ऑडिटर की चेतावनी: क्या Sadbhav Infra चलाने लायक बची है?
Sadbhav Infrastructure Project Ltd. (SIPL) के लिए ताजा तिमाही नतीजे (Q3 FY26) कई गंभीर सवाल खड़े कर रहे हैं। जहां कंपनी ने कंसोलिडेटेड रेवेन्यू में कुछ ग्रोथ दिखाई, वहीं नेट लॉस (Net Loss) इतना बड़ा है कि कंपनी के ऑडिटर तक उसकी जान बचाने की क्षमता पर शक करने लगे हैं। ऑडिटर की रिपोर्ट में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि कंपनी के चलते रहने की क्षमता पर 'मटेरियल अनिश्चितता' (Material Uncertainty) है, जिसका मतलब है कि आने वाले 12 महीनों में कंपनी को चलाना मुश्किल हो सकता है।
वित्तीय नतीजे: स्टैंडअलोन और कंसोलिडेटेड में भारी घाटा
कंपनी ने स्टैंडअलोन (Standalone) आधार पर Q3 FY26 में ₹28.51 मिलियन का रेवेन्यू दर्ज किया, जो पिछले साल के मुकाबले 5.3% कम है। लेकिन, इस दौरान कंपनी को ₹1,199.67 मिलियन का भारी नेट लॉस हुआ। नौ महीनों की बात करें तो रेवेन्यू ₹100.47 मिलियन रहा, जो 13.0% बढ़ा, मगर लॉस बढ़कर ₹1,569.29 मिलियन हो गया।
वहीं, कंसोलिडेटेड (Consolidated) नतीजों में रेवेन्यू में 18.2% की वृद्धि के साथ यह ₹2,055.37 मिलियन पर पहुंच गया। लेकिन, टॉप-लाइन ग्रोथ बॉटम-लाइन पर नहीं दिखी। कंसोलिडेटेड नेट लॉस ₹1,091.20 मिलियन रहा। नौ महीनों में कंसोलिडेटेड रेवेन्यू ₹5,728.79 मिलियन तक पहुंचा, जिसमें 13.6% की बढ़ोतरी हुई, पर नेट लॉस ₹408.41 मिलियन रहा। पिछले साल की इसी अवधि में कंपनी मुनाफे में थी।
ऑडिटर की चिंताएं: सब्सिडियरी की समस्याएं और एसेट वैल्यू
ऑडिटर्स की चिंता की जड़ कंपनी की कुछ प्रमुख सब्सिडियरी (Subsidiary) कंपनियां हैं। ऑडिटर ने RPTPL और RHTPL जैसी सब्सिडियरी कंपनियों के एसेट्स (Assets) की रिकवरी पर मैनेजमेंट के आकलन को सत्यापित नहीं कर पाए हैं। इसका मतलब है कि हो सकता है कि सब्सिडियरी कंपनियों की बैलेंस शीट में एसेट्स की वैल्यू ज्यादा दिखाई गई हो और असलियत में वे उतने मूल्यवान न हों।
इन सब्सिडियरी कंपनियों को नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) से टर्मिनेशन नोटिस भी मिले हैं, जिससे उनकी वित्तीय स्थिति और डांवाडोल हो गई है।
खास खर्चे और कानूनी विवाद
Q3 कंसोलिडेटेड नतीजों में ₹1,398.27 मिलियन का 'एक्सेप्शनल आइटम्स' (Exceptional Items) का बड़ा इंपैक्ट दिखा। इसमें Sadbhav Udaipur Highway Limited (SUDHL) और Sadbhav Rudrapur Highway Limited (SRHL) जैसी सब्सिडियरी में इम्पेयरमेंट (Impairment) और राइट-ऑफ (Write-off) शामिल हैं। इसके अलावा, NHAI के साथ परियोजनाओं को लेकर चल रहे आर्बिट्रेशन (Arbitration) और कानूनी विवाद भी कंपनी के लिए बड़ी मुसीबत बने हुए हैं।