Middle East युद्ध का स्टील पर 'महंगाई बम'! इनपुट कॉस्ट **40%** तक बढ़ी, निवेशकों की नींद उड़ी

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AuthorNeha Patil|Published at:
Middle East युद्ध का स्टील पर 'महंगाई बम'! इनपुट कॉस्ट **40%** तक बढ़ी, निवेशकों की नींद उड़ी
Overview

Middle East में छिड़े तनाव ने ग्लोबल स्टील इंडस्ट्री को बड़ा झटका दिया है। क्रूड ऑयल (Crude Oil) की कीमतों में भारी उछाल और शिपिंग कॉस्ट (Shipping Cost) में **40%** तक की वृद्धि ने कोयला, स्क्रैप और अयस्क (Ore) जैसे इनपुट की लागत को आसमान छू लिया है। इससे स्टील निर्माताओं के मुनाफे (Profit Margins) पर गंभीर दबाव आ गया है।

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लागत में अचानक आई आग

Middle East में जारी भू-राजनीतिक (Geopolitical) उथल-पुथल का सीधा असर स्टील सेक्टर पर दिख रहा है। सप्लाई चेन (Supply Chain) बाधित हो रही है और कंपनियों की मुनाफा कमाने की क्षमता पर चोट पहुंची है।

महंगाई का डबल अटैक

Middle East संकट का सबसे बड़ा और सीधा असर कच्चे तेल की कीमतों पर दिखा है। ये कीमतें $70 प्रति बैरल के औसत से बढ़कर $90 प्रति बैरल के आसपास मंडरा रही हैं। इसी के साथ, शिपिंग की लागत (Freight Costs) भी लगभग 40% बढ़ गई है। हालांकि, जहाजों की अधिकता के कारण कंटेनर शिपिंग रेट्स पर दबाव था, लेकिन इन इलाकों के तनाव के कारण युद्ध जोखिम प्रीमियम (War-Risk Premium) जुड़ने और रूट बदलने की नौबत आने से इन कीमतों में और इजाफा हुआ है।

कोकिंग कोल (Coking Coal) की कीमतें भी साल-दर-साल आधार पर बढ़ी हुई हैं, जो करीब $219.50 प्रति टन तक पहुँच गई हैं। वहीं, आयरन ओर (Iron Ore) की कीमतों में भी हालिया उछाल देखा गया है, जो एक महीने के उच्चतम स्तर $103 प्रति ड्राई मीट्रिक टन पर पहुँच गई हैं। इन बढ़ी हुई इनपुट लागतों के कारण स्टील बनाने के लिए जरूरी कच्चे माल जैसे कोयला, स्क्रैप और अयस्क की कीमतें काफी महंगी हो गई हैं, जिससे स्टील उत्पादकों के प्रॉफिट मार्जिन पर सीधा असर पड़ा है।

भारत के लिए मिक्स्ड संकेत

वैश्विक स्टील एसोसिएशन के अनुसार, 2026 तक स्टील की वैश्विक मांग में मामूली 1.3% की बढ़ोतरी होकर 1,773 मिलियन टन तक पहुंचने की उम्मीद है। भारत इस ग्रोथ में अगुवा रहने वाला है, जहां 2025-2026 के फाइनेंशियल ईयर में इंफ्रास्ट्रक्चर और कंस्ट्रक्शन सेक्टर की बदौलत स्टील की मांग 8-9% बढ़ने का अनुमान है।

लेकिन, भारत की यह घरेलू मजबूती भी वैश्विक लागत बढ़त के सामने फीकी पड़ सकती है। भारतीय स्टील निर्माता, खासकर जो कोयला आधारित उत्पादन पर निर्भर हैं, उन्हें महंगे इम्पोर्टेड मेटालर्जिकल कोल के चलते बड़ा नुकसान उठाना पड़ सकता है। भारत अपनी जरूरत का लगभग 90% मेटालर्जिकल कोल आयात करता है।

