Shree Cement ने अपने विस्तार का मास्टर प्लान तैयार कर लिया है। कंपनी फाइनेंशियल ईयर 2028 तक अपनी कैपेसिटी को बढ़ाकर **80 मिलियन टन (MTPA)** करने का लक्ष्य लेकर चल रही है। खास बात यह है कि कंपनी अधिग्रहण (Acquisition) के बजाय नए प्लांट लगाकर खुद को बड़ा करने पर जोर दे रही है।
अधिग्रहण नहीं, निर्माण पर भरोसा
सीमेंट सेक्टर में जहां कई बड़ी कंपनियां तेजी से अधिग्रहण की होड़ में हैं, वहीं Shree Cement ने एक अलग रास्ता चुना है। कंपनी का मैनेजमेंट नए प्लांट बनाने को प्राथमिकता दे रहा है क्योंकि उनका मानना है कि पुराने एसेट्स को ऊंचे दाम पर खरीदने से बेहतर खुद का इंफ्रास्ट्रक्चर खड़ा करना है। इससे कंपनी की लागत (Cost Efficiency) बेहतर बनी रहती है और पुराने एसेट्स के रिपेयरिंग या अपग्रेडेशन का झंझट नहीं होता।
क्षेत्रीय पकड़ और लो-कॉस्ट प्रोडक्शन
कंपनी की रणनीति जेतारण और कोडला में नई सुविधाओं को अपने डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क में जोड़ने की है। इससे राजस्थान और दक्षिण भारत के बाजारों में कंपनी की पकड़ और मजबूत होगी। लो-कॉस्ट प्रोड्यूसर का अपना रुतबा बनाए रखने के लिए कंपनी बिना किसी भारी कर्ज के अपनी क्षमता बढ़ाने पर ध्यान केंद्रित कर रही है।
कॉम्पिटिशन और सेक्टर के जोखिम
भारतीय सीमेंट बाजार में फिलहाल काफी हलचल है। UltraTech Cement और Ambuja-ACC जैसे बड़े खिलाड़ी भी आक्रामक विस्तार कर रहे हैं, जिससे भविष्य में सप्लाई बढ़ने का डर बना हुआ है। हालांकि, मैनेजमेंट का कहना है कि भारत में घर निर्माण और सरकारी इंफ्रा प्रोजेक्ट्स की मांग मजबूत बनी रहेगी, जो इस अतिरिक्त सप्लाई को खपा लेगी।
निवेशकों के लिए नजर रखने वाली बातें
कंपनी अपने मार्जिन को सुरक्षित रखने के लिए ऊर्जा दक्षता (Energy Efficiency) पर भी बड़ा दांव लगा रही है। कोयले की जगह कृषि और म्युनिसिपल वेस्ट का उपयोग करके कंपनी ग्लोबल एनर्जी प्राइस में आने वाली अस्थिरता से खुद को बचाने की कोशिश कर रही है। निवेशकों को कंपनी के कैपिटल एक्सपेंडिचर पर बारीकी से नजर रखनी चाहिए, क्योंकि अगर मांग में उम्मीद के मुताबिक तेजी नहीं आई, तो यह बड़े पैमाने पर हो रहा खर्च बैलेंस शीट पर दबाव बना सकता है।
