Siemens Share Price: मुनाफे में आई भारी गिरावट, पर रेवेन्यू और ऑर्डर्स ने भरी उड़ान!

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AuthorAditya Rao|Published at:
Siemens Share Price: मुनाफे में आई भारी गिरावट, पर रेवेन्यू और ऑर्डर्स ने भरी उड़ान!
Overview

Siemens Limited के निवेशकों के लिए अक्टूबर-दिसंबर 2025 की तिमाही मिली-जुली रही। कंपनी का नेट प्रॉफिट साल-दर-साल **54.8%** गिरकर **₹279 करोड़** पर आ गया। यह गिरावट मुख्य रूप से नए लेबर कोड लागू होने पर लगे **₹74.3 करोड़** के एक-मुश्त (one-off) चार्ज की वजह से आई। हालांकि, कंपनी के रेवेन्यू में **14%** की जोरदार बढ़ोतरी हुई और यह **₹3,830 करोड़** पर पहुंच गया। साथ ही, नए ऑर्डर्स में भी **19%** की शानदार ग्रोथ दर्ज की गई, जो **₹4,829 करोड़** रहे।

नेट प्रॉफिट पर लगा बड़ा झटका, वजह बनी एक-मुश्त चार्ज

Siemens Limited के लिए अक्टूबर से दिसंबर 2025 के बीच का समय थोड़ा मुश्किल भरा रहा, क्योंकि कंपनी का नेट प्रॉफिट पिछले साल की इसी अवधि के मुकाबले 54.8% घटकर ₹279 करोड़ रह गया। पिछले साल इसी तिमाही में यह मुनाफा ₹614 करोड़ था। इस भारी गिरावट का मुख्य कारण नवंबर 2025 में लागू हुए नए सरकारी लेबर कोड्स को लेकर ₹74.3 करोड़ का एक असाधारण (exceptional) चार्ज रहा। इस एक-मुश्त खर्च ने कंपनी के ऑपरेशनल परफॉरमेंस पर भारी असर डाला।

रेवेन्यू और ऑर्डर्स में दमदार परफॉरमेंस

हालांकि, एक तरफ जहां प्रॉफिट घटा, वहीं दूसरी तरफ कंपनी के ऑपरेशनल फ्रंट पर अच्छी खबर रही। इस तिमाही में Siemens का रेवेन्यू 14% बढ़कर ₹3,830 करोड़ हो गया। नए ऑर्डर्स में भी 19% का ज़बरदस्त उछाल देखा गया, जो ₹4,829 करोड़ पर पहुंच गए। यह ग्रोथ खासकर डिजिटल इंडस्ट्रीज (Digital Industries) और स्मार्ट इंफ्रास्ट्रक्चर (Smart Infrastructure) सेगमेंट्स में मजबूत मांग के चलते हुई। इससे कंपनी का ऑर्डर बैकलॉग (order backlog) 7% बढ़कर ₹43,004 करोड़ हो गया है, जिससे बुक-टू-बिल रेश्यो (book-to-bill ratio) 1.26x पर बना हुआ है।

मार्जिन पर दबाव और लागतों में वृद्धि

टॉप-लाइन (revenue) पर मजबूती के बावजूद, कंपनी के ऑपरेटिंग प्रॉफिट (operating profit) में ज्यादा बढ़ोतरी नहीं हुई, यह 9.3% बढ़कर ₹422.4 करोड़ रहा। ऑपरेटिंग मार्जिन (operating margin) भी पिछले साल के 11.5% से थोड़ा घटकर 11% पर आ गया। मैनेजमेंट के मुताबिक, मार्जिन में इस नरमी की वजह कमोडिटी (commodity) की कीमतों में आई कुछ राहत पर फोरेक्स (forex) में हुए नुकसान और इनपुट कॉस्ट (input costs) में हुई बढ़ोतरी का असर है।

