भारत की दिग्गज स्टाफिंग कंपनियां अब फ्लैट-फी मॉडल से हटकर परफॉरमेंस-बेस्ड बिलिंग अपना रही हैं। इसका मकसद मार्जिन बढ़ाकर **10-20%** तक फीस वसूलना है, लेकिन इसके साथ ही कंपनियों पर ऑपरेशनल रिस्क भी बढ़ गया है।
बदलता बिजनेस मॉडल
भारत के स्टाफिंग सेक्टर में एक बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। Quess Corp और TeamLease Services जैसी बड़ी कंपनियां अब पुराने ढर्रे यानी फ्लैट-फी मॉडल से दूर हो रही हैं। पहले कंपनियां कर्मचारी की लागत पर 9-10% की एक फिक्स्ड फीस लेती थीं, लेकिन अब वे 'आउटपुट' और बिजनेस रिजल्ट्स के आधार पर पैसे चार्ज कर रही हैं।
क्यों बढ़ रही है डिमांड?
ई-कॉमर्स, लॉजिस्टिक्स और IT सेक्टर के क्लाइंट्स अब अपनी स्टाफिंग पार्टनर्स से ज्यादा जवाबदेही (Accountability) की मांग कर रहे हैं। AI टूल्स की मदद से क्लाइंट्स अब 'टाइम-टू-हायर' और 'ऑपरेशनल एफिशिएंसी' को आसानी से ट्रैक कर सकते हैं। यही वजह है कि स्टाफिंग फर्म्स अब 10-20% तक सर्विस फीस ले पा रही हैं।
निवेशकों के लिए चेतावनी
यह बदलाव जितना फायदेमंद दिख रहा है, उतना ही रिस्की भी है। Quess Corp ने हाल ही में वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही में 15% की रेवेन्यू ग्रोथ दिखाई है, जो बेहतर मार्जिन की ओर इशारा है।
लेकिन, निवेशकों को सतर्क रहना होगा। अगर स्टाफिंग कंपनी परफॉरमेंस बेंचमार्क पूरा करने में नाकाम रहती है, तो उन्हें भारी पेनल्टी या फीस में कटौती का सामना करना पड़ सकता है। अब ये कंपनियां सिर्फ रिक्रूटर नहीं हैं, बल्कि क्लाइंट के ऑपरेशनल रिस्क का हिस्सा भी बन गई हैं। आने वाली तिमाहियों में निवेशकों को इन कंपनियों के मार्जिन ट्रेंड्स पर पैनी नजर रखने की जरूरत है ताकि यह पता चल सके कि क्या यह मॉडल वास्तव में मुनाफे में बदल रहा है या सिर्फ रिस्क बढ़ा रहा है।
