों में सबसे महत्वपूर्ण रहने वाला है।
