Siemens India के शेयर **2.47%** चढ़कर **₹4,011** पर बंद हुए। कंपनी ने FY27 की पहली तिमाही में **14.8%** रेवेन्यू ग्रोथ दर्ज की, लेकिन एक बार के बड़े लाभ ने असल मुनाफे की गिरावट को छिपा दिया।
Siemens India के शेयर में आई तेजी
मंगलवार को Siemens India के शेयरों में 2.47% की बढ़त देखी गई और यह ₹4,011 के स्तर पर बंद हुए। यह तेजी कंपनी द्वारा वित्तीय वर्ष 2027 की पहली तिमाही के नतीजों की घोषणा के बाद आई है। कंपनी ने अपने मुख्य बिजनेस सेगमेंट्स में मजबूत मांग और रेवेन्यू में अच्छी ग्रोथ दिखाई है।
दमदार रेवेन्यू ग्रोथ और ऑर्डर इनटेक
कंपनी का रेवेन्यू (Revenue) 14.8% बढ़कर ₹4,713.7 करोड़ हो गया। इसके साथ ही, नए ऑर्डर्स (New Orders) की संख्या में भी 16.5% की बढ़ोतरी हुई और यह ₹6,328 करोड़ तक पहुंच गए। ये आंकड़े बताते हैं कि Siemens India इंफ्रास्ट्रक्चर (Infrastructure) और इंडस्ट्रियल ऑटोमेशन (Industrial Automation) जैसे क्षेत्रों से लगातार मांग का फायदा उठा रही है।
असल मुनाफे पर दबाव
हालांकि, कंपनी की कुल आय (Consolidated Net Profit) ₹2,143.1 करोड़ दर्ज की गई, लेकिन इसमें एक बड़ा ₹2,099 करोड़ का एक बार का लाभ (One-time Gain) शामिल है। यह लाभ कंपनी के लो वोल्टेज मोटर्स (Low Voltage Motors) बिजनेस की बिक्री से हुआ है। इस एक बार के लाभ को हटा दें, तो कंपनी के जारी संचालन (Continuing Operations) से होने वाले मुनाफे में 18.7% की गिरावट आई है। यह पिछले साल की समान तिमाही के ₹422 करोड़ से घटकर सिर्फ ₹343 करोड़ रह गया है।
लागत का बढ़ता बोझ
कोर ऑपरेटिंग प्रॉफिट (Core Operating Profit) में आई यह गिरावट कंपनी के सामने मौजूद चुनौतियों को उजागर करती है। कंपनी के मैनेजमेंट का कहना है कि कमोडिटी की कीमतों में उतार-चढ़ाव, बढ़ती सामग्री लागत (Material Costs) और विदेशी मुद्रा विनिमय दर (Foreign Exchange Fluctuations) के कारण मुनाफे पर असर पड़ा है। इन वजहों से कंपनी के मार्जिन्स पर दबाव बना हुआ है, जिससे रेवेन्यू ग्रोथ के मुकाबले कोर बिजनेस में मुनाफा उतना नहीं बढ़ पा रहा है।
निवेशकों के लिए आगे क्या?
निवेशकों के लिए यह समझना महत्वपूर्ण है कि रिपोर्ट किया गया कुल मुनाफा और असल कोर ऑपरेटिंग मुनाफा में कितना अंतर है। कंपनी का ऑर्डर बुक मजबूत बना हुआ है और वह नए सौदे हासिल कर रही है। लेकिन, इनपुट लागतों के बढ़ते दबाव के बीच मार्जिन्स को सुरक्षित रखना कंपनी के लिए एक बड़ी चुनौती होगी। आने वाली तिमाहियों में यह देखना होगा कि कंपनी इन लागतों के दबाव को कैसे संभालती है।
