Shri Keshav Cements: रेवेन्यू चमका, पर प्रॉफिट गिरा; ऑडिटर्स की GST जांच पर 'चिंता'

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AuthorSaanvi Reddy|Published at:
Shri Keshav Cements: रेवेन्यू चमका, पर प्रॉफिट गिरा; ऑडिटर्स की GST जांच पर 'चिंता'
Overview

Shri Keshav Cements ने Q3 FY26 में साल-दर-साल **35.3%** की ज़बरदस्त रेवेन्यू ग्रोथ दर्ज की, जो **₹37.93 करोड़** तक पहुंच गई। हालांकि, कंपनी ने **₹0.54 करोड़** का नेट लॉस दिखाया, जो पिछले साल की तुलना में **185%** ज़्यादा है। इस बीच, कंपनी के वैधानिक ऑडिटर्स ने गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स (GST) की जांच के चलते नतीजों पर 'क्वालिफाइड कंक्लूजन' दिया है, जिससे भविष्य में होने वाले वित्तीय प्रभाव का ठीक-ठीक अंदाज़ा लगाना मुश्किल हो गया है।

Q3 FY26 के नतीजे: रेवेन्यू बढ़ा, पर घाटा गहराया

Shri Keshav Cements and Infra Limited ने 31 दिसंबर 2025 को समाप्त हुई तिमाही और नौ महीनों के लिए अपने वित्तीय नतीजे जारी किए हैं। कंपनी के रेवेन्यू में तो अच्छी ग्रोथ दिखी, लेकिन तीसरी तिमाही (Q3 FY26) में कंपनी को भारी नुकसान उठाना पड़ा।

  • तिमाही नतीजे (Q3 FY26): कंपनी का ऑपरेशनल रेवेन्यू पिछले साल की इसी अवधि के मुकाबले 35.3% बढ़कर ₹37.93 करोड़ हो गया, जबकि पिछले साल यह ₹28.10 करोड़ था। कुल इनकम भी 33.2% बढ़कर ₹38.69 करोड़ पर पहुंच गई। लेकिन, रेवेन्यू बढ़ने के बावजूद, कंपनी ने ₹0.54 करोड़ का नेट लॉस दर्ज किया, जबकि पिछले साल की समान तिमाही में ₹0.64 करोड़ का नेट प्रॉफिट (Profit) हुआ था। यह 185.2% की भारी गिरावट है। बेसिक ईपीएस (EPS) भी गिरकर ₹(0.31) पर आ गया, जो पिछले साल ₹0.36 था। अगर पिछली तिमाही (QoQ) की बात करें, तो रेवेन्यू 7.1% बढ़ा, लेकिन प्रॉफिट ₹0.69 करोड़ से घटकर ₹0.54 करोड़ के लॉस में तब्दील हो गया।

  • नौ महीने के नतीजे (9M FY26): वहीं, 31 दिसंबर 2025 को समाप्त हुए नौ महीनों में कंपनी का रेवेन्यू 37.4% बढ़कर ₹114.05 करोड़ हो गया, जो पिछले साल ₹83.02 करोड़ था। कुल इनकम में भी 35.8% की बढ़त देखी गई और यह ₹116.31 करोड़ रही। इस नौ महीने की अवधि में कंपनी ने ₹3.23 करोड़ का नेट प्रॉफिट कमाया है, जो पिछले साल के ₹1.76 करोड़ के नेट लॉस (Loss) से एक बड़ा टर्नअराउंड (Turnaround) है।

  • ईबीआईटीडीए (EBITDA) पर नज़र: कंपनी ने बताया कि Q3 FY26 में साल-दर-साल सेल्स (Sales) में 35%, ईबीआईटीडीए में 53% और डिस्पैचेस (Dispatches) में 35% की बढ़त हुई। वहीं, 9M FY26 में सेल्स 37%, ईबीआईटीडीए 56% और डिस्पैचेस 43% बढ़े। 9M FY26 में ईबीआईटीडीए मार्जिन भी 9M FY25 की तुलना में 14% बढ़ा है।

ऑडिटर्स की 'क्वालिफाइड कंक्लूजन': GST जांच का साया

कंपनी के नतीजों में सबसे बड़ी चिंता का विषय वैधानिक ऑडिटर्स (Statutory Auditors) Singhi & Co. द्वारा जारी किया गया 'क्वालिफाइड कंक्लूजन' है। यह 'क्वालिफाइड कंक्लूजन' गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स (GST) की एक चल रही जांच से जुड़ा है।

दरअसल, कंपनी ने फाइनेंशियल ईयर 2020-21 और 2021-22 के दौरान फाइनेंशियल ईयर 2018-19 और 2019-20 से संबंधित GST के लिए ₹8.60 करोड़ (ब्याज और पेनल्टी सहित) का एडवांस पेमेंट किया था। यह पेमेंट डायरेक्टरेट जनरल ऑफ जीएसटी इंटेलिजेंस (DGGI) द्वारा की गई सर्च के आधार पर किया गया था।

चूंकि DGGI की जांच अभी भी जारी है और इस मामले में कोई अंतिम आदेश जारी नहीं हुआ है, इसलिए ऑडिटर्स ने स्पष्ट रूप से कहा है कि वे इन राशियों के वित्तीय नतीजों पर पड़ने वाले 'प्रभाव पर कोई टिप्पणी करने में असमर्थ' हैं। फिलहाल, इन राशियों को 'अन्य करंट एसेट्स' (Other Current Assets) के तहत दिखाया गया है।

जोखिम और भविष्य का नज़रिया

निवेशकों के लिए सबसे बड़ा जोखिम DGGI की GST जांच से जुड़ी अनिश्चितता है। जांच के नतीजे कंपनी पर भारी पेनल्टी और वित्तीय देनदारियां थोप सकते हैं, जिसका सीधा असर भविष्य के प्रॉफिट (Profit) और कंपनी की बैलेंस शीट (Balance Sheet) पर पड़ेगा। ऑडिटर्स की यह 'क्वालिफाइड ओपिनियन' निवेशकों का भरोसा कम कर सकती है और नियामकों (Regulators) व बाजार की कड़ी निगरानी को बढ़ा सकती है। यह अनिश्चित वित्तीय जोखिम भविष्य के प्रदर्शन को धुंधला कर रहा है, जिससे कंपनी का आगे का रास्ता इस टैक्स विवाद के समाधान पर बहुत निर्भर करेगा।

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