मंगलवार को अमेरिकी-ईरान के बीच बढ़ते तनाव (US-Iran Tensions) के चौथे दिन, जहाँ दक्षिण कोरियाई शेयर बाज़ार KOSPI 1% की गिरावट के साथ बंद हुआ, वहीं डिफेंस सेक्टर के शेयरों ने सबको चौंका दिया। एशिया-प्रशांत क्षेत्र के अन्य बाज़ारों में भी गिरावट देखी गई – जापान का Nikkei 225 1.35%, ताइवान का TAIEX 0.9% और हांगकांग का Hang Seng 2.14% लुढ़के। इसके विपरीत, चीन का शंघाई कंपोजिट इंडेक्स 0.47% की मामूली बढ़त के साथ खुला। बाज़ार की चिंताओं और बढ़ते तेल के दामों के बीच, डिफेंस स्टॉक्स में 'सेफ्टी की तलाश' का रुख देखने को मिला। इस तेज़ी का नेतृत्व Hanwha Aerospace ने किया, जिसके शेयर 22% तक चढ़ गए। Korea Aerospace Industries में 7% से ज़्यादा की बढ़त दर्ज की गई। Lignex1, Victek और Firstec जैसी कंपनियों ने 20% से ज़्यादा की छलांग लगाई, जबकि Poongsan और Hyundai Rotem के शेयरों में क्रमश: 14% और 18% का शानदार उछाल देखा गया।
इस शानदार प्रदर्शन के पीछे सिर्फ़ मौजूदा भू-राजनीतिक तनाव ही नहीं, बल्कि दक्षिण कोरिया की एक लंबी अवधि की राष्ट्रीय योजना भी है। सियोल का लक्ष्य 2030 तक दुनिया का चौथा सबसे बड़ा डिफेंस उद्योग बनना है। इस महत्वाकांक्षी योजना को सरकारी निवेश और AI और ड्रोन जैसी एडवांस्ड टेक्नोलॉजी पर ज़ोर देकर बढ़ावा दिया जा रहा है। यह नज़रिया पहले से ही एक्सपोर्ट में दिख रहा है, जहाँ पोलैंड और रोमानिया जैसे देशों से बड़े ऑर्डर मिले हैं। सरकार 2030 तक 100 डिफेंस स्टार्टअप्स और 30 वेंचर कंपनियों को बढ़ावा देने का लक्ष्य रख रही है, जिससे इंडस्ट्री का फोकस पारंपरिक मैन्युफैक्चरिंग से हटकर हाई-टेक इनोवेशन की ओर बढ़ रहा है।
जहां तक वैल्यूएशंस की बात है, तो प्रमुख कंपनियों के P/E (प्राइस-टू-अर्निंग) रेश्यो उनके ग्रोथ के लिहाज़ से आकर्षक दिखते हैं। Hanwha Aerospace का P/E रेश्यो लगभग 24.6 से 50.6 (TTM Feb 2026) के बीच है, वहीं Korea Aerospace Industries का अनुमानित P/E 2026 के लिए 47.8 और सामान्य आधार पर 125.65 है। LIG Nex1 का P/E 34.6x और Poongsan का 17.71 है। इंडस्ट्री के औसत P/E 33.1x को देखते हुए, ये वैल्यूएशंस कई मामलों में दिलचस्प हैं। दक्षिण कोरियाई डिफेंस फर्में अब 'एक्सपोर्ट जायंट' के तौर पर पहचानी जा रही हैं, जो Lockheed Martin जैसे अमेरिकी और BAE Systems जैसे यूरोपीय दिग्गजों को एडवांस्ड और किफायती समाधान देकर कड़ी टक्कर दे रही हैं। नई टेक्नोलॉजी को अपनाने में उनकी तेज़ी उन्हें ग्लोबल हथियारों के बाज़ार में एक मज़बूत दावेदार बनाती है।
हालांकि, इस सेक्टर के विकास में कुछ खतरे भी छिपे हैं। डिफेंस सेक्टर का प्रदर्शन सीधे तौर पर वैश्विक भू-राजनीतिक अस्थिरता से जुड़ा है, जो अंतर्राष्ट्रीय संबंधों में बदलाव या अचानक संघर्ष के बढ़ने से प्रभावित हो सकता है। दक्षिण कोरियाई कंपनियां भले ही आगे बढ़ रही हों, लेकिन उन्हें स्थापित वैश्विक खिलाड़ियों और उभरते टेक-फोकस्ड प्रतिस्पर्धियों से कड़ी चुनौती का सामना करना पड़ता है। ऐतिहासिक रूप से, दक्षिण कोरिया के डिफेंस इंडस्ट्री का विकास अमेरिकी प्रभाव में हुआ है, और आज भी यह पूरी तरह से स्वतंत्र नहीं है। इसके अलावा, बाज़ार में तेज़ी के बावजूद, 'कोरिया डिस्काउंट' - जो उत्तर कोरिया से जुड़ा भू-राजनीतिक जोखिम और कॉर्पोरेट गवर्नेंस संबंधी चिंताओं के कारण होता है - फिर से उभर सकता है, जिससे वैल्यूएशंस प्रभावित हो सकते हैं। वर्तमान उछाल, हालांकि महत्वपूर्ण है, व्यापक बाज़ार में गिरावट या तनाव में कमी आने पर प्रभावित हो सकता है।
इन सबके बीच, एनालिस्ट्स (Analysts) इस सेक्टर के भविष्य को लेकर उत्साहित हैं। Macquarie का मानना है कि कोरियाई इक्विटीज़ (Equities) में अच्छी खासी तेज़ी के बाद भी वे आकर्षक दिख रही हैं, जिसका कारण मज़बूत अर्निंग्स मोमेंटम और पर्याप्त लिक्विडिटी है। डिफेंस सेक्टर को लंबी अवधि के अपसाइकिल (Upcycles) के शुरुआती चरणों में देखा जा रहा है, जहां सीमित वैश्विक प्रतिस्पर्धा और बढ़ते भू-राजनीतिक मतभेद कोरियाई सप्लायर्स के पक्ष में हैं। Hanwha Aerospace और Korea Aerospace Industries जैसी कंपनियां अगली पीढ़ी के प्लेटफॉर्म विकसित कर रही हैं और प्रमुख एक्सपोर्ट कॉन्ट्रैक्ट हासिल कर रही हैं, जिससे इस सेक्टर में लगातार ग्रोथ की उम्मीद है। नवाचार (Innovation) और एक्सपोर्ट प्रमोशन के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता डिफेंस इंडस्ट्री को एक प्रमुख आर्थिक चालक के रूप में स्थापित करती है।
