Shanti Inorganics SME IPO: ₹47 करोड़ जुटाएगी कंपनी, जानें प्राइस बैंड और तारीखें

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AuthorAditi Chauhan|Published at:
Shanti Inorganics SME IPO: ₹47 करोड़ जुटाएगी कंपनी, जानें प्राइस बैंड और तारीखें

Shanti Inorganics लिमिटेड 31 अगस्त 2026 को अपना SME IPO लॉन्च कर रही है। कंपनी इस इश्यू के जरिए **₹47 करोड़** जुटाने की योजना बना रही है, जिसका इस्तेमाल गुजरात के अहमदाबाद में एक नई मैन्युफैक्चरिंग फैसिलिटी लगाने के लिए किया जाएगा।

IPO की पूरी जानकारी

Shanti Inorganics का इनिशियल पब्लिक ऑफरिंग (IPO) NSE Emerge प्लेटफॉर्म पर खुलेगा। सब्सक्रिप्शन के लिए यह 31 अगस्त 2026 से 2 सितंबर 2026 तक खुला रहेगा। वहीं, एंकर निवेशकों के लिए बिडिंग 28 अगस्त 2026 को होगी। कंपनी ने इस इश्यू के लिए ₹79 से ₹83 प्रति शेयर का प्राइस बैंड तय किया है।

नई यूनिट से उत्पादन बढ़ाने की तैयारी

इस फंडरेज़ का मुख्य मकसद गुजरात के बावला, अहमदाबाद में एक नई मैन्युफैक्चरिंग यूनिट लगाना है। इस प्लांट की क्षमता 78,544 मीट्रिक टन प्रति वर्ष (MTPA) होगी। Shanti Inorganics सल्फर-आधारित इनऑर्गेनिक केमिकल जैसे सोडियम मेटा बाईसल्फाइट, सोडियम बाईसल्फाइट और अमोनियम बाईसल्फाइट बनाती है। इन केमिकल्स का इस्तेमाल फूड एंड बेवरेज, ऑयल ड्रिलिंग और वॉटर ट्रीटमेंट जैसे उद्योगों में होता है। नई क्षमता जुड़ने से कंपनी इन सेक्टर्स की डिमांड को पूरा करने के लिए अपना उत्पादन बढ़ा सकेगी।

कंपनी का फाइनेंशियल परफॉरमेंस

हाल के सालों में कंपनी ने तेजी से फाइनेंशियल ग्रोथ दर्ज की है। फाइनेंशियल ईयर 2024 से 2026 के बीच, कंपनी के रेवेन्यू में 25.99% की कंपाउंड एनुअल ग्रोथ रेट (CAGR) रही, जबकि नेट प्रॉफिट आफ्टर टैक्स में 41.35% की CAGR दर्ज की गई। फाइनेंशियल ईयर 2026 में, कंपनी ने ₹71.22 करोड़ का रेवेन्यू और ₹10.22 करोड़ का नेट इनकम हासिल किया। यह ग्रोथ पोटेंशियल निवेशकों के लिए एक अहम फैक्टर हो सकता है।

निवेश से जुड़े जोखिम

एक्सपेंशन के बावजूद, निवेशकों को कुछ खास जोखिमों पर भी गौर करना चाहिए। कंपनी का बिजनेस कुछ चुनिंदा बड़े क्लाइंट्स पर काफी हद तक निर्भर है। टॉप 10 कस्टमर्स से करीब 71% रेवेन्यू आता है। इनमें से किसी भी एक बड़े क्लाइंट के हाथ से निकल जाने पर कंपनी के रेवेन्यू पर असर पड़ सकता है।

इसके अलावा, कंपनी के पास अपने कई ग्राहकों के साथ लॉन्ग-टर्म कॉन्ट्रैक्ट्स नहीं हैं, जिससे रेवेन्यू की प्रेडिक्टिबिलिटी थोड़ी कम हो जाती है। केमिकल मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में कैपिटल इंटेंसिव होने के साथ-साथ रॉ मटेरियल की कीमतों में उतार-चढ़ाव का जोखिम भी बना रहता है। जटिल प्रोडक्शन प्रोसेस के कारण कंपनी को सख्त एनवायरनमेंटल और सेफ्टी रेगुलेशंस का भी पालन करना पड़ता है। इन स्टैंडर्ड्स को पूरा करने में विफलता या कच्चे माल की लागत में भारी बढ़ोतरी से प्रॉफिट मार्जिन पर दबाव आ सकता है।

निवेशकों को बावला स्थित नई यूनिट के एग्जीक्यूशन पर बारीकी से नज़र रखनी चाहिए। इस फैसिलिटी का सफल कमिशनिंग और कुछ बड़े ग्राहकों पर निर्भरता कम करते हुए क्लाइंट बेस को बनाए रखना या बढ़ाना, कंपनी के शेयर मार्केट में लिस्ट होने के बाद अहम फैक्टर्स होंगे।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.