वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने World Steel Association को भारत में अपना रीजनल ऑफिस खोलने का न्योता दिया है। यह कदम भारत के तेजी से बढ़ते स्टील मार्केट को ग्लोबल स्तर पर और मजबूत बनाने की एक बड़ी कोशिश है।
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने नई दिल्ली में आयोजित World Steel Association की जनरल असेंबली के दौरान आधिकारिक तौर पर यह प्रस्ताव रखा है। भारत पहले से ही दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा स्टील उत्पादक देश है और यह पहल भारतीय स्टील उद्योग के ग्लोबल महत्व को और अधिक बढ़ाएगी।
डिमांड और पॉलिसी का दम
भारत का स्टील सेक्टर ग्लोबल ट्रेंड्स से कहीं आगे चल रहा है। अनुमान है कि भारत में स्टील की डिमांड 2026 में 7.9% और 2027 में 8% तक बढ़ सकती है। सरकार ने 'नेशनल स्टील पॉलिसी 2047' का ड्राफ्ट भी पेश किया है, जिसका लक्ष्य अगले दो दशकों में देश की उत्पादन क्षमता को 604 मिलियन टन तक ले जाना है। इसका सीधा असर इंफ्रास्ट्रक्चर, रेलवे और अर्बन ट्रांजिट जैसे बड़े प्रोजेक्ट्स पर पड़ेगा।
ग्लोबल चुनौतियां और रिस्क फैक्टर्स
विकास की रफ्तार के साथ-साथ कुछ चुनौतियां भी सामने हैं। वित्त मंत्री ने संकेत दिया कि ग्लोबल मार्केट में स्टील की भारी 'एक्सेस कैपेसिटी' है, जो 2027-2028 तक 720 से 745 मिलियन टन तक पहुंच सकती है। इस अतिरिक्त सप्लाई के कारण बाजार में कीमतों में अस्थिरता आ सकती है और सस्ती विदेशी इम्पोर्ट्स से घरेलू कंपनियों के मार्जिन पर दबाव पड़ सकता है।
इसके अलावा, भारतीय स्टील इंडस्ट्री के लिए 'कोकिंग कोल' की निर्भरता भी एक बड़ा मुद्दा है। भारत अपनी जरूरत का करीब 92% कोकिंग कोल विदेशों से मंगाता है, जिससे ग्लोबल प्राइस वोलैटिलिटी का सीधा असर कंपनियों के मुनाफे पर पड़ता है। साथ ही, ग्रीन प्रोडक्शन की ओर बढ़ने के लिए कंपनियों को बड़ी मात्रा में कैपिटल एक्सपेंडिचर करने की जरूरत होगी। आने वाले समय में सरकार का मुख्य फोकस इन महत्वाकांक्षी लक्ष्यों को पूरा करने के साथ-साथ घरेलू मैन्युफैक्चरर्स को ग्लोबल ट्रेड रिस्क से बचाने पर होगा।
