Steel Authority of India (SAIL) के बोकारो प्लांट में काम पूरी तरह से बंद हो गया है। प्रदर्शनकारियों ने प्लांट के सभी **11** गेट ब्लॉक कर दिए हैं, जिससे उत्पादन पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं।
सरकारी स्टील कंपनी SAIL के बोकारो स्टील प्लांट में स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है। शनिवार को विस्थापित नौजवान संघर्ष मोर्चा से जुड़े प्रदर्शनकारियों ने प्लांट के सभी 11 एंट्री और एग्जिट गेट को पूरी तरह से बंद कर दिया है। पिछले 8 दिनों से जारी विरोध प्रदर्शन अब इस स्तर पर पहुंच गया है कि प्लांट के अंदर कर्मचारियों और सामान का आना-जाना पूरी तरह बंद हो चुका है।
भर्ती नीति पर विवाद
इस गतिरोध की मुख्य वजह 1,500 अप्रेंटिस को पक्की नौकरी देने की मांग है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि वे उन परिवारों से आते हैं, जिनकी जमीनें प्लांट के निर्माण के समय ली गई थीं। वहीं, SAIL मैनेजमेंट का कहना है कि उनके रिकॉर्ड के मुताबिक केवल 950 लोग ही नौकरी के योग्य हैं। कंपनी ने स्पष्ट किया है कि अक्टूबर की शुरुआत तक 204 लोगों को कॉन्ट्रैक्ट पर रखा जा चुका है और 50 लोग सेफ्टी ट्रेनिंग ले रहे हैं। प्रदर्शनकारी 10% रिजर्वेशन कोटा को नाकाफी बताते हुए अधिक पारदर्शिता की मांग कर रहे हैं।
राजनीतिक दबाव और ऑपरेशनल रिस्क
यह मामला अब राजनीतिक तूल पकड़ चुका है। कांग्रेस विधायक श्वेता सिंह, बीजेपी सांसद ढुल्लू महतो और JLKM विधायक जयराम महतो जैसे नेताओं का समर्थन प्रदर्शनकारियों को मिलने से मैनेजमेंट के लिए बातचीत की राह कठिन हो गई है। बोकारो के डिप्टी कमिश्नर अजय नाथ झा ने दोनों पक्षों से बातचीत के जरिए समाधान निकालने और त्योहारों के दौरान प्लांट को सुचारू रखने की अपील की है।
निवेशकों के लिए क्या है खास?
निवेशकों के लिए सबसे बड़ा रिस्क प्रोडक्शन लॉस (Production Loss) का है। हालांकि कंपनी ने अभी तक वित्तीय नुकसान का कोई आधिकारिक डेटा जारी नहीं किया है, लेकिन अगर यह गतिरोध लंबा खिंचता है, तो ऑर्डर डिलीवरी और कंपनी के आउटपुट पर बुरा असर पड़ सकता है। मार्केट एक्सपर्ट्स अब इस बात पर नजर रखे हुए हैं कि मैनेजमेंट कब तक ऑपरेशंस फिर से शुरू करवा पाता है और इसका असर कंपनी के आगामी नतीजों पर कितना होगा।
