Swan Defence and Heavy Industries ने Q2 में ₹566 करोड़ का प्रॉफिट दर्ज किया है। कंपनी के शेयरों में जोरदार उछाल देखा गया और यह ₹2,950 के नए 52-वीक हाई लेवल पर पहुंच गया। इसकी मुख्य वजह एक बड़ा सरकारी टेंडर है जिसमें कंपनी सबसे कम बोली लगाने वाली कंपनी (L1) बनकर उभरी है।
प्रॉफिट का गणित: क्या यह रियल है?
Swan Defence and Heavy Industries (SDHI) ने फाइनेंशियल ईयर 2027 की दूसरी तिमाही में ₹566 करोड़ का नेट प्रॉफिट कमाया है। हालांकि, निवेशकों को यह समझना होगा कि यह कमाई ऑपरेशनल से ज्यादा एक 'वन-टाइम अकाउंटिंग गेन' है। कंपनी ने Triumph Offshore Private Limited के साथ मर्जर के बाद ₹563 करोड़ का टैक्स प्रोविजन राइट-बैक किया है, जिससे मुनाफे का आंकड़ा बढ़ा है।
ऑपरेशंस में सुधार और नया ऑर्डर
मुनाफे के आंकड़ों के अलावा, कंपनी का कोर बिजनेस भी धीरे-धीरे रफ्तार पकड़ रहा है। 30 सितंबर, 2026 को समाप्त तिमाही में कंपनी का रेवेन्यू ₹69 करोड़ रहा, जो पिछले साल की समान अवधि के ₹40 करोड़ के मुकाबले 72.5% अधिक है। यह बढ़ोतरी कंपनी के पिपावाव (Pipavav) शिपयार्ड में बढ़ती गतिविधियों की ओर इशारा करती है।
कंपनी के लिए सबसे बड़ी खबर ₹1,897 करोड़ के उस टेंडर से आई है, जिसके लिए Swan Defence सबसे कम बोली लगाने वाली कंपनी (L1) साबित हुई है। इस प्रोजेक्ट के तहत कंपनी को 4 मीडियम-रेंज के प्रोडक्ट टैंकर बनाने हैं। इस खबर के बाद शेयर 4.06% उछलकर ₹2,931 पर बंद हुआ।
निवेश से पहले जोखिम को समझें
इतनी अच्छी खबरों के बीच भी कंपनी पर भारी कर्ज का बोझ है, जो लगभग ₹2,725 करोड़ है। पूर्व में Reliance Naval and Engineering Limited के नाम से जानी जाने वाली इस कंपनी का इतिहास वित्तीय अस्थिरता का रहा है, जिसमें दिवालियापन की प्रक्रियाएं भी शामिल हैं। हालांकि ऑर्डर पाइपलाइन मजबूत दिख रही है, लेकिन निवेशकों को कंपनी की वित्तीय सेहत और कर्ज प्रबंधन पर कड़ी नजर रखने की जरूरत है।
