SIS Limited: रिकॉर्ड रेवेन्यू पर दांव, पर **₹290 करोड़** के चार्ज ने प्रॉफिट पर लगाई लगाम!

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Author Aditi Chauhan | Published at:
SIS Limited: रिकॉर्ड रेवेन्यू पर दांव, पर **₹290 करोड़** के चार्ज ने प्रॉफिट पर लगाई लगाम!
Overview

SIS Limited ने Q3 FY26 में रिकॉर्ड **₹4,185 करोड़** का कंसोलिडेटेड रेवेन्यू हासिल किया, जो पिछले साल की समान अवधि के मुकाबले **24.5%** ज्यादा है। हालांकि, ग्रेच्युटी और लीव लायबिलिटीज़ के लिए **₹290 करोड़** का एकमुश्त प्रोविज़न (Provision) दर्ज करने से ऑपरेटिंग PAT पिछले साल के मुकाबले **फ्लैट, ₹100.8 करोड़** पर रहा। इसके बावजूद, मैनेजमेंट लागत वसूलने को लेकर आश्वस्त है और लेबर रिफॉर्म्स को लॉन्ग-टर्म कंसोलिडेशन का बड़ा जरिया मान रहा है।

SIS Limited ने Q3 FY26 में अपने फाइनेंशियल्स में एक बड़ा माइलस्टोन हासिल किया है। कंपनी का कंसोलिडेटेड रेवेन्यू रिकॉर्ड ₹4,185 करोड़ पर पहुंच गया, जो पिछले साल की इसी तिमाही के मुकाबले 24.5% की जबरदस्त बढ़ोतरी है। वहीं, पिछली तिमाही (QoQ) के मुकाबले भी इसमें 11.4% का उछाल देखा गया। इसी के साथ, ऑपरेटिंग EBITDA भी ₹196 करोड़ के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया, जो पिछले साल के मुकाबले 25.2% ज्यादा है। हालांकि, ऑपरेटिंग EBITDA मार्जिन 4.5% रहा।

इस शानदार रेवेन्यू ग्रोथ के बीच, कंपनी को ₹290 करोड़ के एक बड़े एकमुश्त प्रोविज़न (One-time Exceptional Charge) का सामना करना पड़ा। यह प्रोविज़न पिछली अवधि की ग्रेच्युटी और लीव लायबिलिटीज़ (Gratuity and Leave Liabilities) के लिए था, जिसे नए लेबर कोड्स (Labor Codes) लागू होने के कारण दर्ज किया गया। इस चार्ज ने कंपनी के अंडरलाइंग प्रॉफिटेबिलिटी को छुपा दिया, जिसके चलते ऑपरेटिंग प्रॉफिट आफ्टर टैक्स (PAT) पिछले साल के मुकाबले फ्लैट होकर ₹100.8 करोड़ पर ही अटका रहा, हालांकि यह पिछली तिमाही के मुकाबले बढ़ा है। ऑपरेटिंग PAT मार्जिन 2.4% रहा। तिमाही EPS ₹7.2 रहा, जो सालाना आधार पर लगभग ₹30 का रन रेट दर्शाता है।

ऑपरेशनल एफिशिएंसी (Operational Efficiency) में सुधार के संकेत मिले हैं। रिटर्न ऑन कैपिटल एम्प्लॉयड (ROCE) पिछले साल के 12% से सुधरकर 15.2% हो गया। वहीं, डेज़ सेल्स आउटस्टैंडिंग (DSOs) घटकर 67 दिन पर आ गए।

सेगमेंट की बात करें तो, इंडिया सिक्योरिटीज़ (India Security) ने ₹1,898 करोड़ का अब तक का सबसे बड़ा रेवेन्यू दर्ज किया, जो पिछले साल के मुकाबले 33.7% ज्यादा है। फैसिलिटी मैनेजमेंट (FM) सेगमेंट में भी ₹636 करोड़ का रिकॉर्ड तिमाही रेवेन्यू आया, जिसमें 10.3% की सालाना बढ़ोतरी हुई। FM का EBITDA मार्जिन 80 बेसिस पॉइंट्स बढ़कर 5.4% हो गया और EBITDA ₹34.3 करोड़ रहा, जो 29.1% ज्यादा है। इंटरनेशनल सिक्योरिटीज़ (International Security) ने भी ₹1,670 करोड़ का रिकॉर्ड तिमाही रेवेन्यू हासिल किया, जिसमें 20.8% की सालाना बढ़ोतरी देखी गई। इसका EBITDA मार्जिन 3.8% रहा।

मैनेजमेंट (Management) का कहना है कि उन्हें क्लाइंट्स से ₹290 करोड़ के इस प्रोविज़न को वसूलने का पूरा भरोसा है। कंपनी नए लेबर कोड्स को भारतीय सिक्योरिटी और FM मार्केट में स्ट्रक्चरल टेलविंड (Structural Tailwind) मानती है, जिससे अगले 3-5 सालों में कंसोलिडेशन को बढ़ावा मिलेगा। कंपनी शेयरहोल्डर रिटर्न्स (Shareholder Returns) को डिविडेंड (Dividend) और संभावित बायबैक (Buyback) के ज़रिए संतुलित करने की योजना बना रही है।
लॉन्ग-टर्म ग्रोथ के अनुमानों की बात करें तो, इंडिया सिक्योरिटीज़ के लिए लगभग 11-12% सालाना ग्रोथ, FM के लिए 12.5-15%, और इंटरनेशनल सेगमेंट के लिए 7.5% का अनुमान है। इससे कुल कंसोलिडेटेड ग्रोथ लगभग 12% रहने की उम्मीद है। कंपनी का लक्ष्य प्री-कोविड मार्जिन लेवल (सिक्योरिटी और FM के लिए लगभग 6%, इंटरनेशनल के लिए 4-4.5%) पर वापस लौटना है, जिसमें हाई-मार्जिन वाले भारतीय बिजनेस की तेज ग्रोथ अहम भूमिका निभाएगी। कंपनी को एम्प्लॉयमेंट-लिंक्ड इंसेंटिव (ELI) स्कीम से भी बड़े फायदे की उम्मीद है।

मुख्य जोखिम: सबसे बड़ा शॉर्ट-टर्म रिस्क (Short-term Risk) क्लाइंट्स से ₹290 करोड़ के प्रोविज़न की रिकवरी को लेकर है। AP Securitas के अधिग्रहण (Acquisition) के लिए लिए गए कर्ज के कारण फाइनेंस कॉस्ट (Finance Costs) में बढ़ोतरी और कैपेक्स (Capex) तथा इनटेंजिबल एसेट्स के एमोर्टाइजेशन (Amortization of Intangibles) के कारण डेप्रिसिएशन (Depreciation) में आई बढ़ोतरी जैसे फैक्टर भी प्रॉफिटेबिलिटी पर असर डाल सकते हैं।
आगे की राह: निवेशकों को कंपनी की क्षमता पर नज़र रखनी चाहिए कि वह रेवेन्यू ग्रोथ को सस्टेन्ड मार्जिन एक्सपेंशन (Sustained Margin Expansion) में कैसे बदलती है, खासकर प्री-कोविड लेवल पर वापस लौटने के लक्ष्य को। AP Securitas का सफल इंटीग्रेशन (Integration) और नए लेबर रिफॉर्म्स का फायदा उठाकर इंडस्ट्री कंसोलिडेशन (Industry Consolidation) को भुनाना अगले 1-2 तिमाहियों के लिए कंपनी की अहम स्ट्रेटेजिक ऑब्जेक्टिव्स (Strategic Objectives) बने रहेंगे।

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