SIS Ltd. ने अगले तीन सालों, यानी FY27 तक हर साल **15-20%** की ऑर्गेनिक ग्रोथ बनाए रखने का लक्ष्य रखा है। कंपनी ने मौजूदा फाइनेंशियल ईयर की पहली तिमाही (Q1 FY27) में दमदार शुरुआत की है, जहाँ रेवेन्यू में **29.7%** का उछाल आकर **₹4,603.58 करोड़** रहा। फिलहाल कंपनी अंतरराष्ट्रीय बाजारों में बढ़ती सैलरी लागत को मैनेज करने के लिए कॉन्ट्रैक्ट की कीमतों को फिर से तय करने पर ध्यान दे रही है। साथ ही, निवेशक कंपनी के शेयर बायबैक प्रोग्राम पर भी नजर रख रहे हैं, जिसकी अधिकतम कीमत **₹478.50** प्रति शेयर तय की गई है।
मजबूत ग्रोथ की ओर SIS Ltd.
SIS Ltd. ने अपने लॉन्ग-टर्म फाइनेंशियल गोल्स को फिर से कन्फर्म किया है। कंपनी का लक्ष्य वित्तीय वर्ष 2027 तक हर साल 15-20% की ऑर्गेनिक रेवेन्यू ग्रोथ हासिल करना है। इस लक्ष्य की ओर मजबूत कदम बढ़ाते हुए, कंपनी ने मौजूदा फाइनेंशियल ईयर की पहली तिमाही में 29.7% की ईयर-ऑन-ईयर ग्रोथ दर्ज की, जिससे कुल रेवेन्यू ₹4,603.58 करोड़ तक पहुंच गया। रेवेन्यू ग्रोथ तो शानदार रही है, लेकिन अब मैनेजमेंट का पूरा फोकस प्रॉफिट मार्जिन को स्थिर करने और सुधारने पर है।
मार्जिन दबाव से निपटने की रणनीति
कंपनी की मौजूदा प्रॉफिटेबिलिटी पर सबसे बड़ा असर अंतरराष्ट्रीय ऑपरेशंस, खासकर ऑस्ट्रेलिया और सिंगापुर में सैलरी इन्फ्लेशन का पड़ रहा है। इन देशों में बिजनेस कॉन्ट्रैक्ट्स में लेबर कॉस्ट बढ़ने का असर तुरंत नहीं दिखता। आमतौर पर, कॉन्ट्रैक्ट रिप्राइजिंग (कीमतों को फिर से तय करना) के जरिए बढ़ी हुई लागत को क्लाइंट्स तक पहुंचाने में एक से दो तिमाहियों का समय लगता है। मैनेजमेंट को उम्मीद है कि आने वाली तिमाहियों में जैसे-जैसे ये नए रेट लागू होंगे, मार्जिन पर पड़ने वाला अस्थायी दबाव कम हो जाएगा।
घरेलू बाजार में, SIS अपने सिक्योरिटी और फैसिलिटी मैनेजमेंट सेगमेंट्स में 6% का EBITDA मार्जिन हासिल करने की दिशा में काम कर रही है। इस लक्ष्य को पाने के लिए ऑपरेशंस को स्केल-अप करने और AP Securitas जैसे हालिया एक्विजिशंस का पूरा फायदा उठाने की जरूरत है। हालांकि, इन नए बिजनेसेज को इंटीग्रेट करने में शुरुआती लागतें आ सकती हैं जो प्रॉफिट मार्जिन पर थोड़ा दबाव डाल सकती हैं, लेकिन कंपनी को उम्मीद है कि सिनर्जीज (Synergies) के एहसास के साथ ये एंटिटीज ज्यादा प्रॉफिटेबल साबित होंगी।
शेयरहोल्डर रिटर्न और ऑपरेशनल आउटलुक
अपने मुख्य बिजनेस ऑपरेशंस के अलावा, SIS लिमिटेड वर्तमान में एक शेयर बायबैक प्रोग्राम भी चला रही है। बोर्ड ने ₹478.50 प्रति शेयर की अधिकतम कीमत पर इस प्रोग्राम को मंजूरी दी है, जो कंपनी के कैपिटल एलोकेशन को मैनेज करने का एक तरीका है।
आगे चलकर, कंपनी अपनी कैश फ्लो एफिशिएंसी को भी बेहतर बनाना चाहती है। क्लाइंट्स से पेमेंट कलेक्ट करने में लगने वाला समय, जिसे डेटर डेज़ (Debtor Days) कहते हैं, पहली तिमाही में मौसमी पैटर्न के कारण 66 दिनों तक पहुंच गया था। मैनेजमेंट को उम्मीद है कि आने वाले लेबर कोड में बदलाव से ऑपरेशंस स्ट्रीमलाइन होंगे, जिससे फाइनेंशियल ईयर की दूसरी छमाही तक इन डेटर डेज़ में 5 से 6 दिनों की कमी आ सकती है।
निवेशक कंपनी द्वारा 6% EBITDA मार्जिन टारगेट हासिल करने और एक्विजिशंस के सफल इंटीग्रेशन की प्रगति पर नजर रख सकते हैं। अंतरराष्ट्रीय कॉन्ट्रैक्ट्स के रीप्राइजिंग की रफ्तार, जिससे मार्जिन रिकवर हो सकें, आने वाली तिमाही रिपोर्ट्स में एक अहम फैक्टर साबित होगी।
