Setco Automotive ने 31 दिसंबर, 2025 को समाप्त हुई तिमाही और नौ महीनों के लिए अपने अनऑडिटेड (unaudited) नतीजे पेश किए हैं। इन नतीजों में जहां स्टैंडअलोन (standalone) प्रदर्शन सुधरा है, वहीं कंसोलिडेटेड (consolidated) स्तर पर चिंताजनक तस्वीर सामने आई है।
स्टैंडअलोन प्रदर्शन में सुधार
अगर कंपनी के स्टैंडअलोन ऑपरेशन्स की बात करें, तो Q3 FY26 में रेवेन्यू ₹0.24 करोड़ (यानी 24 लाख रुपये) रहा, जो पिछले साल की समान तिमाही के मुकाबले 17.24% कम है। हालांकि, सबसे अच्छी खबर यह है कि कंपनी ने ₹0.16 करोड़ (16 लाख रुपये) का प्रॉफिट आफ्टर टैक्स (PAT) दर्ज किया है, जबकि पिछले साल इसी अवधि में ₹1.05 करोड़ का घाटा (Loss After Tax - LAT) हुआ था। अर्निंग्स पर शेयर (EPS) ₹0.02 रहा। वहीं, पिछली तिमाही (QoQ) के मुकाबले PAT में 15.79% की गिरावट आई। नौ महीनों की बात करें तो स्टैंडअलोन रेवेन्यू ₹0.86 करोड़ रहा और PAT ₹1.34 करोड़ के प्रॉफिट में आ गया, जो पिछले साल के ₹0.36 करोड़ के घाटे से काफी बेहतर है। EPS ₹0.10 रहा।
कंसोलिडेटेड घाटे में भारी बढ़ोतरी
लेकिन, जब हम कंसोलिडेटेड नतीजों पर नजर डालते हैं, तो तस्वीर पूरी तरह बदल जाती है। Q3 FY26 में कंसोलिडेटेड रेवेन्यू 10.84% बढ़कर ₹196.55 करोड़ हो गया। इसके बावजूद, कंपनी को ₹57.18 करोड़ का भारी कंसोलिडेटेड घाटा हुआ, जो पिछले साल की समान तिमाही के ₹34.42 करोड़ के घाटे से काफी ज्यादा है। EPS भी गिरकर ₹(3.79) पर आ गया, जो पिछले साल ₹(2.14) था। तिमाही-दर-तिमाही (QoQ) देखें तो कंसोलिडेटेड रेवेन्यू 9.80% बढ़कर ₹196.55 करोड़ हुआ, लेकिन घाटा ₹41.27 करोड़ से बढ़कर ₹57.18 करोड़ हो गया। नौ महीनों में कंसोलिडेटेड रेवेन्यू ₹554.30 करोड़ रहा और कुल घाटा ₹140.69 करोड़ रहा, जो पिछले साल के ₹104.51 करोड़ से ज्यादा है। EPS ₹(8.94) रहा।
SEBI का एक्शन और ऑडिटर्स की चिंताएं
कंपनी के लिए एक और बड़ी चिंता SEBI का एक आदेश है, जो 5 फरवरी, 2026 को जारी किया गया था। हालांकि कंपनी सीधे तौर पर पार्टी नहीं है, लेकिन इसके एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर्स (Executive Directors) और पूर्व CEO पर SEBI ने कुछ रकम का जुर्माना लगाया है। साथ ही, उन्हें 1 से 2 साल तक के लिए मार्केट एक्सेस पर रोक लगाई गई है और कुछ खास रकम को 23% सालाना ब्याज के साथ वापस करने का आदेश दिया गया है। यह कार्रवाई पूर्व में SEBI के नियमों के अनुपालन में कोताही, खासकर संबंधित पार्टी ट्रांजैक्शंस (related party transactions) के मामले में हुई है।
ऑडिटर्स ने भी अपनी रिपोर्ट में कई 'Emphasis of Matter' पैराग्राफ्स के जरिए चिंता जताई है। कंसोलिडेटेड फाइनेंशियल के लिए, ₹574.50 करोड़ के नॉन-कनवर्टिबल डिबेंचर्स (NCDs) को लेकर नोट है। इनकी मूल मैच्योरिटी सितंबर 2025 थी, लेकिन इसे दो बार बढ़ाकर 31 मार्च, 2026 कर दिया गया है। ऑडिटर्स ने इस एक्सटेंशन पर सवाल उठाया है, जो कंपनी की लिक्विडिटी (liquidity) और कर्ज प्रबंधन पर चिंता पैदा करता है।
इसके अलावा, दो सब्सिडियरी कंपनियों (SASPL और LCPL) के ऑडिटर्स ने वहां 'मटेरियल अनिश्चितता' (material uncertainty) जताई है। इन कंपनियों को भारी नेट लॉस और निगेटिव नेट वर्थ (negative net worth) का सामना करना पड़ रहा है। ऑडिटर्स ने यह भी पाया कि कंपनी इन सब्सिडियरीज़ को दिए गए अनसिक्योर्ड लोन (unsecured loans) पर कोई ब्याज नहीं ले रही है, जिसे भी फ्लैग किया गया है।
यह भी बताया गया है कि कंसोलिडेटेड फाइनेंशियल स्टेटमेंट तैयार करने वालों ने कुछ सब्सिडियरीज़ की अनऑडिटेड (unaudited) फाइनेंशियल जानकारी पर भरोसा किया है, क्योंकि इन स्टेटमेंट्स की इंडिपेंडेंट ऑडिटर्स द्वारा समीक्षा नहीं की गई थी, जिससे अनिश्चितता और बढ़ जाती है।
जोखिम और भविष्य की दिशा
कुल मिलाकर, Setco Automotive के लिए SEBI का डायरेक्टर्स पर एक्शन एक बड़ा गवर्नेंस रिस्क (governance risk) पेश करता है। सब्सिडियरीज़ की खराब वित्तीय हालत और NCDs के रीपेमेंट की समय-सीमा का बार-बार बढ़ना भी ग्रुप की स्थिरता के लिए चुनौती है। सब्सिडियरीज़ को ब्याज-मुक्त लोन देने की प्रथा भी जांच के दायरे में है। कंपनी ने अपने नतीजों में भविष्य के लिए कोई टारगेट या आउटलुक (outlook) नहीं बताया है।