एनालिस्ट टारगेट ने बढ़ाई शेयर की चमक!
Motilal Oswal जैसी ब्रोकरेज फर्मों द्वारा Tata Steel के लिए ₹240 का टारगेट प्राइस दिए जाने के बाद से शेयर में जबरदस्त हलचल मची हुई है। यह तेजी भारतीय बाजार में स्टील की बढ़ती मांग और यूरोप में कंपनी के कारोबार में आ रहे सुधार पर आधारित है। हालांकि, पिछले साल अब तक शेयर में 53.8% का शानदार उछाल और RSI का 75 के करीब पहुंचना दिखाता है कि बाजार में अभी से काफी उम्मीदें जुड़ चुकी हैं। इसके अलावा, कंपनी के वैल्यूएशन पर भी खास नजर रखने की जरूरत है, और EU के नए कार्बन नियमों (CBAM) जैसे खतरे भी मंडरा रहे हैं।
डिमांड का बूस्ट और वैल्यूएशन का गणित
Tata Steel का शेयर इस समय अपने 52-हफ्ते के उच्चतम स्तर के करीब कारोबार कर रहा है। पिछले ट्रेडिंग सेशन में इसमें करीब 2.8% की तेजी देखी गई और यह लगभग ₹208.85 पर बंद हुआ। कंपनी का मौजूदा P/E (प्राइस-टू-अर्निंग) रेश्यो लगभग 27.6x से 38.2x के बीच है। Motilal Oswal का ₹240 का टारगेट प्राइस, जो कि लगभग 15% की अपसाइड का संकेत देता है, इस मौजूदा वैल्यूएशन रेंज के आसपास ही है। यह अनुमान भारत की स्टील डिमांड पर टिका है, जिसके 2025 और 2026 में 8-9% बढ़ने का अनुमान है। सरकारी प्रोजेक्ट्स और इंफ्रास्ट्रक्चर पर जोर इसे और बढ़ावा देगा। साथ ही, कंपनी FY31 तक अपनी कैपेसिटी को 40 MTPA तक बढ़ाने की तैयारी में है। यूरोप में कंपनी का बिज़नेस भी सुधर रहा है, जहां EBITDA लॉसेस कम हुए हैं और UK ऑपरेशंस के ब्रेकइवन टारगेट के करीब पहुंचने की उम्मीद है। 31 में से 22 एनालिस्ट इस स्टॉक पर 'बाय' रेटिंग दे रहे हैं।
पीयर कंपेरिजन और ग्लोबल मार्केट का हाल
अगर वैल्यूएशन की बात करें तो Tata Steel कुछ प्रतिस्पर्धियों की तुलना में ज्यादा आकर्षक दिख रहा है। JSW Steel का P/E रेश्यो करीब 37.48 है, वहीं Jindal Steel & Power का P/E 40.95 या उससे भी ऊपर जा चुका है। Tata Steel का 27.6x से 38.2x का P/E रेंज इसे मुकाबले में रखता है। डेट-टू-इक्विटी रेश्यो के मामले में Tata Steel का 0.99-1.04 का आंकड़ा मध्यम से उच्च लेवरेज दिखाता है, जो JSW Steel के 1.21 या 118.7% जैसे आंकड़ों के बराबर है। ग्लोबल स्टील मार्केट में 2026 तक सुधार की उम्मीद है, और चीन के स्टील आउटपुट में मामूली कमी से सप्लाई प्रेशर कम हो सकता है। हालांकि, चीन के अप्रत्यक्ष स्टील एक्सपोर्ट्स पर नजर रखना जरूरी है।
⚠️ संभलकर, कहीं ये खतरे न डुबो दें!
इन सब सकारात्मक बातों के बावजूद, Tata Steel के भविष्य पर कुछ बड़े खतरे मंडरा रहे हैं। यूरोपियन यूनियन का कार्बन बॉर्डर एडजस्टमेंट मैकेनिज्म (CBAM), जो जनवरी 2026 से पूरी तरह लागू हो जाएगा, भारतीय स्टील एक्सपोर्टर्स के लिए एक बड़ी चुनौती पेश करेगा। भारत में कार्बन-इंटेंसिव स्टील प्रोडक्शन के चलते, हॉट-रोल्ड कॉइल पर €65-70 प्रति टन का अतिरिक्त खर्च आ सकता है, जो डिफ़ॉल्ट एमिशन वैल्यूज के इस्तेमाल पर €200-250 तक जा सकता है। इससे EU मार्केट में कंपीटिटिव बने रहने के लिए कीमतों में 15-22% की कटौती करनी पड़ सकती है, जिससे मार्जिन्स पर बुरा असर पड़ेगा। यूरोपियन बिज़नेस की प्रॉफिटेबिलिटी कितनी टिकाऊ रहेगी, यह भी एक सवाल है। इसके अलावा, 70.20-75.45 का RSI लेवल बताता है कि शेयर टेक्निकली ओवरबॉट टेरिटरी में है, जिससे नियर-टर्म में करेक्शन का खतरा बढ़ जाता है।
आगे की राह
ज्यादातर एनालिस्ट 'स्ट्रॉन्ग बाय' या 'आउटपरफॉर्म' की राय दे रहे हैं, जिनके टारगेट प्राइस ₹211.19 से ₹227.33 के बीच हैं, जो मौजूदा स्तरों से 1.79% से 11.89% का अपसाइड दिखाते हैं। हालांकि, कुछ एनालिस्ट के टारगेट ₹160 तक नीचे हैं, जबकि कुछ ₹240-250 तक की उम्मीद कर रहे हैं। घरेलू डिमांड मजबूत बनी हुई है, लेकिन CBAM जैसे ग्लोबल रेगुलेटरी नियम एक्सपोर्ट-ड्रिवेन ग्रोथ को प्रभावित कर सकते हैं। कंपनी की इंटरनेशनल ट्रेड डायनामिक्स को संभालने की क्षमता और यूरोप में ऑपरेशनल एफिशिएंसी में सुधार उसके फ्यूचर परफॉर्मेंस के लिए अहम होंगे।