फ्रांसीसी एयरोस्पेस कंपनी Safran ने हैदराबाद में LEAP इंजनों के लिए अपना नया मेंटेनेंस, रिपेयर और ओवरहॉल (MRO) सेंटर शुरू कर दिया है। यह सुविधा भारतीय एयरलाइंस को विदेशी सेंटरों पर निर्भरता कम करने और इंजन की सर्विसिंग का समय घटाने में मदद करेगी।
LEAP इंजनों का स्थानीय सर्विसिंग
Safran Aircraft Engine Services India (SAESI) ने आधिकारिक तौर पर हैदराबाद स्थित अपनी नई फैसिलिटी में LEAP इंजनों के मेंटेनेंस, रिपेयर और ओवरहॉल (MRO) का काम शुरू कर दिया है। यह भारतीय एविएशन इंडस्ट्री के लिए एक बड़ा डेवलपमेंट है, क्योंकि अब LEAP इंजन, जो कई भारतीय एयरलाइन्स के एयरक्राफ्ट्स को पावर देते हैं, यहीं पर सर्विस हो सकेंगे।
क्षमता विस्तार और इंजन ओवरहॉल
यह फैसिलिटी पूरी क्षमता से काम करने पर हर साल 300 LEAP इंजन का ओवरहॉल कर पाएगी। फिलहाल, यहां 300 से ज्यादा लोग काम कर रहे हैं और कंपनी की योजना है कि जैसे-जैसे सेंटर का विस्तार होगा, कर्मचारियों की संख्या बढ़ाकर 1,100 कर दी जाएगी। भारत में यह क्षमता स्थापित करने से इंजनों के बड़े रिपेयर के लिए उन्हें विदेशों में भेजने से जुड़ी लॉजिस्टिक्स और समय की देरी जैसी समस्याओं का समाधान होगा।
ट्रेनिंग हब और स्थानीय विकास
इंजन सर्विसिंग के अलावा, Safran ने हैदराबाद में एक ऑन-साइट ट्रेनिंग सेंटर भी स्थापित किया है। इस पहल का मकसद हर साल 100 से अधिक भारतीय इंजीनियरों और टेक्नीशियनों को ट्रेनिंग देना है। इस प्रोग्राम में फ्रांस स्थित Safran के ग्लोबल इंजन फैसिलिटीज में एडवांस्ड प्रैक्टिकल ट्रेनिंग भी शामिल है। इससे एक स्पेशलाइज्ड वर्कफोर्स तैयार होगी जो इंटरनेशनल एयरोस्पेस स्टैंडर्ड्स को पूरा कर सकेगी।
भारतीय एविएशन इकोसिस्टम पर असर
पिछले कुछ सालों में भारतीय एविएशन सेक्टर में एयरक्राफ्ट के ऑर्डर में भारी बढ़ोतरी देखी गई है, जिससे मेंटेनेंस सर्विसेस की मांग बढ़ गई है। पहले, डोमेस्टिक एयरलाइन्स ज़्यादातर विदेशों में स्थित सर्विस प्रोवाइडर्स पर निर्भर थीं, जिससे मेंटेनेंस के दौरान एयरक्राफ्ट के ग्राउंड टाइम के साथ-साथ लागत भी बढ़ जाती थी। इन सर्विसेस को लोकल करने से Safran भारत को एयरोस्पेस इंजीनियरिंग में वैल्यू चेन में ऊपर ले जाने की पोजिशन में ला रहा है।
निवेशकों और इंडस्ट्री के लिए, यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि फैसिलिटी अपने सर्विस स्टैंडर्ड्स को बनाए रखते हुए सालाना 300 इंजन के टारगेट तक कैसे पहुंचती है। इस फैसिलिटी की सफलता भारत के एविएशन इंफ्रास्ट्रक्चर में भविष्य के निवेश को प्रभावित कर सकती है और डोमेस्टिक एयरलाइन्स के मेंटेनेंस कॉस्ट और फ्लीट अवेलेबिलिटी को बदल सकती है। कंपनी ने भारत को अपने लॉन्ग-टर्म ग्रोथ के लिए एक अहम बाजार माना है, और इस ट्रेनिंग और सर्विस प्रोग्राम का एग्जीक्यूशन उसकी लोकल स्ट्रैटेजी के लिए ज़रूरी होगा।
