Sarda Energy & Minerals Ltd. ने हाल ही में Q3 FY26 के अपने फाइनेंशियल नतीजे जारी किए हैं, जिनमें पिछले साल की तुलना में मिले-जुले प्रदर्शन की तस्वीर सामने आई है। तिमाही नतीजों में गिरावट के बावजूद, 9 महीने के नतीजों में जबरदस्त उछाल देखा गया है। मगर, कंपनी के लिए एक बड़ी चिंता SKS Power के अधिग्रहण से जुड़ा मामला है, जो अभी सुप्रीम कोर्ट में अटका हुआ है।
📊 स्टैंडअलोन और कंसोलिडेटेड नतीजे
स्टैंडअलोन प्रदर्शन:
Q3 FY26 में कंपनी का रेवेन्यू फ्रॉम ऑपरेशन्स (Revenue from Operations) पिछले साल की समान अवधि के मुकाबले 12.3% गिरकर ₹917.62 करोड़ पर आ गया। इसी के साथ, प्रॉफिट बिफोर टैक्स (PBT) में 4.3% की गिरावट आई और यह ₹221.21 करोड़ रहा। वहीं, नेट प्रॉफिट आफ्टर टैक्स (Net Profit) 14.3% घटकर ₹163.09 करोड़ दर्ज किया गया। बेसिक और डाइल्यूटेड ईपीएस (EPS) भी ₹4.63 रहा, जो पिछले साल ₹5.37 था।
इसके विपरीत, 9 महीने (9M FY26) के लिए स्टैंडअलोन नतीजे काफी मजबूत रहे। रेवेन्यू फ्रॉम ऑपरेशन्स में 34.2% का शानदार उछाल आया और यह ₹3,316.96 करोड़ पर पहुंच गया। PBT में 61.5% की जोरदार वृद्धि के साथ यह ₹1,046.70 करोड़ रहा, और नेट प्रॉफिट 60.0% बढ़कर ₹788.82 करोड़ पर पहुंच गया। ईपीएस (EPS) भी ₹22.39 दर्ज किया गया, जो पिछले साल ₹13.99 था।
कंसोलिडेटेड प्रदर्शन:
कंसोलिडेटेड (Consolidated) स्तर पर भी Q3 FY26 में प्रदर्शन मिला-जुला रहा। कंसोलिडेटेड रेवेन्यू फ्रॉम ऑपरेशन्स 3.3% घटकर ₹1,275.99 करोड़ रहा। PBT में 12.8% का इजाफा हुआ और यह ₹254.95 करोड़ दर्ज किया गया। लेकिन, मालिकों का नेट प्रॉफिट 3.5% गिरकर ₹190.37 करोड़ पर आ गया। कंसोलिडेटेड ईपीएस (EPS) ₹5.40 रहा, जो पिछले साल ₹5.60 था।
9 महीने (9M FY26) के कंसोलिडेटेड नतीजों की बात करें तो यहां भी अच्छी वृद्धि देखने को मिली। रेवेन्यू फ्रॉम ऑपरेशन्स 30.3% बढ़कर ₹4,436.88 करोड़ पर पहुंच गया। PBT में 63.6% की जबरदस्त उछाल के साथ यह ₹1,239.01 करोड़ रहा, और नेट प्रॉफिट 60.2% बढ़कर ₹947.91 करोड़ दर्ज किया गया। कंसोलिडेटेड ईपीएस (EPS) ₹26.90 रहा, जो पिछले साल ₹16.79 था।
🚀 नतीजों के पीछे की वजहें
9 महीने के नतीजों में इस मजबूत ग्रोथ का एक बड़ा कारण 'अदर इनकम' (Other Income) में हुई बढ़ोतरी है, जो पिछले साल ₹104.41 करोड़ की तुलना में बढ़कर ₹238.72 करोड़ हो गई। इसमें ब्याज, एलएलपी (LLP) में शेयर ऑफ प्रॉफिट/(लॉस), और निवेशों के फेयर वैल्यू में बदलाव जैसे हिस्से शामिल थे। हालांकि, कैश फ्लो (Cash Flow) के आंकड़े नहीं दिए गए हैं, इसलिए नेट प्रॉफिट और कैश फ्लो के बीच तुलनात्मक विश्लेषण संभव नहीं है। तिमाही स्तर पर स्टैंडअलोन और कंसोलिडेटेड दोनों ही पैट मार्जिन (PAT Margin) में YoY गिरावट देखी गई।
⚠️ बड़ा रिस्क: SKS Power अधिग्रहण मामला
तिमाही और 9 महीने के नतीजों के साथ ही, कंपनी के लिए सबसे बड़ी चिंता SKS Power Generation (Chhattisgarh) Limited के अधिग्रहण से जुड़ा मामला है। NCLT (National Company Law Tribunal) से मंजूरी मिलने के बावजूद, इस अधिग्रहण और विलय की प्रक्रिया को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई है। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में अपना फैसला अभी सुरक्षित रखा है, और इस पेंडिंग फैसले का कंपनी के भविष्य पर बड़ा असर पड़ सकता है।
कंपनी ने यह भी स्पष्ट किया है कि SKS Power के एमाल्गामेशन (विलय) के कारण 9 महीने के नतीजों की तुलना पिछले साल से सीधे तौर पर नहीं की जा सकती। इसके अलावा, हाइड्रोपावर बिज़नेस की सीज़नलिटी (मौसमी उतार-चढ़ाव) भी इसके प्रदर्शन में भिन्नता ला सकती है।
📈 आगे की राह
निवेशकों को अब सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर पैनी नजर रखनी होगी, क्योंकि यह सबसे महत्वपूर्ण नियर-टर्म रिस्क है। इसके अलावा, कंपनी किस तरह 9 महीने की ग्रोथ को Q4 में बनाए रखती है और अपने परिचालन को कितना कुशल बनाती है, यह भी भविष्य के प्रदर्शन के लिए महत्वपूर्ण होगा। नई लेबर कोट्स (New Labour Codes) के प्रभाव को फिलहाल 'मटेरियल नहीं' माना गया है, लेकिन इस पर भी नजर रखना जरूरी होगा।