Shree Cement का क्वार्टरली रेवेन्यू **23.9%** बढ़कर **₹5,897 करोड़** पहुंच गया है, लेकिन बढ़ते फ्यूल खर्चों के कारण नेट प्रॉफिट **15.2%** गिरकर **₹263 करोड़** रह गया है। हालांकि, मजबूत सेल्स वॉल्यूम के दम पर स्टॉक अपने इंट्राडे लो से **5.3%** रिकवर करने में कामयाब रहा।
फाइनेंशियल परफॉर्मेंस और मार्जिन पर दबाव
कंपनी के नतीजों में मिले-जुले संकेत देखने को मिले हैं। एक तरफ रेवेन्यू में मजबूत उछाल है, तो दूसरी तरफ बढ़ती लागत ने मुनाफे पर चोट की है। कंपनी का नेट प्रॉफिट पिछले साल के ₹310 करोड़ से घटकर ₹263 करोड़ पर आ गया है। सीमेंट इंडस्ट्री की बड़ी चुनौती को देखते हुए, कंपनी का EBITDA प्रति टन 8% घटकर ₹966 रह गया है, जो सीधे तौर पर बढ़ती एनर्जी कॉस्ट को दर्शाता है।
वॉल्यूम ग्रोथ और प्रीमियम स्ट्रेटेजी
ऑपरेशनल मोर्चे पर कंपनी ने बेहतर प्रदर्शन किया है। घरेलू स्तर पर सीमेंट और क्लिंकर की सेल्स वॉल्यूम में 18% की बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जो 9.31 मिलियन टन पहुंच गई है। कंपनी अब 'प्रीमियम प्रोडक्ट्स' पर दांव लगा रही है, जिनका हिस्सा अब कुल ट्रेड वॉल्यूम में 28.7% हो गया है, जो पिछले साल 21.1% था। यह रणनीति भविष्य में मार्जिन को सुरक्षित करने के लिए अपनाई गई है।
विस्तार और इंफ्रास्ट्रक्चर का आउटलुक
कंपनी का फोकस रोड, रेलवे और डेटा सेंटर जैसे इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स पर है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर, कंपनी ने अपनी UAE सब्सिडियरी, Union Cement Company के जरिए 3.0 मिलियन टन प्रति वर्ष क्षमता वाली सीमेंट मिल शुरू की है। इसके अलावा, कंपनी अपनी 65.2% बिजली अब ग्रीन एनर्जी सोर्स से ले रही है, जो लंबे समय में लागत को नियंत्रित करने में मददगार साबित होगा।
निवेशकों के लिए अब यह देखना अहम होगा कि कंपनी वॉल्यूम ग्रोथ और फ्यूल कीमतों के बीच कैसे तालमेल बिठाती है, क्योंकि रूरल कंजम्पशन में मानसून का असर अभी भी एक रिस्क बना हुआ है।
