TRIL Share Price: शेयर **9%** टूटा! मार्जिन पर भारी दबाव और टारगेट से चूकी कंपनी

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AuthorNeha Patil|Published at:
TRIL Share Price: शेयर **9%** टूटा! मार्जिन पर भारी दबाव और टारगेट से चूकी कंपनी
Overview

Transformers and Rectifiers India Ltd. (TRIL) के निवेशकों के लिए बुरी खबर है। कंपनी के Q4FY26 के नतीजे उम्मीदों से काफी कमजोर रहे, जिसके चलते शेयर में करीब **9%** की बड़ी गिरावट देखी गई। कंपनी के एम्प्लॉई कॉस्ट में **64%** की भारी वृद्धि ने EBITDA मार्जिन को **15.13%** तक सिकोड़ दिया, जबकि रेवेन्यू **15.7%** बढ़ने के बावजूद नेट प्रॉफिट **2.97%** गिर गया। सबसे बड़ी चिंता ऑर्डर बुक के टारगेट से पिछड़ने की है, जो ₹**8,000 करोड़** के मुकाबले सिर्फ ₹**5,005 करोड़** पर बंद हुई।

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मार्जिन पर कैसा रहा दबाव?

22 अप्रैल 2026 को, Transformers and Rectifiers India Ltd. (TRIL) के शेयर में निवेशकों की मुनाफावसूली के चलते लगभग 9% की गिरावट आई। कंपनी का रेवेन्यू ईयर-ओवर-ईयर (YoY) 15.7% बढ़कर ₹782.67 करोड़ रहा, लेकिन कंपनी की प्रॉफिटेबिलिटी (लाभप्रदता) पर बुरा असर पड़ा। अर्निंग्स बिफोर इंटरेस्ट, टैक्स, डेप्रिसिएशन और एमोर्टाइजेशन (EBITDA) 9.79% गिरकर ₹118.44 करोड़ पर आ गया। पिछले साल के 19.41% के मुकाबले EBITDA मार्जिन घटकर 15.13% रह गया। इस भारी गिरावट की मुख्य वजह एम्प्लॉई कॉस्ट में 64% की जबरदस्त ईयर-ओवर-ईयर बढ़ोतरी रही। प्रॉफिट आफ्टर टैक्स (PAT) में भी 2.97% की मामूली गिरावट दर्ज की गई और यह ₹91.4 करोड़ पर रहा। शेयर की मौजूदा कीमत ₹303.45 के आसपास है, जबकि कंपनी का मार्केट कैप लगभग ₹9,700 करोड़ है और इसका ट्रेलिंग पीई रेश्यो (PE Ratio) करीब 36x चल रहा है।

ऑर्डर बुक टारगेट से बड़ी चूक

कंपनी की एक और बड़ी चिंता यह है कि वह अपने खुद के ऑर्डर बुक टारगेट को हासिल करने में नाकाम रही। फाइनेंशियल ईयर 2026 (FY26) के अंत तक कंपनी की ऑर्डर बुक ₹5,005 करोड़ पर बंद हुई, जो कि अनुमानित ₹8,000 करोड़ के टारगेट से बहुत कम है। यह कमी धीमी मांग (Demand) की ओर इशारा करती है, जो पिछले चार तिमाहियों से देखी जा रही है। पिछले तीन तिमाहियों से ऑर्डर बैकलॉग में लगातार गिरावट आई है। भारतीय ट्रांसफार्मर मार्केट वैसे तो मजबूत है और 2031 तक 4.82 बिलियन USD तक पहुंचने की उम्मीद है, लेकिन TRIL इस ट्रेंड का फायदा उठाने में संघर्ष करती दिख रही है। इसी के मुकाबले, CG Power की अनएक्जीक्यूटेड ऑर्डर बुक मार्च 2024 तक ₹6,270 करोड़ (₹62.7 बिलियन) थी, वहीं Voltamp Transformers की FY25 के लिए ओपनिंग ऑर्डर बुक ₹840 करोड़ (₹8.4 बिलियन) थी।

प्लांट की शुरुआत में देरी

नतीजों के बाद हुई कॉल पर मैनेजमेंट ने बताया कि चांगोदर/मोराइया प्लांट की शुरुआत को FY27 की दूसरी या तीसरी तिमाही तक टाल दिया गया है। इस देरी से कंपनी की उत्पादन क्षमता बढ़ाने और भविष्य की मांग को पूरा करने की क्षमता प्रभावित हो सकती है। TRIL ने FY27 के लिए ₹3,200 करोड़ के रेवेन्यू और 15-17% के EBITDA मार्जिन का लक्ष्य रखा है। यह FY26 के लिए ₹3,500 करोड़ रेवेन्यू के पिछले टारगेट को देखते हुए महत्वाकांक्षी लग रहा है, जो पहले ही घटाया जा चुका है। शुरुआत में ऐसी खबरें थीं कि कैपेसिटी एक्सपेंशन Q2 FY26 तक तैयार हो जाएंगे, लेकिन अब इसमें देरी हो रही है।

