Sarda Energy and Minerals की सब्सिडियरी Sarda Metals & Alloys ने ₹300 करोड़ के निवेश को मंजूरी दी है। यह पैसा विज़ियनगरम प्लांट में वेस्ट हीट रिकवरी प्लांट और मिनरल वूल कैपेसिटी बढ़ाने में लगाया जाएगा।
Detailed Coverage
Sarda Energy and Minerals लिमिटेड ने अपनी पूरी तरह से स्वामित्व वाली सब्सिडियरी Sarda Metals & Alloys लिमिटेड के ज़रिए ₹300 करोड़ के कैपिटल स्पेंडिंग प्लान का ऐलान किया है। इस पैसे को सब्सिडियरी के विज़ियनगरम फैसिलिटी में दो बड़े प्रोजेक्ट्स पर खर्च किया जाएगा: पहला, एक वेस्ट हीट रिकवरी पावर प्लांट (Waste Heat Recovery Power Plant) का निर्माण और दूसरा, मिनरल वूल (Mineral Wool) के प्रोडक्शन कैपेसिटी का विस्तार।
ग्रीन एनर्जी और प्रोडक्शन पर फोकस
कंपनी ने इस निवेश को अपनी सस्टेनेबिलिटी (Sustainability) पहल का हिस्सा बताया है। इसका मकसद वेस्ट हीट को पावर जनरेशन के लिए इस्तेमाल करके एनर्जी एफिशिएंसी (Energy Efficiency) को बेहतर बनाना है। वहीं, मिनरल वूल फैसिलिटी का विस्तार करके कंपनी मार्केट की मांग को पूरा करने के लिए अपने प्रोडक्शन को बढ़ाना चाहती है।
डेट घटाने की कवायद और फाइनेंशियल पोजीशन
पिछले एक साल से कंपनी अपने बैलेंस शीट (Balance Sheet) को मजबूत करने पर काम कर रही है। हालिया अपडेट्स में मैनेजमेंट ने बताया कि कंपनी स्टैंडअलोन (Standalone) बेसिस पर डेट-फ्री (Debt-Free) हो चुकी है। इसके अलावा, मार्च 2026 तक कंसोलिडेटेड नेट डेट (Consolidated Net Debt) में करीब 85% की भारी कमी आएगी, जो घटकर लगभग ₹200 करोड़ रह जाएगा। मैनेजमेंट का पहले से ही कंसोलिडेटेड बेसिस पर डेट-फ्री होने का लक्ष्य रहा है। हालांकि, बड़े प्रोजेक्ट्स जैसे SKS पावर प्लांट में चल रहे विस्तार से डेट लेवल में समय-समय पर उतार-चढ़ाव आ सकता है। कंपनी की वर्तमान रणनीति के तहत, इन इन्वेस्टमेंट्स को पूरा करने के लिए ऑपरेशंस से जनरेट होने वाले कैश का इस्तेमाल किया जाता है।
ऑपरेशनल स्टेटस और पावर एसेट्स
Sarda Energy and Minerals के पास 600 मेगावाट की पावर पोर्टफोलियो है। 2026 की शुरुआत में शेड्यूल मेंटेनेंस (Scheduled Maintenance) पूरा होने के बाद, कंपनी के पावर प्लांट्स अभी सामान्य रूप से काम कर रहे हैं। कंपनी लॉन्ग-टर्म परचेज एग्रीमेंट्स (Long-Term Purchase Agreements) और शॉर्ट-टर्म मार्केट सेल्स (Short-Term Market Sales) के ज़रिए अपनी पावर बेचती है। इसके अलावा, जून 2026 के आसपास 30 मेगावाट की एक नई कैप्टिव पावर यूनिट (Captive Power Unit) शुरू होने वाली थी। इन पावर एसेट्स में स्थिर ऑपरेशनल परफॉरमेंस बनाए रखना ज़रूरी है, क्योंकि पावर रियलाइजेशन (Power Realisations) कंपनी के ओवरऑल फाइनेंशियल परफॉरमेंस में एक अहम फैक्टर है।
निवेशक विज़ियनगरम में हो रहे ₹300 करोड़ के इस विस्तार की प्रगति पर नज़र रख सकते हैं, खासकर वेस्ट हीट रिकवरी यूनिट के टाइमलाइन और एक्सपैंडेड मिनरल वूल कैपेसिटी के शुरू होने पर। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि कंपनी डेट कम करने पर ध्यान बनाए रखते हुए इन प्रोजेक्ट्स को कैसे पूरा करती है।
