स्टील की कीमतों में उबाल: डिमांड कमजोर, पर भू-राजनीतिक टेंशन और लागत ने बढ़ाई आग!

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AuthorAditya Rao|Published at:
स्टील की कीमतों में उबाल: डिमांड कमजोर, पर भू-राजनीतिक टेंशन और लागत ने बढ़ाई आग!
Overview

दुनियाभर में स्टील की डिमांड भले ही उम्मीद से काफी कम रहने वाली हो, लेकिन स्टील की कीमतें इन दिनों आसमान छू रही हैं। इस अजीबोगरीब स्थिति की मुख्य वजहें हैं - अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता तनाव, कच्चे माल (जैसे आयरन ओर और कोयला) की बढ़ती कीमतें, और आपूर्ति से जुड़ी चिंताएं।

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दुनियाभर में स्टील मार्केट एक अजीबोगरीब दौर से गुजर रहा है। एक तरफ जहां स्टील की डिमांड उम्मीद से काफी कम रहने का अनुमान है, वहीं दूसरी तरफ कीमतों में जोरदार तेजी देखी जा रही है। यह स्थिति सप्लाई की दिक्कतें और अटकलों (Speculation) के चलते बनी है।

वर्ल्ड स्टील एसोसिएशन (World Steel Association) के मुताबिक, 2026 में स्टील की डिमांड में सिर्फ 0.3% की मामूली बढ़ोतरी होने की उम्मीद है, जिसका मुख्य कारण चीन की डिमांड में 1.5% की अनुमानित गिरावट है। इसके बावजूद, 2026 की शुरुआत में प्रमुख स्टील उत्पादों की कीमतों में काफी इजाफा हुआ है। चीन के एक्सपोर्ट हॉट-रोल्ड कॉइल (HRC) की कीमतें मार्च में 2% बढ़ीं, जबकि डोमेस्टिक HRC की कीमतों में 6% का उछाल आया और रीबार (Rebar) 2% महंगा हुआ। इस तेजी की वजह स्थिर ऑर्डर्स, कम आयात और भू-राजनीतिक जोखिमों (खासकर अमेरिका-ईरान संघर्ष) से बचने के लिए ट्रेडर्स की रणनीतिक खरीदारी है। इस तनाव के कारण शिपिंग लागत बढ़ी है और कमोडिटी की कीमतों में उतार-चढ़ाव आया है, जिससे फिजिकल स्टील की कीमतें सीधे तौर पर बढ़ गई हैं। एल्युमीनियम (Aluminium) की परफॉर्मेंस भी शानदार रही है, LME एल्युमीनियम मार्च में 10% बढ़कर $3,600 प्रति टन के पार निकल गया।

भारत इस समय स्टील डिमांड के लिए एक अहम ग्रोथ इंजन साबित हो रहा है। Centrum की एक रिपोर्ट के अनुसार, भारत में 2026 में डिमांड 7.4% और 2027 में 9.2% बढ़ने का अनुमान है, जो ग्लोबल रेट्स से कहीं ज्यादा है। इस डोमेस्टिक स्ट्रेंथ के साथ-साथ इनपुट कॉस्ट (Input Costs) का बढ़ना भी स्टील की कीमतों को सहारा दे रहा है और ऊपर ले जा रहा है। आयरन ओर (Iron Ore) की कीमतें ठीक हुई हैं, ऑस्ट्रेलियाई ओर मार्च में 6% महंगा हुआ, जिसका कारण माइनिंग की बढ़ी हुई फ्यूल कॉस्ट है। भारत में NMDC ने अप्रैल में अपने लंप और फाइन ग्रेड के दाम बढ़ाए हैं। कोकिंग कोल (Coking Coal) की कीमतें साल-दर-साल ऊंची बनी हुई हैं, हालांकि हाल में कुछ नरमी आई है। नॉन-कोकिंग कोल (Non-coking Coal) की कीमतें शिपिंग और सप्लाई की दिक्कतों के चलते आसमान छू रही हैं।

हालांकि, एनालिस्ट्स (Analysts) चेता रहे हैं कि स्टील की कीमतों में यह मौजूदा उछाल काफी जोखिम भरा हो सकता है। यह तेजी असल डिमांड से ज्यादा, अस्थायी सप्लाई शॉक और भू-राजनीतिक प्रीमियम के कारण दिख रही है। भारत की डिमांड आउटलुक भले ही पॉजिटिव हो, लेकिन यह चीन की अनुमानित गिरावट की भरपाई नहीं कर सकती। भू-राजनीतिक तनाव पर कीमतें टिकी रहना अस्थिर है, क्योंकि तनाव कम होने पर कीमतों में बड़ी गिरावट आ सकती है। आयरन ओर और कोयले जैसी इनपुट कॉस्ट का बढ़ना भी स्टील की कीमतों को बढ़ा रहा है, लेकिन ये खुद ग्लोबल एनर्जी मार्केट और सप्लाई चेन में बदलावों के प्रति संवेदनशील हैं। एल्युमीनियम में मजबूती अन्य बेस मेटल्स जैसे कॉपर (Copper) और जिंक (Zinc) में कमजोरी को ढक रही है, जो यह दर्शाता है कि यह तेजी ब्रॉड कमोडिटी मार्केट की सेहत का संकेत नहीं है। एक्सपर्ट्स को 2026 तक स्टील मार्केट में लगातार उतार-चढ़ाव (Volatility) देखने की उम्मीद है। यह भू-राजनीतिक घटनाओं, शिपिंग कॉस्ट में बदलाव और कच्चे माल की कीमतों के असर पर निर्भर करेगा।

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Disclaimer:This content is for educational and informational purposes only and does not constitute investment, financial, or trading advice, nor a recommendation to buy or sell any securities. Readers should consult a SEBI-registered advisor before making investment decisions, as markets involve risk and past performance does not guarantee future results. The publisher and authors accept no liability for any losses. Some content may be AI-generated and may contain errors; accuracy and completeness are not guaranteed. Views expressed do not reflect the publication’s editorial stance.