कोर्ट का सख्त फैसला: ₹154.63 करोड़ अटैच, PwC करेगी विस्तृत जांच
मद्रास हाई कोर्ट ने 19 फरवरी 2026 को दिए अपने आदेश में SEPC Limited के कुल ₹449.62 करोड़ के ट्रेड रिसीवेबल्स में से ₹154.63 करोड़ को अंतरिम अटैचमेंट में डाल दिया है। यह कदम एक विदेशी आर्बिट्रल अवार्ड को लागू कराने की प्रक्रिया का हिस्सा है, जिसे पहले ही कोर्ट द्वारा एनफोर्सबल (Enforceable) माना जा चुका है।
इसके अलावा, कोर्ट ने एक स्वतंत्र ऑडिटर के तौर पर PwC को नियुक्त किया है। PwC कंपनी की फाइनेंशियल स्टैंडिंग, एसेट्स और लायबिलिटीज़ का गहन परीक्षण करेगी और अपनी रिपोर्ट 23 मार्च 2026 तक कोर्ट में पेश करेगी।
इस फैसले का असर क्या होगा?
रिसीवेबल्स के एक बड़े हिस्से पर कोर्ट द्वारा लगाया गया यह अटैचमेंट SEPC Limited के ऑपरेशनल कैश फ्लो (Operational Cash Flow) को प्रभावित कर सकता है। PwC की नियुक्ति का मुख्य उद्देश्य कोर्ट को कंपनी की वास्तविक फाइनेंशियल हेल्थ (Financial Health) की स्पष्ट तस्वीर देना है, जो अवार्ड होल्डर के हितों की रक्षा के लिए महत्वपूर्ण है।
कोर्ट का यह हस्तक्षेप विदेशी आर्बिट्रल अवार्ड से जुड़े कानूनी विवाद को दर्शाता है, जिसमें न्यायिक प्रक्रिया का पालन और एसेट्स की सुरक्षा सुनिश्चित की जा रही है।
मामला क्या है?
SEPC Limited (पहले श्रीराम ईपीसी लिमिटेड) ईपीसी (Engineering, Procurement, and Construction) सेक्टर की एक जानी-मानी कंपनी है, जो इंफ्रास्ट्रक्चर, इंडस्ट्रियल, माइनिंग और पावर जैसे सेक्टर्स में समाधान प्रदान करती है।
कंपनी एक विदेशी आर्बिट्रल अवार्ड के एनफोर्समेंट से जूझ रही है। इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने SEPC को ब्याज सहित ₹125 करोड़ जमा करने का निर्देश दिया था, और अवार्ड होल्डर्स को ₹39.50 करोड़ निकालने की अनुमति दी गई थी। अब यह ₹154.63 करोड़ का अटैचमेंट उसी बकाया राशि का हिस्सा है।
पहले भी ऑडिटर ने SEPC के कॉन्ट्रैक्ट एसेट्स और ट्रेड रिसीवेबल्स की रिकवरेबिलिटी (Recoverability) पर सवाल उठाए थे, रुके हुए प्रोजेक्ट्स और डेफर्ड टैक्स एसेट्स (Deferred Tax Assets) के उपयोग को लेकर अनिश्चितता का संकेत दिया था।
अब क्या बदलेगा?
- SEPC के ट्रेड रिसीवेबल्स का एक बड़ा हिस्सा अब कोर्ट के अंतरिम अटैचमेंट के तहत है, जिससे कंपनी के तत्काल उपयोग पर रोक लगेगी।
- PwC कंपनी की पूरी फाइनेंशियल पोजीशन, एसेट्स और लायबिलिटीज़ की जांच करेगी।
- कोर्ट SEPC की वास्तविक वित्तीय स्थिति का पता लगाना चाहता है ताकि अवार्ड होल्डर के अधिकारों की रक्षा हो सके।
- कंपनी को ऑडिटर के साथ सहयोग करना होगा और उसके ऑपरेशंस पर न्यायिक निगरानी बढ़ेगी।
आगे क्या देखना महत्वपूर्ण है?
- PwC ऑडिट रिपोर्ट: 23 मार्च 2026 तक आने वाली विस्तृत ऑडिट रिपोर्ट एक बड़ा ट्रिगर होगी।
- कोर्ट के अगले कदम: ऑडिट के नतीजों की समीक्षा के बाद हाई कोर्ट द्वारा लिए जाने वाले निर्णय आगे की दिशा तय करेंगे।
- कंपनी की फाइनेंशियल डिस्क्लोजर: अटैचमेंट के बीच SEPC द्वारा अपनी ऑपरेशनल स्थिति और लिक्विडिटी मैनेजमेंट (Liquidity Management) पर कोई भी अपडेट महत्वपूर्ण होगा।
- अवार्ड होल्डर के एक्शन: ऑडिट और कोर्ट के आदेशों के आधार पर अवार्ड होल्डर द्वारा उठाए जाने वाले कानूनी कदम।