Siemens Share Price: रेवेन्यू बढ़ा, पर मुनाफे में **26%** की गिरावट! जानिए आगे क्या है कंपनी की स्ट्रेटेजी

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AuthorKaran Malhotra|Published at:
Siemens Share Price: रेवेन्यू बढ़ा, पर मुनाफे में **26%** की गिरावट! जानिए आगे क्या है कंपनी की स्ट्रेटेजी
Overview

Siemens Limited के लिए Q4 FY25 के नतीजे मिले-जुले रहे। कंपनी का रेवेन्यू **14.0%** बढ़कर **₹3,831 करोड़** रहा, लेकिन कंसोलिडेटेड नेट प्रॉफिट (PAT) **26.0%** की भारी गिरावट के साथ **₹269 करोड़** पर आ गया।

नतीजों का पूरा लेखा-जोखा

Siemens Limited ने Q4 FY25 के लिए मिले-जुले वित्तीय नतीजे पेश किए हैं। कंपनी के रेवेन्यू में पिछले साल की समान अवधि की तुलना में 14.0% की जोरदार बढ़ोतरी हुई और यह ₹3,831 करोड़ तक पहुंच गया। हालांकि, बॉटम लाइन पर अच्छी खबर नहीं रही। कंसोलिडेटेड नेट प्रॉफिट (PAT) में 26.0% की भारी गिरावट आई और यह ₹269 करोड़ पर सिमट गया। पिछले साल इसी अवधि में यह ₹364 करोड़ था। प्रति शेयर आय (EPS) भी पिछले साल के ₹10.20 से गिरकर ₹7.55 रह गई। स्टैंडअलोन बेसिस पर भी रेवेन्यू 15.3% बढ़कर ₹3,398.5 करोड़ रहा, लेकिन स्टैंडअलोन PAT में भी गिरावट देखी गई।

मुनाफे पर दबाव की वजहें

अच्छे रेवेन्यू के बावजूद मुनाफे में आई इस भारी गिरावट के पीछे कई कारण बताए गए हैं। कंपनी ने मटेरियल कॉस्ट में आई बढ़ोतरी, फॉरेक्स (विदेशी मुद्रा) में हुए नुकसान और नई लेबर कोड के लागू होने से जुड़े ₹74 करोड़ के एक खास खर्च (exceptional charge) का सामना किया, जिसने सीधे नेट प्रॉफिट को प्रभावित किया। इन सभी फैक्टर्स ने कंपनी के मार्जिन पर भारी दबाव डाला।

मैनेजमेंट की रणनीति और भविष्य की राह

कंपनी का कहना है कि मजबूत ऑर्डर बुक और कुशल निष्पादन (disciplined execution) रेवेन्यू ग्रोथ के पीछे मुख्य कारण रहे। कंपनी ने 1.26x का बुक-टू-बिल रेशियो हासिल किया है। आगे चलकर, सरकार के इंफ्रास्ट्रक्चर पर फोकस और इंडिया-ईयू फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) जैसे मैक्रोइकॉनॉमिकल फैक्टर्स से कंपनी को फायदा होने की उम्मीद है। हालांकि, मैनेजमेंट ने भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं, ग्लोबल अनिश्चितताओं और करेंसी की अस्थिरता जैसे जोखिमों को भी साफ तौर पर स्वीकार किया है। खासकर, यूरो के मजबूत होने से मटेरियल कॉस्ट पर असर और फॉरेक्स प्रेशर जारी रहने की बात कही गई है। इन सबके बीच, कंपनी ने ₹186 करोड़ के एक कैपेक्स (Capex) प्रोजेक्ट को फिलहाल टालने का फैसला किया है, जो कि टेंडर में देरी के कारण लिया गया है। इसके अलावा, कंपनी अपने लो वोल्टेज मोटर्स (Low Voltage Motors) बिजनेस को बेचने की मंजूरी भी दे चुकी है।

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