शेयर की अस्थिरता और होल्डिंग पैटर्न

TRIL का शेयर काफी वोलेटाइल (अस्थिर) रहा है। पिछले एक महीने में यह लगभग 17% बढ़ा है, लेकिन पिछले एक साल में यह 37% से ज्यादा गिर चुका है और अप्रैल 2025 में अपने 52-सप्ताह के हाई ₹594.80 से काफी नीचे ट्रेड कर रहा है। प्रमोटर होल्डिंग मार्च 2026 तक 64.36% पर स्थिर है। फॉरेन पोर्टफोलियो इन्वेस्टर्स (FPIs) ने अपनी हिस्सेदारी बढ़ाकर 8.33% कर ली है, जो एक पॉजिटिव संकेत है। हालांकि, म्यूचुअल फंड की होल्डिंग घटकर 1.72% रह गई है। कंपनी का लॉन्ग-टर्म ऐतिहासिक पीई रेश्यो लगभग 54.90 रहा है, ऐसे में वर्तमान 31-37x का पीई थोड़ा कम जरूर लगता है, पर मार्जिन में आई यह हालिया गिरावट आय की स्थिरता पर सवाल खड़ी करती है।

सेक्टर के ट्रेंड्स और TRIL की चुनौतियां

भारतीय ट्रांसफार्मर मार्केट सरकार के पावर ट्रांसमिशन में भारी निवेश, देशव्यापी विद्युतीकरण अभियान और रिन्यूएबल एनर्जी (नवीकरणीय ऊर्जा) के बढ़ते उपयोग से मजबूत हो रहा है। यूनियन बजट 2025-26 में भी पावर इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट पर जोर दिया गया है। इसके बावजूद, TRIL को CRGO स्टील और कॉपर जैसे कच्चे माल की कीमतों में उतार-चढ़ाव से चुनौती मिल रही है, जो सीधे मार्जिन को प्रभावित करते हैं। कंपनी ने वर्ल्ड बैंक टेंडर के कुछ ऑर्डर हासिल किए हैं, लेकिन कुल मिलाकर ऑर्डर इनफ्लो की कमजोरी बताती है कि मार्केट अपेक्षा से अधिक प्रतिस्पर्धी हो गया है।

एनालिस्ट्स की राय और जोखिम

TRIL के लिए मुख्य जोखिम मार्जिन की स्थिरता, बढ़ती एम्प्लॉई कॉस्ट और कच्चे माल की कीमतों में अस्थिरता हैं। ऑर्डर बुक के टारगेट से चूकना एक गंभीर चिंता का विषय है, जो मांग में संभावित नरमी या कड़ी प्रतिस्पर्धा का संकेत देता है। यह FY27 के महत्वाकांक्षी ₹3,200 करोड़ रेवेन्यू लक्ष्य को प्राप्त करने में बाधा डाल सकता है। एनालिस्ट्स बंटे हुए हैं; Antique Stock Broking (मई 2024) ने ₹847 के टारगेट के साथ 'BUY' रेटिंग दी है, जबकि ICICI Securities (नवंबर 2025) ने एग्जीक्यूशन चुनौतियों और मार्जिन की चिंताओं के चलते स्टॉक को 'HOLD' रेटिंग और ₹275 का टारगेट दिया है। Orunodoi की 2026-2027 के लिए ₹250-₹325 की टारगेट रेंज लगातार अस्थिरता और एग्जीक्यूशन पर निर्भरता की उम्मीद दर्शाती है। कंपनी का बड़े टेंडरों पर निर्भर होना और प्लांट की देरी भी एग्जीक्यूशन जोखिम पैदा करती है।

भविष्य का मार्गदर्शन (Future Guidance)

मौजूदा वित्तीय दबावों के बावजूद, TRIL ने FY27 के लिए ₹3,200 करोड़ रेवेन्यू और 15-17% EBITDA मार्जिन का मार्गदर्शन दोहराया है। हालांकि, FY26 के लिए ऑर्डर बुक टारगेट चूकने और मार्जिन दबाव को देखते हुए यह अनुमान आशावादी लगता है। कंपनी के पिछले गाइडेंस, जैसे FY26 के लिए ₹3,500 करोड़ रेवेन्यू और mid-2025 से 17-18% EBITDA मार्जिन का लक्ष्य, संशोधित किए जा चुके हैं। यह मैनेजमेंट के अनुमानों और वास्तविक प्रदर्शन के बीच एक अंतर का संकेत देता है। वर्ल्ड बैंक के जवाब में HVDC टेंडरों को सुरक्षित करने की कंपनी की क्षमता भविष्य के विकास के लिए महत्वपूर्ण होगी, लेकिन यह बाहरी मंजूरी और मार्केट की गतिशीलता पर निर्भर करेगा।

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