लॉजिस्टिक्स सेक्टर की दिग्गज कंपनी Shiprocket ने सितंबर तिमाही में पहली बार प्रॉफिट दर्ज किया है। पिछले साल **₹20.29 करोड़** के घाटे से उबरते हुए कंपनी ने इस बार **₹60 लाख** का मुनाफा कमाया है, जबकि रेवेन्यू में **35%** का शानदार उछाल देखने को मिला है।
मुनाफे का सफर और दमदार ग्रोथ
अगस्त 2026 में शेयर बाजार में लिस्ट होने वाली कंपनी Shiprocket ने एक बड़ा फाइनेंशियल माइलस्टोन हासिल कर लिया है। 30 सितंबर 2026 को समाप्त हुई तिमाही में कंपनी ने ₹60 लाख का नेट प्रॉफिट पोस्ट किया है। यह पिछले साल की इसी अवधि के ₹20.29 करोड़ के भारी नुकसान के मुकाबले एक बड़ा टर्नअराउंड है।
इस मुनाफे के पीछे का मुख्य कारण कंपनी का 35% बढ़कर ₹674 करोड़ का ऑपरेशनल रेवेन्यू रहा। कंपनी का कोर शिपिंग बिजनेस, जिसमें घरेलू शिपिंग और सॉफ्टवेयर टूल्स शामिल हैं, उसका रेवेन्यू 25% बढ़कर ₹4.62 बिलियन पर पहुंच गया है। मैनेजमेंट के अनुसार, क्विक कॉमर्स में बढ़ती मांग और Blinkit और Zepto जैसे प्लेटफॉर्म्स के लिए इन्वेंट्री रिप्लेनिशमेंट ने इस ग्रोथ को रफ्तार दी है।
कर्जमुक्त हुई कंपनी
कंपनी ने अपने बैलेंस शीट को मजबूत बनाने के लिए IPO से मिले पैसों का सही इस्तेमाल किया है। Shiprocket ने ₹242 करोड़ का पूरा कर्ज चुका दिया है, जिससे अब कंपनी कर्जमुक्त (Debt-free) हो गई है। इससे ब्याज के खर्चों में कमी आई है और ओवरऑल फाइनेंशियल हेल्थ बेहतर हुई है।
नई चुनौतियां और जोखिम
हालांकि कोर बिजनेस शानदार प्रदर्शन कर रहा है, लेकिन कंपनी का 'Emerging Business' सेगमेंट अभी भी निवेश के दौर में है और घाटे में चल रहा है। इस सेगमेंट का एडजस्टेड EBITDA मार्जिन -21.2% रहा है, जो दर्शाता है कि कंपनी अभी भी इन नए बिजनेस वर्टिकल्स को खड़ा करने के लिए बड़ा खर्च कर रही है।
लॉजिस्टिक्स सेक्टर में Delhivery और Blue Dart Express जैसे दिग्गजों के बीच कड़ी प्रतिस्पर्धा है। साथ ही, हाल ही में लिस्ट हुई कंपनी होने के नाते, इसके शेयर प्राइस में उतार-चढ़ाव देखा जा रहा है। अब निवेशकों की नजर इस बात पर होगी कि कंपनी अपने कोर बिजनेस के मुनाफे को कैसे बरकरार रखती है और नए सेगमेंट्स के नुकसान को कब तक कम कर पाती है।
