Star Cement: कमाई और विस्तार, दोनों में रॉकेट स्पीड!
Star Cement Limited के नतीजों ने निवेशकों को खुश कर दिया है। कंपनी ने 31 दिसंबर 2025 को समाप्त हुई तीसरी तिमाही (Q3 FY26) में दमदार परफॉर्मेंस दिखाई है, जिसमें रेवेन्यू और मुनाफे (Profit) में ज़बरदस्त बढ़ोतरी हुई है।
नतीजों का पूरा लेखा-जोखा
Q3 FY26 के आंकड़े:
कंपनी का कुल रेवेन्यू (Revenue) पिछले साल की इसी अवधि के ₹719 करोड़ की तुलना में 22.4% बढ़कर ₹880 करोड़ पर पहुंच गया। ऑपरेशनल एफिशिएंसी (Operational Efficiency) का असर EBITDA में साफ दिखा, जो 93.5% की भारी छलांग के साथ ₹207 करोड़ हो गया। EBITDA प्रति टन में भी ज़बरदस्त सुधार हुआ, जो पिछले साल के ₹1,000 से बढ़कर इस तिमाही में ₹1,600 हो गया। इस तिमाही में ₹5 करोड़ का एक विशेष आइटम (Exceptional Item) भी था, जो राजनीतिक दान से जुड़ा था।
9 महीने का हिसाब:
दिसंबर 2025 तक के नौ महीनों में, रेवेन्यू ₹2,603 करोड़ (पिछले साल ₹2,111 करोड़) रहा, जबकि EBITDA बढ़कर ₹631 करोड़ (पिछले साल ₹321 करोड़) हो गया। प्रॉफिट आफ्टर टैक्स (PAT) में तो ज़बरदस्त उछाल आया, जो नौ महीनों के लिए ₹243 करोड़ रहा, जबकि पिछले साल यह सिर्फ ₹46 करोड़ था।
प्रोडक्शन में ग्रोथ:
रेवेन्यू ग्रोथ के पीछे प्रोडक्शन के आंकड़े भी मजबूत हैं। Q3 FY26 में क्लिंकर प्रोडक्शन 39% बढ़कर 8.94 लाख टन और सीमेंट प्रोडक्शन 16% बढ़कर 12.57 लाख टन रहा। कुल सेल्स वॉल्यूम (Clinker सहित) 21.4% बढ़कर 12.96 लाख टन तक पहुंच गया।
मैनेजमेंट का प्लान:
मैनेजमेंट ने FY26 के लिए वॉल्यूम गाइडेंस को थोड़ा घटाकर लगभग 5.3 मिलियन टन कर दिया है। लेकिन, वे Q4 FY26 में कुल वॉल्यूम में 10-12% और सीमेंट वॉल्यूम में 8-10% की सालाना ग्रोथ की उम्मीद कर रहे हैं। नॉर्थ इंडियन मार्केट में कंपनी ब्रांड बिल्डिंग और टेक्निकल सर्विसेज पर जोर देगी, न कि मार्जिन कम करके वॉल्यूम बढ़ाने पर।
Future Plans: ₹4,800 करोड़ का महा-विस्तार!
Star Cement ने अगले 3-4 सालों में ₹4,800 करोड़ के बड़े विस्तार (Expansion) की घोषणा की है। यह पैसा मुख्य रूप से राजस्थान (3 मिलियन टन क्लिंकर और 3 मिलियन टन ग्राइंडिंग क्षमता) और हरियाणा (2 मिलियन टन ग्राइंडिंग क्षमता) में नई क्षमताएं (New Capacities) स्थापित करने के लिए इस्तेमाल किया जाएगा। इन यूनिट्स का कंस्ट्रक्शन सितंबर 2026 के बाद शुरू होने की उम्मीद है और इनके FY29 के अंत या FY30 की शुरुआत तक चालू होने की संभावना है।
कंपनी इस बड़े कैपेक्स (Capex) को ऐसे मैनेज करेगी कि उनका Debt/EBITDA रेशियो 1.5x के नीचे बना रहे। जरूरत पड़ने पर फंड जुटाने के लिए QIP (Qualified Institutional Placement) जैसे विकल्पों पर भी विचार किया जा सकता है। हाल ही में अधिग्रहित सिलचर प्लांट के सफल संचालन और नई क्षमता विकास पर निवेशक नज़र रखेंगे। AAC ब्लॉक रेवेन्यू भी एक उभरता हुआ सेगमेंट है, जिससे पूरी क्षमता पर ₹90-100 करोड़ तक पहुंचने की उम्मीद है।