Shivalik Bimetal Controls के शेयर में पिछले 2 दिनों में लगातार 20% का अपर सर्किट लगा है, जिससे कुल मिलाकर **40%** की तेजी आई है। यह उछाल कंपनी के Q1 FY27 के मजबूत नतीजों और पुणे में नई मैन्युफैक्चरिंग फैसिलिटी के लिए ऑपरेटिंग कंसेंट मिलने के बाद आया है।
2 दिन में 40% भागा Shivalik Bimetal का शेयर
Shivalik Bimetal Controls लिमिटेड के शेयरों ने पिछले दो ट्रेडिंग सेशन में निवेशकों को मालामाल कर दिया है। स्टॉक में लगातार 20-20% के अपर सर्किट लगे हैं, जिससे कुल मिलाकर 40% का जबरदस्त उछाल देखने को मिला है। सोमवार, 10 अगस्त को NSE पर शेयर 20% चढ़कर ₹1,105.05 पर बंद हुआ। शुक्रवार को भी ऐसा ही 20% का उछाल देखा गया था। यह तेजी इस स्पेशलाइज्ड इंजीनियरिंग कंपनी के लिए एक महत्वपूर्ण अपट्रेंड है, जिसके शेयर साल 2026 में अब तक लगभग 160% बढ़ चुके हैं।
दमदार नतीजे और ग्रोथ
इस स्टॉक में तेजी की मुख्य वजह कंपनी की पहली तिमाही (Q1 FY27) की परफॉरमेंस रिपोर्ट है। Shivalik Bimetal ने इस तिमाही में ₹182.2 करोड़ का रेवेन्यू दर्ज किया है, जो पिछले साल की समान तिमाही की तुलना में 33.4% ज्यादा है। निवेशकों के लिए सबसे अच्छी खबर यह है कि कंपनी का प्रॉफिट आफ्टर टैक्स (PAT) 44.9% बढ़कर ₹33 करोड़ हो गया है। यह प्रॉफिट पिछले साल की पहली तिमाही के 16.7% से बढ़कर 18.1% हो गया है। इससे पता चलता है कि कंपनी कॉस्ट कंट्रोल करने और बिजनेस बढ़ाने में कामयाब रही है।
पुणे फैसिलिटी को मिली हरी झंडी
फाइनेंशियल नतीजों के अलावा, कंपनी को एक और बड़ी खुशखबरी मिली है जिसने निवेशकों का ध्यान खींचा है। Shivalik Bimetal को महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से पुणे में अपने नए मैन्युफैक्चरिंग प्लांट के फेज-I के लिए 'Consent to Operate' (CTO) मिल गया है। यह फैसिलिटी कंपनी के लिए बेहद अहम है क्योंकि इसे हाई-वैल्यू प्रोडक्ट्स, जैसे इलेक्ट्रिक व्हीकल्स (EVs) और पावर इलेक्ट्रॉनिक्स के लिए करंट-सेंसिंग कंपोनेंट्स की क्षमता बढ़ाने के लिए डिजाइन किया गया है। इस क्षमता को शुरू करने की क्षमता ऑटोमोटिव और इलेक्ट्रिकल सेक्टर में कंपनी की ग्रोथ के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है।
जोखिम और मार्केट कॉन्टेक्स्ट
कंपनी ने भले ही शानदार ग्रोथ दिखाई है, लेकिन शेयर में इतनी तेजी से आई उछाल के कारण वैल्यूएशन पर सवाल उठना लाजिमी है। लगातार रिकॉर्ड हाई छूने वाले इस शेयर का प्राइस-टू-अर्निंग (P/E) वैल्यूएशन भी बढ़ा है। निवेशक अक्सर मौजूदा कीमत की तुलना कंपनी की कमाई से करने के लिए इस मेट्रिक का इस्तेमाल करते हैं।
ऑपरेशनल तौर पर, निवेशक पुणे फैसिलिटी की प्रगति पर नजर रखेंगे। किसी भी बड़े विस्तार की तरह, प्रोडक्शन को सफलतापूर्वक बढ़ाना और इन प्रोडक्ट्स के लिए नए ऑर्डर हासिल करने की रफ्तार महत्वपूर्ण होगी। इसके अलावा, प्रिसिजन मैटेरियल्स बनाने वाली कंपनी होने के नाते, कच्चे माल की कीमतों में उतार-चढ़ाव का असर कंपनी पर पड़ सकता है। इनपुट कॉस्ट में बड़ी बढ़ोतरी आने वाली तिमाहियों में प्रॉफिट मार्जिन पर दबाव डाल सकती है। कंपनी इन लागतों को ग्राहकों पर डालने या आंतरिक दक्षता को प्रबंधित करने में कितनी तेजी से सक्षम होती है, यह अगले कुछ महीनों में शेयरधारकों के लिए एक महत्वपूर्ण फैक्टर होगा जिस पर वे नजर रखेंगे।
