📉 मर्जर की राह में रेगुलेटरी जांच
Salasar Techno Engineering Limited ने हिल व्यू इन्फ्राबिल्ड लिमिटेड (Hill View Infrabuild Limited) के साथ अपने प्रस्तावित मर्जर (Scheme of Amalgamation) को आगे बढ़ाने में एक बड़ा कदम उठाया है। कंपनी को 04 फरवरी, 2026 को नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) और BSE लिमिटेड से ऑब्जरवेशन लेटर्स (Observation Letters) और 'नो ऑब्जेक्शन' लेटर्स (No Objection Letters) मिल गए हैं। यह नैशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) में मर्जर स्कीम फाइल करने के लिए एक जरूरी कदम है।
🔍 SEBI के कड़े नियम और खुलासे
इन ऑब्जरवेशन लेटर्स में, खासकर NSE की ओर से 04 फरवरी, 2026 की तारीख वाले पत्र में, सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज बोर्ड ऑफ इंडिया (SEBI) के 05 अगस्त, 2025 के मूल कमेंट्स और टिप्पणियों को शामिल किया गया है। ये नियम मैनेजमेंट के लिए एक सख्त चेकलिस्ट तैयार करते हैं और रेगुलेटरी जांच प्रक्रिया पर जोर देते हैं:
- कानूनी मोर्चे पर पूरी पारदर्शिता: इसमें प्रमोटर्स (Promoters) और डायरेक्टर्स (Directors) सहित दोनों कंपनियों को किसी भी चल रहे एडजुडिकेशन (Adjudication), रिकवरी प्रोसीडिंग्स (Recovery Proceedings), अभियोजन (Prosecutions) या अन्य प्रवर्तन (Enforcement) कार्रवाइयों का पूरा खुलासा करना होगा। इससे निवेशकों को सभी संभावित देनदारियों और जोखिमों के बारे में पता चलेगा।
- समय पर फाइनेंसियल: वैल्यूएशन रिपोर्ट्स (Valuation Reports) के लिए इस्तेमाल की गई फाइनेंसियल जानकारी छह महीने से ज्यादा पुरानी नहीं होनी चाहिए। यह मर्ज की गई कंपनी की सटीक और वर्तमान वित्तीय स्थिति पेश करने के लिए महत्वपूर्ण है।
- सेबी सर्कुलर का पालन: सभी लागू SEBI सर्कुलर और मास्टर सर्कुलर का सख्ती से पालन करना अनिवार्य है।
- देनदारी ट्रांसफर का आश्वासन: एक मुख्य आवश्यकता यह सुनिश्चित करना है कि ट्रांसफरर कंपनी (Hill View Infrabuild Limited) की सभी देनदारियों (Liabilities) को पूरी तरह से ट्रांसफरेरी कंपनी (Salasar Techno Engineering Limited) में ट्रांसफर किया जाए।
- शेयरधारकों को जानकारी: शेयरधारकों को विस्तृत जानकारी देनी होगी, जिसमें स्कीम से पहले और बाद के फाइनेंसियल, मर्जर के पीछे की वजहें और तालमेल (Synergies), रेवेन्यू-जेनरेटिंग कैपेसिटी पर असर, विस्तृत लागत-लाभ विश्लेषण (Cost-Benefit Analysis), और सटीक शेयरहोल्डिंग पैटर्न (शेयरधारिता पैटर्न) (मर्जर से पहले, बाद में, और ड्राफ्ट फाइलिंग के बाद हुए बदलाव) शामिल हैं।
- लंबित कार्रवाइयों का खुलासा: संबंधित संस्थाओं, उनके प्रमोटर्स, डायरेक्टर्स और की मैनेजेरियल पर्सनल (KMPs) के खिलाफ किसी भी लंबित कार्रवाई का खुलासा करना होगा, साथ ही ट्रांसफरेरी कंपनी पर उनके संभावित प्रभाव को भी बताना होगा।
- डीमैट शेयर: मर्जर के हिस्से के रूप में जारी किए जाने वाले सभी प्रस्तावित इक्विटी शेयर (Equity Shares) डीमैटेरियलाइज्ड (Dematerialized) रूप में होने चाहिए।
⏳ समय-सीमा और एक्सचेंजों की सतर्कता
NSE का 'ऑब्जरवेशन लेटर' 04 फरवरी, 2026 से छह महीने की अवधि के लिए वैध है। इस दौरान Salasar Techno Engineering को NCLT में स्कीम सबमिट करनी होगी। यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि एक्सचेंज के ये लेटर किसी भी अन्य अधिनियम या रेगुलेशन के तहत अंतिम मंजूरी नहीं हैं। NSE स्पष्ट रूप से आपत्ति उठाने का अधिकार सुरक्षित रखता है यदि प्रस्तुत जानकारी अधूरी, गलत या भ्रामक पाई जाती है, जो एक्सचेंजों से अपेक्षित निरंतर सतर्कता को दर्शाता है।
