Skipper Limited ने कुल मिलाकर ₹1,265 करोड़ मूल्य के नए ऑर्डर हासिल किए हैं। ये ऑर्डर घरेलू और अंतरराष्ट्रीय पावर ट्रांसमिशन और डिस्ट्रीब्यूशन प्रोजेक्ट्स के लिए हैं। इन नए कॉन्ट्रैक्ट्स की बदौलत, कंपनी का ऑर्डर बुक वित्तीय वर्ष 2026 (FY26) के अंत तक रिकॉर्ड ₹8,501.9 करोड़ पर पहुंच गया है। वित्तीय वर्ष 2026 के लिए कुल ऑर्डर इनफ्लो ₹5,678 करोड़ दर्ज किया गया, जिसमें अकेले चौथी तिमाही (Q4) में ₹1,029 करोड़ का योगदान रहा। नए बिजनेस में एक प्रमुख घरेलू डेवलपर से 765 kV और 400 kV ट्रांसमिशन लाइनों के बड़े प्रोजेक्ट्स शामिल हैं, साथ ही लैटिन अमेरिका की परियोजनाओं के लिए टावर और मोनोपोल की सप्लाई भी तय हुई है।
हालांकि, इन बड़ी उपलब्धियों के बावजूद, निवेशकों की पैनी नजर कंपनी के वैल्यूएशन (Valuation) पर टिकी हुई है। Skipper के शेयर का प्राइस-टू-अर्निंग (P/E) रेशियो लगभग 23.75 से 24.93 के दायरे में बना हुआ है। यह वैल्यूएशन इस ओर इशारा करता है कि निवेशक भविष्य में कंपनी से मजबूत ग्रोथ की उम्मीद कर रहे हैं। कंपनी का मार्केट कैप फिलहाल करीब ₹5,000-₹5,200 करोड़ के आसपास है। यह सब तब हो रहा है जब शेयर इस साल अब तक करीब 3.3% से 3.4% तक लुढ़क चुका है, जो दर्शाता है कि हाल की सकारात्मक खबरों का असर स्टॉक पर पूरी तरह अभी हावी नहीं हुआ है।
Skipper पावर इंफ्रास्ट्रक्चर और EPC सेक्टर जैसे बेहद डायनामिक और प्रतिस्पर्धी बाजार में अपनी जगह बनाए हुए है। इसके बड़े प्रतिस्पर्धी, जैसे KEC International (जिसका मार्केट कैप लगभग ₹14,600 करोड़ है) और Kalpataru Projects International (KPIL) (जिसका मार्केट कैप ₹21,000 करोड़ से भी ज्यादा है), आकार में काफी बड़े हैं। KEC International का P/E रेशियो 20.0-21.6 की रेंज में है, जबकि KPIL का P/E लगभग 24.6-25.7 पर कारोबार कर रहा है। Skipper की ऑर्डर बुक भले ही मजबूत हो, लेकिन इसका रेवेन्यू एफिशिएंट और प्रॉफिटेबल प्रोजेक्ट एक्जीक्यूशन पर निर्भर करेगा, खासकर जब यह बड़े ग्लोबल प्लेयर्स से सीधी टक्कर ले रही हो।
कंपनी के मैनेजमेंट को अपनी टेक्निकल और एक्जीक्यूशन क्षमताओं पर पूरा भरोसा है। लेकिन, इतने बड़े ऑर्डर बुक का मतलब है कि एक्जीक्यूशन रिस्क (Execution Risk) भी बढ़ जाता है। अगर बड़े पाइपलाइन प्रोजेक्ट्स को कुशलता से मैनेज नहीं किया गया, तो यह कंपनी के संसाधनों पर दबाव डाल सकता है और मार्जिन को प्रभावित कर सकता है। मैनेजमेंट का एफिशिएंट ऑपरेशंस और सावधानीपूर्वक प्रोजेक्ट्स का चयन करना महत्वपूर्ण होगा। हालिया स्टॉक अंडरपरफॉरमेंस और बड़े प्रतिद्वंद्वियों के मुकाबले P/E रेशियो का समान होना इस बात का संकेत है कि बाजार भविष्य की परफॉर्मेंस को पहले ही कीमत में शामिल कर चुका है, जिसे एक्जीक्यूशन के जरिए साबित करना होगा। एक 2026 के लिए एनालिस्ट प्राइस टारगेट ₹583.25 का है, जो संभावित अपसाइड का संकेत देता है, हालांकि कुछ रिपोर्ट्स अभी भी न्यूट्रल रुख अपनाए हुए हैं। कंपनी का 90% तक का बैक लॉग डोमेस्टिक ऑर्डर्स पर निर्भर करता है, जो इसे डोमेस्टिक पॉलिसी और आर्थिक बदलावों के प्रति भी संवेदनशील बनाता है।