Steel Exchange India Limited के लिए यह खबर अच्छी नहीं है। कंपनी का नेट प्रॉफिट (Net Profit) 85.60% लुढ़ककर सिर्फ ₹2.28 करोड़ पर आ गया है, वहीं रेवेन्यू (Revenue) में भी 26.60% की गिरावट दर्ज की गई है। इस वित्तीय दबाव के चलते ही कंपनी अब फंड जुटाने की बड़ी तैयारी में है।
इसी कड़ी में, कंपनी ने 4 मार्च 2026 को बोर्ड मीटिंग बुलाई है। इसमें ₹350 करोड़ तक के नए सिक्योरिटीज (Securities) जारी करने के प्रस्ताव पर मुहर लग सकती है। यह ₹750 करोड़ की पहले से स्वीकृत फंडरेज़िंग लिमिट का ही हिस्सा है। कंपनी के लिए यह ज़रूरी होगा कि वह इस योजना पर शेयरधारकों (Shareholders) की मंजूरी भी हासिल करे।
यह फंडरेज़िंग कंपनी को अपनी वित्तीय स्थिति (Financial Position) को मजबूत करने और ग्रोथ की पहलों (Growth Initiatives) को आगे बढ़ाने में मदद कर सकती है। खासकर, हाल के वित्तीय दबावों के बावजूद, कंपनी पिछले कुछ समय से अपनी बैलेंस शीट को सुधारने की कोशिश कर रही है।
अक्टूबर 2025 में, Steel Exchange India ने लगभग ₹350 करोड़ के महंगे कर्ज़ (High-cost Debt) को रीफाइनेंस (Refinance) किया था, जिससे ब्याज दरें कम हुईं। मार्च 2025 में, कंपनी ने TMT बार प्रोडक्शन कैपेसिटी बढ़ाने के लिए एक प्रोजेक्ट पूरा किया।
रणनीतिक तौर पर, कंपनी स्टील मैन्युफैक्चरिंग से आगे बढ़कर रियल एस्टेट, इंफ्रास्ट्रक्चर और लॉजिस्टिक्स जैसे सेक्टरों में भी कदम रख रही है, जिसे बोर्ड ने सितंबर 2025 में मंजूरी दी थी। इन सबके बीच, दिसंबर 2024 में एक नॉन-ऑपरेशनल यूनिट को ₹50 करोड़ में बेचने की मंजूरी भी मिली ताकि कर्ज़ कम किया जा सके।
एक अन्य महत्वपूर्ण सूचना यह है कि कंपनी के शेयर्स में ट्रेडिंग के लिए विंडो 27 फरवरी 2026 से बंद रहेगी।
हालांकि, इस फंडरेज़िंग योजना के साथ कुछ जोखिम भी जुड़े हैं। शेयरधारकों की मंजूरी मिलना पक्का नहीं है। Q3 FY26 के नतीजे कंपनी के ऑपरेशनल परफॉरमेंस पर सवाल उठाते हैं। साथ ही, कंपनी का इंटरेस्ट कवरेज रेशियो (Interest Coverage Ratio) लगभग 1.6x है, जो कि कमजोर माना जाता है। अतीत में, 2017 में SEBI द्वारा धोखाधड़ी वाली ट्रेडिंग गतिविधियों के लिए जुर्माना भी कंपनी की गवर्नेंस पर सवाल उठाता रहा है।
Steel Exchange India, Jindal Stainless Ltd, Shyam Metalics & Energy Ltd जैसे कॉम्पिटिटिव मार्केट में काम करती है। कंपनी का डेट-टू-इक्विटी रेशियो (Debt-to-Equity Ratio) लगभग 50.2% है, जिसकी तुलना पियर्स (Peers) से करनी होगी।
FY25 के अंत तक, कंपनी का कंसोलिडेटेड डेट-टू-इक्विटी रेशियो 50.2% था। Q3 FY26 में स्टैंडअलोन रेवेन्यू ₹240.86 करोड़ और नेट प्रॉफिट ₹2.28 करोड़ रहा, जिससे नेट प्रॉफिट मार्जिन 0.95% रहा।
निवेशकों को 4 मार्च 2026 को होने वाली बोर्ड मीटिंग के नतीजों पर नज़र रखनी चाहिए, खासकर ₹350 करोड़ की फंडरेज़िंग योजना पर।