इंडस्ट्री के लिए चेतावनी: धीमी रफ्तार का अनुमान
वर्ल्ड स्टील एसोसिएशन (World Steel Association) ने 2026 के लिए कच्चे स्टील की ग्लोबल डिमांड का जो अनुमान जारी किया है, वह इंडस्ट्री के लिए एक चेतावनी की तरह है। एसोसिएशन का मानना है कि 2026 में मांग में केवल 0.3% का मामूली इजाफा होगा, जिससे कुल मांग 1.72 बिलियन मेट्रिक टन तक ही पहुंच पाएगी। यह पिछले कुछ समय से वैश्विक अर्थव्यवस्था में चल रही सुस्ती का सीधा असर है। हालांकि, 2027 तक स्थिति में सुधार की उम्मीद है, जब मांग 2.2% की तेज रफ्तार से बढ़कर 1.76 बिलियन टन तक पहुंचने का अनुमान है।
क्यों धीमी है रफ्तार?
यह 0.3% की ग्रोथ दर IMF और OECD जैसी संस्थाओं द्वारा 2026 के लिए अनुमानित 3% की ग्लोबल इकोनॉमिक ग्रोथ से काफी कम है। इसका मतलब है कि स्टील सेक्टर अभी वैश्विक आर्थिक रिकवरी की गति से पिछड़ रहा है। इस धीमी रिकवरी की मुख्य वजहें आर्थिक अनिश्चितता, भू-राजनीतिक तनाव (खासकर मध्य पूर्व में), इंफ्लेशन का बढ़ता दबाव और ट्रेड पॉलिसी को लेकर अनिश्चितता हैं। ये कारक स्टील का सबसे ज्यादा इस्तेमाल करने वाले बड़े सेक्टर्स जैसे कंस्ट्रक्शन, ऑटोमोटिव और मैन्युफैक्चरिंग पर सीधा असर डाल रहे हैं।
सेक्टर्स और देशों का हाल
ऑटोमोटिव सेक्टर, जो स्टील का एक प्रमुख उपभोक्ता है, 2026 में स्थिर लेकिन धीमी बिक्री ग्रोथ की उम्मीद कर रहा है। चीन का मार्केट, दुनिया का सबसे बड़ा स्टील मार्केट होने के बावजूद, 2026 में लगभग 1% की गिरावट का सामना कर सकता है। वहीं, यूरोप में रक्षा खर्च और इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स के कारण स्टील की मांग में स्थानीय स्तर पर कुछ बढ़ोतरी देखी जा रही है।
इंडस्ट्री की चुनौतियां: ओवरकैपेसिटी और जोखिम
स्टील इंडस्ट्री के सामने एक बड़ी चुनौती ओवरकैपेसिटी (Overcapacity) का संकट है। अनुमान है कि 2027 तक ग्लोबल स्टील बनाने की क्षमता मांग से काफी ज्यादा हो सकती है। यह असंतुलन स्टील के दाम गिरा सकता है और मार्केट रिकवरी को और धीमा कर सकता है। ऐसे में कैपेसिटी यूसेज रेट (Capacity Usage Rate) में तेज गिरावट की आशंका है, जिससे मौजूदा मार्केट की समस्याएं और बढ़ सकती हैं।
रिकवरी का आउटलुक
इन इंडस्ट्री-स्पेसिफिक समस्याओं के अलावा, व्यापक आर्थिक और भू-राजनीतिक जोखिम भी चिंता बढ़ा रहे हैं। भू-राजनीतिक तनावों से इंफ्लेशन और ग्लोबल एनर्जी की कीमतों पर असर पड़ता है, जो औद्योगिक निवेश और कंज्यूमर खर्च को सीधे तौर पर प्रभावित करते हैं। ट्रेड टेंशन और टैरिफ (Tariffs) भी ग्लोबल ट्रेड को बाधित कर रहे हैं, जिससे स्टील पर निर्भर सेक्टर्स के लिए भविष्य का अनुमान लगाना और मुश्किल हो गया है। 2026 के 0.3% और 2027 के 2.2% ग्रोथ रेट के बीच का अंतर साफ दिखाता है कि एक मजबूत रिकवरी के लिए आर्थिक स्थिरता और मौजूदा वैश्विक मुद्दों का समाधान जरूरी है। मार्केट को उम्मीद है कि स्टील की कीमतों में बड़ी बढ़ोतरी 2027 या उसके बाद ही संभव हो पाएगी, जो सप्लाई एडजस्टमेंट और एक मजबूत ग्लोबल इकोनॉमिक बेस पर निर्भर करेगा।