नतीजों का पूरा लेखा-जोखा
कंपनी की ओर से जारी किए गए नतीजों के मुताबिक, Q3 FY26 में Shivalik Bimetal का रेवेन्यू पिछले साल की समान अवधि के मुकाबले 8.88% बढ़कर ₹134.23 करोड़ दर्ज किया गया। वहीं, पहले नौ महीनों (9M FY26) में रेवेन्यू 8.60% की बढ़त के साथ ₹408.23 करोड़ पर आ गया।
प्रॉफिटेबिलिटी के मोर्चे पर कंपनी ने कमाल कर दिखाया। EBITDA (Earnings Before Interest, Taxes, Depreciation, and Amortisation) में 31.93% की जोरदार ग्रोथ दर्ज हुई, जो Q3 FY26 में ₹32.38 करोड़ रहा। पहले नौ महीनों में EBITDA 27.32% बढ़कर ₹95.40 करोड़ हो गया।
मार्जिन में ज़बरदस्त सुधार
सबसे खास बात यह रही कि कंपनी के मार्जिन में बड़ा सुधार हुआ है। Q3 FY26 में EBITDA मार्जिन 421 बेसिस पॉइंट्स (bps) बढ़कर 24.12% पर पहुंच गया। नौ महीनों के लिए यह 344 bps की बढ़त के साथ 23.37% रहा।
Profit After Tax (PAT) में भी 22.42% का इजाफा हुआ और यह Q3 FY26 में ₹22.33 करोड़ पर रहा। नौ महीनों में PAT 25.11% बढ़कर ₹69.71 करोड़ हो गया। PAT मार्जिन Q3 में 184 bps बढ़कर 16.64% और नौ महीनों में 226 bps बढ़कर 17.08% पर पहुंच गया। ग्रॉस मार्जिन में भी Q3 में 315 bps और 9M में 302 bps का सुधार देखा गया। कंपनी के मैनेजमेंट के मुताबिक, यह सुधार बेहतर प्रोडक्ट मिक्स और ऑपरेशनल एफिशिएंसी का नतीजा है।
भविष्य की योजनाएं और उम्मीदें
मैनेजमेंट ने कहा है कि कंपनी ने अपने ग्लोबल ग्राहकों को वैल्यू-ऐडेड कंपोनेंट्स की सप्लाई बढ़ाने पर ध्यान दिया है। इसके साथ ही, कॉपर इन्वेंट्री बढ़ाने और सप्लाई सिक्योरिटी को मजबूत करने के लिए वर्किंग कैपिटल में भी इजाफा किया जा रहा है। सप्लाई के लिए सोर्सिंग को डाइवर्सिफाई करने पर भी जोर है।
आगे चलकर कंपनी को AI (Artificial Intelligence) और डेटा सेंटर्स से जुड़ी मांग से फायदा होने की उम्मीद है। साथ ही, यूरोपीय और अमेरिकी देशों के साथ फ्री ट्रेड एग्रीमेंट्स (FTAs) से नए ग्राहक जोड़ने में तेजी आ सकती है।
नया प्लांट और आगे की राह
कंपनी पुणे में एक नया ऑटोमोटिव बसबार फैसिलिटी (Automotive Busbar Facility) शुरू करने की योजना बना रही है। इस पर होने वाला खर्च कंपनी अपने इंटरनल एक्युअल्स (Internal Accruals) से करेगी। निवेशकों की नज़रें अब अप्रैल 2026 में लॉन्च होने वाले इस नए प्लांट और FY27 की पहली तिमाही (Q1 FY27) से इसके प्रोडक्शन में आने पर रहेंगी।
कंपनी का फोकस प्रॉफिटेबल ग्रोथ, ग्राहकों के साथ रिश्तों को गहरा करने और कैश कन्वर्जन को बेहतर बनाने पर है। हालांकि, नए प्लांट के लॉन्च में देरी, कच्चे माल (कॉपर) की कीमतों में उतार-चढ़ाव या वैश्विक सप्लाई चेन में किसी भी तरह की रुकावट जैसे रिस्क भी बने हुए हैं।
