डिविडेंड की आस और वॉल्यूम में उछाल
यह तूफानी तेजी तब देखने को मिली जब कंपनी के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स की 15 मई, 2026 को होने वाली मीटिंग का इंतजार था। इस मीटिंग में फाइनेंशियल ईयर 2025-26 के लिए फाइनल डिविडेंड पर विचार किया जाना है। इसके अलावा, 16 मई, 2026 को होने वाली एनालिस्ट और इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर मीट ने भी निवेशकों का भरोसा बढ़ाया है। ट्रेडिंग वॉल्यूम में भी जबरदस्त इजाफा हुआ, 147.86 मिलियन से ज्यादा शेयर ट्रेड हुए, जो कि अप्रैल 2024 के बाद सबसे ज्यादा है। यह पिछले 20 दिनों के औसत 29.21 मिलियन शेयरों के मुकाबले काफी अधिक है।
मजबूत स्टील सेक्टर और SAIL की पोजिशन
भारतीय स्टील सेक्टर में मजबूत पकड़ बनी हुई है। इंफ्रास्ट्रक्चर, कंस्ट्रक्शन और मैन्युफैक्चरिंग जैसे सेक्टर्स से घरेलू मांग 8.1% सालाना की दर से बढ़ी है। भारत का स्टील प्रोडक्शन भी बढ़ रहा है और 2030 तक 300 MTPA तक पहुंचने का लक्ष्य है। इस पॉजिटिव माहौल का फायदा SAIL को मिल रहा है, पिछले एक साल में शेयर करीब 72% चढ़ा है। हालांकि, Tata Steel (P/E लगभग 13.98-28.86) और JSW Steel (P/E 39.6-41.53) जैसे प्रतिस्पर्धियों की तुलना में SAIL का P/E रेश्यो (लगभग 27.3 से 32 के बीच) प्रीमियम पर है। SAIL की ऑपरेशनल एफिशिएंसी इसे बढ़ती स्टील कीमतों से ज्यादा फायदा पहुंचाने में मदद कर सकती है।
बढ़ती लागत और वैल्यूएशन की चिंताएं
लेकिन, इन सब अच्छी खबरों के बीच कुछ चिंताएं भी हावी हैं। SAIL का P/E रेश्यो, लगभग 27.3 से 32 से ऊपर, बहुत सस्ता नहीं है। एक एनालिस्ट रिपोर्ट के मुताबिक, ₹130.02 के GF Value के मुकाबले ₹185.63 के भाव पर यह स्टॉक "काफी ओवरवैल्यूड" है। कंपनी का इंटरेस्ट कवरेज रेश्यो 2.8x है और डेट-टू-इक्विटी रेश्यो लगभग 0.51 है, जो कि सुधर रहा है। एक बड़ी चुनौती कोकिंग कोल (coking coal) की बढ़ती कीमतें हैं, जो प्रोडक्शन कॉस्ट का लगभग 40% हिस्सा हैं। बीते क्वार्टर की तुलना में इसकी कीमतें ₹1,500 प्रति टन बढ़ गई हैं। इन बढ़ती लागतों का असर मार्जिन पर पड़ सकता है, भले ही घरेलू स्टील की कीमतें 12% के सेफगार्ड ड्यूटी के चलते बढ़ी हैं। पिछले Q4 FY25 में SAIL का रेवेन्यू ₹1,02,478 करोड़ और PAT ₹2,148 करोड़ रहा था, जिसमें ₹1.60 का डिविडेंड दिया गया था। Q4 FY26 के लिए अनुमानित रेवेन्यू ₹30,000–33,000 करोड़ और PAT ₹600–1,000 करोड़ के बीच रहने की उम्मीद है।
भविष्य का आउटलुक
भविष्य की बात करें तो, भारतीय स्टील इंडस्ट्री में 7.12% के CAGR से ग्रोथ का अनुमान है। SAIL का लक्ष्य 2030 तक अपनी क्षमता को 35.65 MTPA तक बढ़ाना है। भले ही अप्रैल 2026 के एनालिस्ट टारगेट ₹128-₹135 को पार कर लिया गया है, ICICI Securities ने ₹200 के टारगेट प्राइस के साथ 'Buy' रेटिंग बरकरार रखी है। SAIL के लिए यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि वह बढ़ती इनपुट कॉस्ट को कैसे मैनेज करता है और घरेलू मांग की ताकत का कितना फायदा उठा पाता है।