नतीजों के बाद, 6 फरवरी 2026 की दोपहर तक Siemens Limited के शेयर NSE पर 3.22% गिरकर ₹3,193.90 पर ट्रेड कर रहे थे।

वैल्यूएशन, कॉम्पिटिशन और सेक्टर का भविष्य

4 फरवरी 2026 तक Siemens Limited का मार्केट कैप करीब ₹1,17,555.30 करोड़ था और इसका P/E रेश्यो लगभग 73.11 था। वहीं, इसके प्रमुख कॉम्पिटिटर्स जैसे L&T का P/E रेश्यो 31.83 से 39.89 के बीच है, और ABB India का P/E रेश्यो करीब 65.33 से 69.31 है। यह दिखाता है कि Siemens का स्टॉक अपने साथियों की तुलना में प्रीमियम वैल्यूएशन पर ट्रेड कर रहा है, ऐसे में प्रॉफिट में आई कमी को मार्केट ने गंभीरता से लिया है।

बीते साल में Siemens का शेयर ₹2,376.45 और ₹3,409.00 के बीच रहा है। फिलहाल, बाजार की तत्काल प्रतिक्रिया से यह भी साफ है कि निवेशक नतीजों को लेकर काफी संवेदनशील हैं, भले ही वजह असाधारण खर्चे हों।

भारतीय इंडस्ट्रियल सेक्टर (industrial sector) ग्रोथ के लिए तैयार है। वित्त वर्ष 2025-26 के लिए GDP ग्रोथ 7.5% से 7.8% और वित्त वर्ष 2026-27 के लिए 6.6% से 6.9% रहने का अनुमान है। RBI ने भी 2025-26 के लिए रियल GDP ग्रोथ का अनुमान बढ़ाकर 7.4% कर दिया है। इंडस्ट्रियल सेक्टर में 6.2% की ग्रोथ की उम्मीद है। सरकार का इंफ्रास्ट्रक्चर पर फोकस और 'सेमिकॉन इंडिया' जैसे प्रोग्राम्स Siemens जैसी कंपनियों के लिए अच्छी संभावनाएं बना रहे हैं।

ज्यादातर एनालिस्ट्स (analysts) Siemens Limited को लेकर पॉजिटिव हैं और 'Buy' रेटिंग दे रहे हैं। उनका औसत 12 महीने का टारगेट प्राइस करीब ₹3,353.04 है, जो मौजूदा स्तर से करीब 4.40% की अपसाइड दिखा रहा है। हालांकि, कुछ एनालिस्ट्स का मानना है कि 55.7 से 69.63 के P/E रेश्यो के साथ यह स्टॉक थोड़ा महंगा हो सकता है।

आगे क्या है उम्मीद?

Siemens Limited के CEO, सुनील माथुर (Sunil Mathur), भारत की इकोनॉमिक रेजिलिएंस (economic resilience) और कंपनी के भविष्य को लेकर काफी आशावादी हैं। उन्होंने इंडिया-ईयू फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (India-EU Free Trade Agreement) और US ट्रेड डील जैसे मैक्रो टेलविंड्स (macro tailwinds) के साथ-साथ बजट में इंफ्रास्ट्रक्चर पर हुए फोकस से भी ग्रोथ की उम्मीद जताई है। कंपनी फिलहाल एक अप्रैल-मार्च वाले यूनिफॉर्म फाइनेंशियल ईयर (financial year) की ओर बढ़ रही है, जिसके चलते मौजूदा 18 महीने की अवधि 31 मार्च 2026 को खत्म होगी। इस ट्रांज़िशन (transition) और लेबर कोड चार्ज के चलते नज़दीकी भविष्य में थोड़ी जटिलताएँ दिख सकती हैं, लेकिन कंपनी के फंडामेंटल्स और सेक्टर का मजबूत आउटलुक इसे उम्मीदों के सहारे आगे बढ़ाता रहेगा।

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