डी-मर्जर के बाद SKF India की कहानी
डी-मर्जर के इस अहम पड़ाव पर SKF India की कहानी मिली-जुली है। कंपनी ने अपने ऑटोमोटिव और इंडस्ट्रियल बिजनेस को अलग करने का फैसला लिया था, जिसका असर अब नतीजों में दिख रहा है। इस फाइनेंशियल ईयर 2026 के लिए SKF India का कुल रेवेन्यू 15.4% की तेजी के साथ ₹2,129.6 करोड़ तक पहुंच गया। इलेक्ट्रिक मोबिलिटी और इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे सेक्टर्स पर कंपनी के फोकस ने इस ग्रोथ में अहम भूमिका निभाई। खासकर ऑटोमोटिव सेगमेंट में चौथी तिमाही में रेवेन्यू 20.7% बढ़कर ₹594.5 करोड़ रहा।
प्रॉफिट में गिरावट का मुख्य कारण
लेकिन, इस रेवेन्यू ग्रोथ के बावजूद, पूरे फाइनेंशियल ईयर के लिए प्रॉफिट बिफोर टैक्स (Profit Before Tax) 33.8% घटकर ₹235 करोड़ रह गया। चौथी तिमाही के नतीजे भी चिंताजनक रहे, जहाँ प्रॉफिट बिफोर टैक्स 58.4% गिरकर ₹46.1 करोड़ पर आ गया, जो पिछले साल इसी अवधि में ₹110.7 करोड़ था। इसका मुख्य कारण एकमुश्त रीस्ट्रक्चरिंग और रेगुलेटरी कॉस्ट्स बताए जा रहे हैं।
इंडस्ट्रियल सेगमेंट पर असर
डी-मर्जर की रणनीति का असर इंडस्ट्रियल सेगमेंट पर साफ दिख रहा है। SKF India (Industrial) Limited ने चौथी तिमाही में ₹19.7 करोड़ का नेट लॉस दर्ज किया है, जबकि पिछले साल की इसी तिमाही में ₹203 करोड़ का मुनाफा हुआ था। इस सेगमेंट का रेवेन्यू भी 51% गिर गया और EBITDA मार्जिन 23.4% से घटकर 5.6% रह गया। यह परफॉरमेंस इंडस्ट्रियल सेक्टर के लिए पॉजिटिव आउटलुक पर सवाल खड़े करती है।
वैल्यूएशन और कंपीटिटर्स
बाजार में SKF India का वैल्यूएशन अपने कुछ बड़े प्रतिस्पर्धियों के मुकाबले कम है। जहाँ SKF India का P/E रेश्यो लगभग 17.12x-19.8x के आसपास है, वहीं Schaeffler India का P/E 51x-59x और Timken India का P/E 61x-74x के दायरे में है। सेक्टर का औसत P/E भी 26x-29x के आसपास है। यह दिखाता है कि निवेशक SKF India की रेवेन्यू ग्रोथ को मजबूत प्रॉफिट में बदलने की क्षमता पर संदेह कर रहे हैं।
एनालिस्ट्स का नजरिया और भविष्य की राह
विश्लेषकों (Analysts) ने फिलहाल 'होल्ड' (Hold) रेटिंग बरकरार रखी है और वे मार्जिन रिकवरी के स्पष्ट संकेतों का इंतजार कर रहे हैं। कंपनी के नए CFO, मयंक होलानी (Mayank Holani) की नियुक्ति ऐसे समय में हुई है जब कंपनी वित्तीय चुनौतियों से निपट रही है। कंपनी के मैनेजमेंट का सालाना ₹80-₹100 करोड़ का कैपिटल एक्सपेंडिचर प्लान विस्तार, लोकलाइजेशन और इंपोर्ट सब्स्टीट्यूशन के लिए पॉजिटिव है। ऑटोमोटिव बिजनेस में 9.9% से 11% सालाना ग्रोथ का अनुमान है, जबकि इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट के सहारे इंडस्ट्रियल सेगमेंट में लंबी अवधि में 45.1% तक की ग्रोथ की उम्मीद की जा रही है।
डिविडेंड की सिफारिश
FINANCIAL YEAR 2026 के लिए बोर्ड ने ₹40 प्रति शेयर के फाइनल डिविडेंड (Dividend) की सिफारिश की है, जो शेयरधारकों की मंजूरी पर निर्भर करेगा। हालांकि, लगातार प्रॉफिटेबिलिटी हासिल करने के लिए प्रभावी लागत प्रबंधन और डी-मर्ज्ड बिजनेस का स्मूथ इंटीग्रेशन बहुत जरूरी होगा।