इसके अलावा, यूरोपीय संघ (EU) का कार्बन बॉर्डर एडजस्टमेंट मैकेनिज्म (CBAM) भारतीय स्टील के एक्सपोर्ट को और महंगा बना रहा है। इसके कारण कीमतों में 22% तक की कटौती करनी पड़ सकती है। जहां गैस आधारित DRI-EAF स्टील निर्माताओं के लिए लागत 4-5% तक बढ़ सकती है, वहीं पारंपरिक उत्पादकों को लगभग 2% की बढ़ोतरी का सामना करना पड़ेगा।

एनालिस्ट्स का अनुमान है कि 2026 में ब्रेंट क्रूड ऑयल (Brent Crude Oil) की औसत कीमत $63.85 और WTI की $60.38 रह सकती है। हालांकि, भू-राजनीतिक तनाव के कारण $4-$10 प्रति बैरल का रिस्क प्रीमियम जुड़ने से, अगर संघर्ष बढ़ता है तो कीमतें और भी ऊपर जा सकती हैं।

जोखिम और आशंकाएं

यह भू-राजनीतिक संकट स्टील इंडस्ट्री की पहले से मौजूद कमजोरियों को और बढ़ा रहा है। भारत का कोयले पर अधिक निर्भर होना एक बड़ा जोखिम है, खासकर तब जब अंतरराष्ट्रीय नियम सख्त हो रहे हैं और देश अपनी एनर्जी सिक्योरिटी के लिए कोयले के आयात पर निर्भर है।

यूरोपीय संघ का CBAM भारतीय एक्सपोर्ट को कम प्रतिस्पर्धी बना सकता है, जिससे या तो मार्जिन कम होगा या बाजार से बाहर होना पड़ेगा। यह मान लेना कि बढ़ी हुई लागत को आसानी से ग्राहकों पर थोपा जा सकता है, एक जोखिम भरा कदम हो सकता है। अगर मांग कम हुई, तो उत्पादकों को नुकसान झेलना पड़ेगा या उत्पादन घटाना होगा।

कंटेनर शिपिंग में भले ही ओवरकैपेसिटी हो, लेकिन Middle East तनाव के चलते रूट बदलने और युद्ध जोखिम प्रीमियम जुड़ने से माल ढुलाई की लागत में मिली कोई भी राहत खत्म हो सकती है। जो उत्पादक इम्पोर्टेड स्क्रैप पर निर्भर हैं, उन्हें भी कीमतों में अस्थिरता और सप्लाई में रुकावट का सामना करना पड़ेगा।

भविष्य का नज़रिया

तत्काल लागत दबाव के बावजूद, एनालिस्ट्स 2026 में वैश्विक स्टील मांग में मामूली रिकवरी की उम्मीद कर रहे हैं, खासकर भारत और यूरोप के कुछ हिस्सों में।

हालांकि, कच्चे तेल की कीमतें अस्थिर बनी हुई हैं, जिनकी भविष्यवाणी $60-$90 प्रति बैरल के बीच है, और Middle East संकट के बढ़ने से यह और ऊपर जा सकती हैं।

कोकिंग कोल की कीमतें 2026-2027 में $215-$222 प्रति टन तक पहुंचने का अनुमान है।

इंडस्ट्री का भविष्य इस बात पर निर्भर करेगा कि भू-राजनीतिक तनाव, स्टील निर्माताओं द्वारा लागत प्रबंधन और अंतिम मांग कितनी मजबूत रहती है। जो कंपनियां सोर्सिंग में फुर्ती दिखाएंगी, ग्रीन प्रोडक्शन तरीकों को अपनाएंगी और जटिल व्यापार नीतियों से निपटेंगी, वे अधिक स्थिर स्थिति में होंगी।

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Disclaimer:This content is for educational and informational purposes only and does not constitute investment, financial, or trading advice, nor a recommendation to buy or sell any securities. Readers should consult a SEBI-registered advisor before making investment decisions, as markets involve risk and past performance does not guarantee future results. The publisher and authors accept no liability for any losses. Some content may be AI-generated and may contain errors; accuracy and completeness are not guaranteed. Views expressed do not reflect the publication’s editorial stance.