चेन्नई की SEPC लिमिटेड UAE की Avenir International में ₹1,530 करोड़ के शेयर स्वैप के जरिए 90% हिस्सेदारी खरीदेगी। इस डील का मकसद 2026 के अंत तक वेस्ट एशिया में SEPC की ऑयल और गैस इंजीनियरिंग उपस्थिति को बढ़ाना है। बोर्ड ने भविष्य के ऑपरेशंस के लिए उधार सीमा बढ़ाने को भी मंजूरी दी है।
SEPC का मास्टरस्ट्रोक: UAE की कंपनी Avenir में ₹1,530 करोड़ का निवेश!
चेन्नई की इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनी SEPC लिमिटेड ने एक बड़ी घोषणा की है। कंपनी अबू धाबी की इंजीनियरिंग फर्म Avenir International Engineers and Consultants LLC में 90% तक हिस्सेदारी खरीदने जा रही है। खास बात यह है कि यह डील कैश में नहीं, बल्कि शेयर स्वैप (Share Swap) के जरिए होगी। SEPC, Avenir के मौजूदा शेयरधारकों को 10 रुपये प्रति शेयर के भाव से 153 करोड़ इक्विटी शेयर जारी करेगी। इस पूरे सौदे को दिसंबर 2026 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।
ऑयल और गैस सेक्टर में विस्तार की तैयारी
इस अधिग्रहण के पीछे SEPC की बड़ी योजना है। कंपनी अपने बिजनेस को ऑयल और गैस सेक्टर की ओर ले जाना चाहती है। Avenir, जो 2011 से काम कर रही है, अबू धाबी नेशनल ऑयल कंपनी (ADNOC) जैसी बड़ी एनर्जी कंपनी के साथ काम करने का अनुभव रखती है। Avenir का 2025 में टर्नओवर करीब AED 75.01 मिलियन था। Avenir की विशेषज्ञता का इस्तेमाल करके, SEPC वेस्ट एशिया में इंफ्रास्ट्रक्चर और एनर्जी प्रोजेक्ट्स में अपनी पकड़ मजबूत करना चाहती है।
कंपनी की वित्तीय रणनीति में बड़े बदलाव
अधिग्रहण के साथ-साथ SEPC के बोर्ड ने कंपनी की वित्तीय लचीलेपन को बढ़ाने का भी फैसला किया है। शेयरधारकों की मंजूरी के अधीन, कंपनी अपने अधिकृत शेयर कैपिटल को 225 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 600 करोड़ रुपये करने का प्रस्ताव दे रही है। इतना ही नहीं, कंपनी ने लोन, गारंटी और निवेश के लिए अपनी सीमा को 3,000 करोड़ रुपये तक बढ़ा दिया है, जबकि उधार लेने की नई सीमा 7,500 करोड़ रुपये तय की गई है। ये कदम बताते हैं कि मैनेजमेंट बड़े पैमाने पर ऑपरेशंस या विस्तार के लिए तैयार है, हालांकि इतनी बड़ी उधार सीमा कंपनी के डेट-टू-इक्विटी रेशियो पर भी नजर रखने की मांग करती है।
आगे क्या?
SEPC, जिसे पहले श्रीराम ईपीसी (Shriram EPC) के नाम से जाना जाता था, ऐतिहासिक रूप से पानी, खनन और औद्योगिक इंफ्रास्ट्रक्चर पर ध्यान केंद्रित करती रही है। निवेशक अब यह जानने के लिए उत्सुक होंगे कि कंपनी विदेशी इकाई Avenir को अपने मौजूदा ढांचे में कैसे एकीकृत करेगी। शेयरधारकों के लिए एक अहम बात यह होगी कि नए विस्तार के तहत प्रोजेक्ट्स का निष्पादन कैसा रहता है और लिए गए कर्ज का प्रबंधन लंबी अवधि में कितना टिकाऊ साबित होता है। बाजार इस बात पर भी नजर रखेगा कि शेयरधारकों की मंजूरी और Avenir के ऑर्डर बुक का SEPC के वित्तीय प्रदर्शन में एकीकरण कैसा होता है।
