एविएशन टेक्नोलॉजी कंपनी SITA अब भारत को अपना लोकल सर्विस सेंटर से निकालकर एयरपोर्ट इंफ्रास्ट्रक्चर हार्डवेयर के एक्सपोर्ट हब के रूप में डेवलप कर रहा है। कंपनी भारत में बनी सेल्फ-बैग ड्रॉप सिस्टम और चेक-इन कियोस्क को एशिया-पैसिफिक के देशों में एक्सपोर्ट कर रही है।
भारत बनेगा एयरपोर्ट टेक का एक्सपोर्ट हब
ग्लोबल एविएशन टेक्नोलॉजी प्रोवाइडर SITA ने भारत में अपने ऑपरेशन्स को काफी बड़ा लिया है। कंपनी अब भारत में बनी एयरपोर्ट चेक-इन कियोस्क और सेल्फ-बैग ड्रॉप सिस्टम्स को श्रीलंका, थाईलैंड, इंडोनेशिया और वियतनाम जैसे एशिया-पैसिफिक देशों में एक्सपोर्ट कर रही है। इस कदम से भारत एविएशन इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए एक महत्वपूर्ण मैन्युफैक्चरिंग हब बन जाएगा।
SITA, जो लंबे समय से भारतीय एविएशन सेक्टर की टेक्नोलॉजी पार्टनर रही है, अब लोकल मैन्युफैक्चरिंग पार्टनर्स का फायदा उठाकर उभरते बाजारों में तेजी से बढ़ते एयरपोर्ट्स पर टेक्नोलॉजी डिप्लॉय करने के लीड टाइम और लॉजिस्टिक्स कॉस्ट को कम करने का लक्ष्य रख रही है। कंपनी ने एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया के एयरपोर्ट आधुनिकीकरण और 'डिजी यात्रा' जैसे प्रोजेक्ट्स में भी अहम भूमिका निभाई है।
एविएशन सेक्टर के लिए क्यों है अहम?
एशिया-पैसिफिक रीजन इस समय ग्लोबल एविएशन ग्रोथ का एक बड़ा केंद्र है। कई देश नए और बड़े एयरपोर्ट्स बनाने में भारी निवेश कर रहे हैं। SITA का भारत में मैन्युफैक्चरिंग करके रीजनल एक्सपोर्ट करना यह दर्शाता है कि भारत का मैन्युफैक्चरिंग इकोसिस्टम कॉस्ट-कॉम्पिटिटिव और इंटरनेशनल स्टैंडर्ड्स को पूरा करने में सक्षम हो रहा है। यह इस ट्रेंड को भी इंगित करता है कि भारत अब सिर्फ IT सर्विसेज आउटसोर्सिंग हब नहीं, बल्कि स्पेशलाइज्ड एविएशन IT फर्म्स की ग्लोबल सप्लाई चेन में इंटीग्रेट हो रहा है।
हालांकि, एविएशन टेक्नोलॉजी स्पेस में कम्पटीशन काफी ज्यादा है। SITA को Amadeus, Thales और Honeywell जैसी बड़ी ग्लोबल टेक्नोलॉजी फर्म्स से टक्कर लेनी पड़ रही है। इस एक्सपोर्ट ड्राइव में सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि कंपनी एशिया-पैसिफिक देशों के अलग-अलग रेगुलेटरी माहौल को कैसे नेविगेट करती है और एयरपोर्ट अपग्रेड्स की डिमांड कितनी बनी रहती है।
निवेशकों के लिए जरूरी जानकारी
यह जानना बेहद जरूरी है कि SITA एक ग्लोबल, इंडस्ट्री-ओन्ड ऑर्गेनाइजेशन है जिसका हेडक्वार्टर जिनेवा, स्विट्जरलैंड में है। यह कंपनी नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) या बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) पर लिस्टेड नहीं है। यानी, इसके शेयर खरीदे या बेचे नहीं जा सकते।
BSE पर लिस्टेड 'Sita Enterprises Limited' नाम की कंपनी का इस एविएशन टेक्नोलॉजी प्रोवाइडर से कोई संबंध नहीं है। यह एक अनरिलेटेड नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनी (NBFC) है। इसलिए, निवेशक इस खबर पर रिसर्च करते समय इस बात का ध्यान रखें कि वे किस SITA के बारे में पढ़ रहे हैं।
जोखिम और ध्यान देने योग्य बातें
बाजार के कम्पटीशन के अलावा, एविएशन टेक्नोलॉजी सेक्टर में कुछ खास ऑपरेशनल जोखिम भी हैं। एयरपोर्ट IT प्रोजेक्ट्स काफी कॉम्प्लेक्स होते हैं और इन्हें विभिन्न एयरलाइन्स और एयरपोर्ट ऑपरेटर्स के लेगेसी सिस्टम के साथ इंटीग्रेट करना पड़ता है। इन नए कियोस्क या बैग ड्रॉप सिस्टम्स को मौजूदा एयरपोर्ट सॉफ्टवेयर में इंटीग्रेट करने में कोई भी विफलता या देरी ऑपरेशनल दिक्कतों का कारण बन सकती है, जो कंपनी की रेपुटेशन और भविष्य के ऑर्डर्स को प्रभावित कर सकती है।
इसके अलावा, कंपनी का बिजनेस मॉडल ग्लोबल ट्रेवल डिमांड और एयरपोर्ट्स द्वारा कैपिटल-इंटेंसिव टेक्नोलॉजी अपग्रेड्स पर खर्च करने की इच्छा पर निर्भर करता है। जैसे-जैसे इंडस्ट्री आगे बढ़ेगी, यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि 'मेड-इन-इंडिया' सिस्टम्स को कॉम्पिटिटिव इंटरनेशनल मार्केट्स में कितनी तेजी से अपनाया जाता है और SITA ग्लोबल एविएशन रेगुलेटर्स द्वारा आवश्यक क्वालिटी और सपोर्ट स्टैंडर्ड्स को बनाए रखने में कितनी सक्षम है।
