Saint-Gobain India: ईंटों को कहें अलविदा! CEO का बड़ा दांव, अब घरों में लगेंगी जिप्सम बोर्ड

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AuthorKaran Malhotra|Published at:
Saint-Gobain India: ईंटों को कहें अलविदा! CEO का बड़ा दांव, अब घरों में लगेंगी जिप्सम बोर्ड

Saint-Gobain India के CEO, श्रीधर एन, देश के निर्माण क्षेत्र में क्रांति लाने की तैयारी में हैं। उनका लक्ष्य है कि अब घरों और ऑफिसों के निर्माण में ईंटों और पारंपरिक तरीकों की जगह जिप्सम बोर्ड और इंसुलेशन (Insulation) मटेरियल का इस्तेमाल बढ़े। यह बदलाव ऊर्जा दक्षता (Energy Efficiency) को बढ़ाने के लिए है, लेकिन इसमें उपभोक्ता की आदतों को बदलने जैसी चुनौतियाँ भी हैं। निवेशकों के लिए यह जानना ज़रूरी है कि स्टॉक एक्सचेंज पर लिस्टेड Saint-Gobain Sekurit India, ऑटोमोटिव ग्लास सेगमेंट में काम करती है और इस जिप्सम-केंद्रित कंस्ट्रक्शन बिजनेस से अलग है।

Saint-Gobain India के CEO, श्रीधर एन, देश के कंस्ट्रक्शन सेक्टर को बदलने के लिए एक बड़ी रणनीति पर काम कर रहे हैं। कंपनी सक्रिय रूप से इस क्षेत्र को पारंपरिक ईंट-और-गारा (brick-and-mortar) बनाने के तरीकों से हटाकर जिप्सम बोर्ड और मॉडर्न इंसुलेशन मटेरियल जैसे विकल्पों की ओर ले जाने की कोशिश कर रही है। यह कंपनी की रीजनल ग्रोथ स्ट्रेटेजी का एक अहम हिस्सा है।

ड्राई कंस्ट्रक्शन की ओर कदम

कंपनी भारी ईंट की दीवारों की जगह जिप्सम बोर्ड और ग्लास वूल (Glass Wool) व स्टोन वूल (Stone Wool) जैसे इंसुलेशन प्रोडक्ट्स को बढ़ावा दे रही है। ये मैटेरियल्स पश्चिमी देशों में ड्राई कंस्ट्रक्शन के लिए काफी इस्तेमाल होते हैं। कंपनी का कहना है कि ये हल्के होते हैं, जिससे कंस्ट्रक्शन की लागत कम हो सकती है। साथ ही, ये बेहतर थर्मल और साउंड इंसुलेशन भी प्रदान करते हैं। इस बेहतर इंसुलेशन से बिल्डिंग ओनर्स अपनी कूलिंग की एनर्जी खपत कम कर सकते हैं, जो एक बड़ा लॉन्ग-टर्म कॉस्ट-सेवर है।

इस बदलाव को लाने के लिए Saint-Gobain आर्किटेक्ट्स, रियल एस्टेट डेवलपर्स और सरकारी निकायों के साथ मिलकर काम कर रही है। इस स्ट्रेटेजी में बिल्डिंग कोड्स को एनर्जी एफिशिएंसी और मटेरियल परफॉर्मेंस को प्राथमिकता देने के लिए प्रभावित करना शामिल है। कंपनी कंस्ट्रक्शन वर्कर्स को इन नए मैटेरियल्स को सही तरीके से इंस्टॉल करने के लिए ट्रेनिंग प्रोग्राम्स में भी निवेश कर रही है। बड़े डेवलपर्स के साथ पार्टनरशिप पहले से ही हो चुकी है। साथ ही, यह अहमदाबाद की CEPT यूनिवर्सिटी जैसे एजुकेशनल इंस्टीट्यूट्स के साथ मिलकर भविष्य के आर्किटेक्ट्स को इन कंस्ट्रक्शन मेथड्स के बारे में शिक्षित कर रही है।

निवेशकों के लिए ज़रूरी अंतर

मार्केट पार्टिसिपेंट्स के लिए यह समझना बेहद ज़रूरी है कि इस बिजनेस का स्ट्रक्चर कैसा है। जबकि Saint-Gobain कंस्ट्रक्शन मैटेरियल्स की एक ग्लोबल कंपनी है, भारतीय स्टॉक एक्सचेंजों पर लिस्टेड कंपनी Saint-Gobain Sekurit India, मुख्य रूप से ऑटोमोटिव ग्लास सेगमेंट में काम करती है। इस लिस्टेड कंपनी में जिप्सम बोर्ड या कंस्ट्रक्शन-फोक्स्ड मैटेरियल्स का बिजनेस शामिल नहीं है। निवेशक अक्सर दोनों में कंफ्यूज हो जाते हैं, लेकिन जिप्सम और होम कंस्ट्रक्शन का बिजनेस भारत में ग्रुप के प्राइवेट ऑपरेशंस का हिस्सा है, न कि लिस्टेड ऑटोमोटिव ग्लास सब्सिडियरी का।

जोखिम और बाजार की बाधाएं

भारतीय कंस्ट्रक्शन सेक्टर में यह बदलाव लाना एक कॉम्प्लेक्स और लॉन्ग-टर्म टास्क है। सबसे बड़ी चुनौती उपभोक्ता और इंडस्ट्री का जड़ता (inertia) है। पारंपरिक ईंट निर्माण भारतीय बिल्डिंग कल्चर में गहराई से जुड़ा हुआ है, और ड्राई वॉल्स की ओर पसंद बदलने के लिए बड़े पैमाने पर शिक्षा और विश्वसनीयता साबित करने की आवश्यकता है। इसके अलावा, नई कंस्ट्रक्शन तकनीकों को अपनाना सरकारी बिल्डिंग कोड्स के विकास और डेवलपर्स की स्थापित प्रथाओं से दूर जाने की इच्छा पर बहुत अधिक निर्भर करता है।

हालांकि पैरेंट कंपनी भारत में अपने फुटप्रिंट का विस्तार करने के लिए अगले पांच सालों में लगभग $1 बिलियन का भारी निवेश कर रही है, इस बदलाव की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि मार्केट इन मॉडर्न मैटेरियल्स को कितनी जल्दी अपनाता है। लिस्टेड ऑटोमोटिव ग्लास बिजनेस पर नजर रखने वाले निवेशकों के लिए, परफॉर्मेंस ऑटो इंडस्ट्री के प्रोडक्शन वॉल्यूम और कॉस्ट प्रेशर से जुड़ी रहेगी, न कि कंस्ट्रक्शन सेक्टर के ट्रांजिशन से। इस इनिशिएटिव के लिए अगली महत्वपूर्ण अपडेट बड़े रियल एस्टेट प्रोजेक्ट्स में एडॉप्शन की दर और राष्ट्रीय बिल्डिंग कोड्स में किसी भी आगामी बदलाव से मिलेगी।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.