Siemens ने Q1FY27 में **₹2,143 करोड़** का मुनाफा कमाया, जो पिछले साल के मुकाबले **407%** ज्यादा है। यह बड़ा उछाल लो-वोल्टेज मोटर्स बिजनेस को बेचने से हुए एकमुश्त लाभ के कारण आया है। हालांकि, कंपनी के कोर ऑपरेटिंग मार्जिन पर लागत दबाव के चलते **340 बेसिस पॉइंट** की गिरावट आई है।
एकमुश्त लाभ से चमकी Siemens की कमाई
Siemens Limited ने फाइनेंशियल ईयर 2027 की पहली तिमाही के नतीजे पेश किए हैं। कंपनी ने ₹2,143 करोड़ का नेट प्रॉफिट दर्ज किया है, जो पिछले साल की समान अवधि के मुकाबले 407% की जबरदस्त बढ़ोतरी है। लेकिन, इस शानदार आंकड़े के पीछे ₹2,099 करोड़ का वह एकमुश्त लाभ (one-time gain) है जो कंपनी को अपने लो-वोल्टेज मोटर्स (LVM) बिजनेस को बेचने से मिला। अगर इस एकमुश्त लाभ को हटा दें, तो कंपनी के कोर ऑपरेशंस में प्रॉफिटेबिलिटी पर दबाव साफ दिख रहा है।
कोर ऑपरेशंस और मार्जिन पर चिंता
इस तिमाही में कंपनी का रेवेन्यू 15% बढ़कर ₹4,714 करोड़ हो गया। लेकिन, कोर EBITDA में 17% की गिरावट आई और यह ₹431 करोड़ पर आ गया। मार्जिन में 340 बेसिस पॉइंट की कमी देखी गई, जो घटकर 9.15% रह गया। कंपनी का कहना है कि कमोडिटी की कीमतों में उतार-चढ़ाव और करेंसी में अस्थिरता (खासकर EUR/INR रेट) इस मार्जिन संकुचन का कारण हैं। यह स्थिति खासकर स्मार्ट इंफ्रास्ट्रक्चर सेगमेंट के लिए चिंताजनक है, जहां शॉर्ट-साइकल प्रोजेक्ट्स में लागत को तुरंत ग्राहकों पर डालना मुश्किल होता है।
मजबूत ऑर्डर बुक से मिली राहत
मार्जिन पर दबाव के बावजूद, Siemens की नए बिजनेस हासिल करने की क्षमता मजबूत बनी हुई है। कंपनी के ऑर्डर इनफ्लो (order inflow) में 16.5% की बढ़ोतरी हुई है और यह तिमाही में ₹6,328 करोड़ तक पहुंच गया। इससे कंपनी का कुल ऑर्डर बुक ₹467 बिलियन तक पहुंच गया है, जो भविष्य के रेवेन्यू के लिए एक मजबूत विजिबिलिटी प्रदान करता है। निवेशकों के लिए, यह बड़ा ऑर्डर पाइपलाइन ही मौजूदा ऑपरेशनल उतार-चढ़ाव के सामने एक सहारा है।
एनालिस्ट्स की राय और अनुमान
इन नतीजों के बाद, ब्रोकरेज फर्म Motilal Oswal ने स्टॉक पर 'न्यूट्रल' रेटिंग बरकरार रखी है। उन्होंने अपने प्राइस टारगेट को ₹3,500 से बढ़ाकर ₹3,600 कर दिया है, लेकिन साथ ही FY27 और FY28 के लिए अर्निंग अनुमानों को 8% और 2% तक घटा दिया है। यह कटौती इस बात का संकेत है कि ब्रोकरेज फर्म इस बात को लेकर थोड़ी सतर्क है कि कंपनी कमोडिटी और करेंसी से जुड़े मार्जिन दबाव से कितनी जल्दी उबर पाएगी।
आगे चलकर, निवेशकों को यह देखना होगा कि Siemens आने वाली तिमाहियों में अपने कोर ऑपरेटिंग मार्जिन में सुधार कर पाता है या नहीं। इनपुट लागतों को मैनेज करना और बड़े ऑर्डर बुक को कुशलतापूर्वक पूरा करना, बिना प्रॉफिट कम किए, कंपनी के लिए मुख्य फोकस रहेगा।
