स्टील कीमतों में क्यों आ रही तेजी?
साल 2026 की पहली तिमाही (जनवरी-मार्च) में स्टील की कीमतों में तेजी आने की पूरी संभावना है। यह वो समय होता है जब सेक्टर में मांग आमतौर पर काफी मजबूत होती है। इसके साथ ही, इंपोर्ट (आयात) का दबाव काफी कम हो गया है, जिससे घरेलू कीमतें अंतरराष्ट्रीय बेंचमार्क के करीब आ गई हैं।
हॉट रोल्ड कॉइल (HRC) के दाम पहले ही ₹4,500 से ₹5,000 प्रति टन तक बढ़ चुके हैं। एक्सपर्ट्स का मानना है कि आने वाली तिमाही में स्टील कंपनियों के स्प्रेड्स (मुनाफे का अंतर) ₹3,500 से ₹4,000 प्रति टन तक बढ़ सकते हैं। यह बढ़ती इनपुट कॉस्ट (कच्चे माल की लागत) के बीच कंपनियों के मार्जिन को बेहतर बनाने में मदद करेगा।
भारत में क्रूड स्टील का उत्पादन भी 4.7% बढ़ा है, जो मांग में मजबूती का संकेत देता है। JSW Steel का P/E रेश्यो 36.90, Jindal Steel & Power का 61.97, और Tata Steel का लगभग 39.3 है, जो निवेशकों का भरोसा दिखाता है। वहीं, SAIL का P/E रेश्यो करीब 22.6 है, जो इसे वैल्यूएशन के लिहाज़ से आकर्षक बना सकता है।
प्राइवेट प्लेयर बनाम PSU: एक्सपेंशन का जोखिम
एनालिस्ट्स (विश्लेषकों) का झुकाव प्राइवेट स्टील कंपनियों जैसे Jindal Steel & Power, JSW Steel और Tata Steel की तरफ ज्यादा है। वे Steel Authority of India (SAIL) जैसी PSU को थोड़ा जोखिम भरा मानते हैं।
SAIL की सबसे बड़ी चिंता उसकी महत्वाकांक्षी विस्तार योजना है। कंपनी अपनी उत्पादन क्षमता को 20 मिलियन टन प्रति वर्ष (MTPA) से बढ़ाकर 35 MTPA तक ले जाने की तैयारी में है। इस विस्तार के लिए FY28-FY29 के दौरान ₹10,000 से ₹15,000 करोड़ तक का भारी कैपेक्स (पूंजीगत व्यय) करना होगा। अगर मांग उम्मीद के मुताबिक नहीं बढ़ी तो यह ओवरसप्लाई (अतिरिक्त उत्पादन) का खतरा पैदा कर सकता है और कंपनी पर कर्ज का बोझ भी बढ़ा सकता है।
इसकी तुलना में, प्राइवेट कंपनियां अपनी क्षमता वृद्धि पर ज्यादा सावधानी से काम कर रही हैं।
क्या हैं सेक्टर के लिए चुनौतियां?
हालांकि, इस सेक्टर के लिए कुछ चुनौतियां भी हैं। कोकिंग कोल की कीमतें, जो स्टील उत्पादन का एक अहम कच्चा माल है, अभी भी अस्थिर हैं। ग्लोबल मार्केट में चीन जैसे देशों से लगातार हो रहा उत्पादन भी कीमतों पर दबाव बना सकता है। हाल ही में, अगस्त 2024 में हॉट रोल्ड कॉइल की कीमतें ₹48,000 प्रति टन से नीचे भी गिरी थीं।
FY26 में स्टील की मांग 8% बढ़ने का अनुमान है, लेकिन कीमतों पर दबाव के कारण मार्जिन 12.5% के आसपास रहने की उम्मीद है। कुल मिलाकर, सेक्टर का आउटलुक अभी 'न्यूट्रल' (संतुलित) बना हुआ है।