नियंत्रण मजबूत करने की कवायद
यह प्रस्तावित डायरेक्टोरियल बदलाव सिर्फ एक सदस्य के आने-जाने का मामला नहीं है, बल्कि यह Tata Group की अगली चाल और उसके भविष्य के लिए एक बड़ा संकेत है। Tata Trusts, जिसके पास Tata Sons का 66% हिस्सा है, 8 मई को होने वाली अपनी बोर्ड मीटिंग में Venu Srinivasan की जगह Bhaskar Bhat को अपने नॉमिनी डायरेक्टर के तौर पर नियुक्त करने पर विचार कर सकती है।
Bhaskar Bhat, Noel Tata के भरोसेमंद माने जाते हैं और Titan Company के पूर्व मैनेजिंग डायरेक्टर (MD) भी रह चुके हैं। जानकारों का मानना है कि यह कदम Noel Tata के लिए कंपनी के फैसलों पर अपनी पकड़ और मजबूत करने का जरिया है। Noel Tata, जिन्होंने अक्टूबर 2024 में Tata Trusts के चेयरमैन पद की कमान संभाली थी, तब से ग्रुप के नेतृत्व में सक्रिय रूप से अपनी छाप छोड़ रहे हैं। यह भी कहा जा रहा है कि उनके बेटे Neville Tata का हाल ही में Sir Dorabji Tata Trust के बोर्ड में शामिल होना इसी रणनीति का हिस्सा है।
लिस्टिंग पर अनिश्चितता?
इस डायरेक्टोरियल बदलाव की चर्चा Tata Sons को पब्लिक लिस्टिंग (IPO) के मुद्दे से भी गहराई से जुड़ी हुई है। जहाँ Venu Srinivasan और पूर्व नॉमिनी डायरेक्टर Vijay Singh जैसे कुछ वरिष्ठ सदस्य कंपनी को विस्तार और पारदर्शिता के लिए पब्लिक करना चाहते थे, वहीं Noel Tata की मंशा इसे प्राइवेट रखने की है। उनकी आपत्ति का मुख्य कारण यह है कि पब्लिक लिस्टिंग से Tata Trusts का होल्डिंग कंपनी पर नियंत्रण कम हो जाएगा और Article 121 के तहत ट्रस्ट-नॉमिनेटेड डायरेक्टर्स को मिले वीटो पावर पर भी असर पड़ सकता है, जो महत्वपूर्ण फैसलों पर रोक लगाने का अधिकार देता है।
RBI का दबाव और वैल्यूएशन
इस अंदरूनी बहस के बीच, भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) का दबाव भी बढ़ रहा है। RBI के नियमों के अनुसार, Tata Sons को, जिसे एक अपर-लेयर नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनी (NBFC) का दर्जा प्राप्त है, सितंबर 2025 तक लिस्ट होना अनिवार्य है। यह बाहरी दबाव इस आंतरिक रणनीति को और अधिक पेचीदा बना रहा है। विश्लेषकों का अनुमान है कि Tata Sons का मौजूदा वैल्यूएशन करीब ₹7.8 लाख करोड़ है, और यदि यह पब्लिक होती है, तो इसका मूल्य ₹11 लाख करोड़ तक पहुंच सकता है। यह आंकड़ा इस पूरी उठापटक के पीछे के बड़े फाइनेंशियल दांव को स्पष्ट करता है।
गवर्नेंस के जोखिम
बोर्ड में प्रस्तावित यह बदलाव गवर्नेंस के लिहाज से कुछ जोखिम भी ला सकता है। Tata Group का इतिहास, जिसमें 2016 में Cyrus Mistry को हटाना शामिल है, आंतरिक सत्ता संघर्षों के गंभीर परिणाम दिखा चुका है। यदि Srinivasan की जगह कोई और आता है, तो Noel Tata के समर्थक डायरेक्टर्स का एक मजबूत ब्लॉक बोर्ड में बन जाएगा, जिससे असहमति वाले विचारों को हाशिए पर डाला जा सकता है। यह कदम सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रिक व्हीकल जैसे नए और भारी पूंजी वाले वेंचर्स को पब्लिक मार्केट की तत्काल पड़ताल और कम समय के रिटर्न के दबाव से बचा सकता है। हालांकि, इससे समूह की महत्वाकांक्षी विस्तार योजनाओं के लिए आवश्यक बड़े कैपिटल मार्केट तक पहुंचने की क्षमता सीमित हो सकती है और निवेशकों द्वारा Tata Sons के वैल्यूएशन पर लगाए जाने वाले 'होल्डिंग कंपनी डिस्काउंट' को बढ़ावा मिल सकता है।
आगे का रास्ता
Tata Trusts की मीटिंग का नतीजा Tata Sons के भविष्य की राह तय करेगा। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या यह समूह पब्लिक कैपिटल को अपनाता है या अपनी अनूठी, ट्रस्ट-नियंत्रित प्राइवेट स्थिति बनाए रखता है, जिसके दूरगामी परिणाम इन्वेस्टर एक्सेस और समूह की लॉन्ग-टर्म स्ट्रेटेजिक फ्लेक्सिबिलिटी पर पड़ेंगे।
