ऊर्जा क्षेत्र की दिग्गज कंपनी Tata Power ने अपने शेयरधारकों से वित्तीय वर्ष 2026-2027 (FY27) के लिए छह बड़े 'रिलेटेड पार्टी ट्रांजैक्शन्स' (RPTs) पर मुहर लगाने की अपील की है। इन प्रस्तावित सौदों का कुल मूल्य करीब ₹45,000 करोड़ है। यह मंजूरी SEBI के नियमों के तहत जरूरी है, खासकर जब ये ट्रांजैक्शन मटेरियल माने जाते हैं।
खास सौदों का ब्यौरा
कंपनी ने कुल छह खास RPTs की लिस्ट तैयार की है, जिनके लिए शेयरधारकों की मंजूरी मांगी गई है।
- Tata Projects Limited: इसके साथ ₹27,984 करोड़ तक के ट्रांजैक्शन्स हो सकते हैं। यह प्रस्तावित डील में सबसे बड़ी है।
- Tata Steel Limited: इसके लिए ₹4,270 करोड़ का आंकड़ा तय किया गया है।
- Tata Power Renewable Energy Limited (TPREL) और TP Solar Limited: इन दोनों के बीच ₹7,000 करोड़ तक के ट्रांजैक्शन्स का प्रस्ताव है।
- TPREL और TP Vardhaman Surya Limited: इनके बीच ₹4,000 करोड़ के सौदे शामिल हैं।
- TP Central Odisha Distribution Limited (TPCODL) और GRIDCO Limited: दोनों के बीच ₹4,600 करोड़ का एक सौदा प्रस्तावित है।
- TP Western Odisha Distribution Limited (TPWODL) और GRIDCO Limited: इनके बीच भी ₹4,600 करोड़ का एक अलग सौदा है।
कुल वैल्यू और महत्व
इन सभी प्रस्तावित ट्रांजैक्शन्स का कुल मूल्य लगभग ₹45,000 करोड़ बनता है। यह आंकड़ा Tata Power के FY25 के लगभग ₹60,000 करोड़ के कुल रेवेन्यू का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, जो इन सौदों के महत्व को दर्शाता है।
शेयरहोल्डर्स 17 फरवरी, 2026 से 18 मार्च, 2026 तक NSDL द्वारा मैनेज किए जा रहे ई-वोटिंग प्लेटफॉर्म पर अपनी राय दे सकेंगे।
आगे की रणनीति और जोखिम
ये प्रस्तावित RPTs, FY27 में Tata Power के ऑपरेशन्स (Operations) और ग्रोथ प्लांस (Growth Plans) को जारी रखने के लिए बेहद अहम हैं। ग्रुप कंपनियों के साथ सौदे बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स में ग्रुप की क्षमता का लाभ उठाने के लिए हैं। वहीं, रिन्यूएबल एनर्जी (Renewable Energy) सेगमेंट में बड़े पैमाने पर किए जा रहे ये सौदे, स्वच्छ ऊर्जा (Clean Energy) समाधानों में Tata Power के आक्रामक निवेश का संकेत देते हैं। GRIDCO के साथ डील ओडिशा में कंपनी के पावर डिस्ट्रीब्यूशन बिजनेस की स्थिरता के लिए जरूरी हैं।
हालांकि, RPTs में हितों के टकराव (Conflict of Interest) या नॉन-आर्म्स लेंथ प्राइसिंग (Non-arm's length pricing) जैसे जोखिम भी जुड़े होते हैं। निवेशकों की नजरें यह सुनिश्चित करने पर होंगी कि ये सौदे बाजार भाव पर हों और कंपनी के रणनीतिक लक्ष्यों (Strategic Objectives) के अनुरूप हों, ताकि माइनॉरिटी शेयरधारकों (Minority Shareholders) को नुकसान न हो।