नतीजों पर भारी पड़ी बाजार की गिरावट
स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड (SAIL) के शेयर शुक्रवार, 30 जनवरी 2026 को BSE पर 3.94% की बड़ी गिरावट के साथ ₹151.05 पर बंद हुए। यह गिरावट तब आई जब कंपनी ने बाजार को चौंकाते हुए शानदार तिमाही नतीजे पेश किए। कंपनी का नेट प्रॉफिट 2.6 गुना बढ़कर ₹374 करोड़ पर पहुंच गया, जो विश्लेषकों की उम्मीदों (₹370 करोड़) से भी थोड़ा बेहतर था। हालांकि, यह प्रदर्शन उस दिन शेयर बाजार में निवेशकों का भरोसा कायम रखने में नाकाम रहा।
ऑपरेशनल एफिशिएंसी और वॉल्यूम ग्रोथ बने मुख्य कारण
कंपनी की प्रॉफिटेबिलिटी (Profitability) में हुई बढ़ोतरी की मुख्य वजह रेवेन्यू में 12% की साल-दर-साल वृद्धि रही, जो ₹27,371 करोड़ तक पहुंचा। इंटरेस्ट, टैक्स, डेप्रिसिएशन और एमोर्टाइजेशन से पहले की कमाई (EBITDA) भी 13% बढ़कर ₹2,294 करोड़ रही। EBITDA मार्जिन में मामूली सुधार हुआ और यह पिछले साल के 8.3% की तुलना में बढ़कर 8.4% हो गया। दिसंबर 2025 को समाप्त नौ महीनों (9MFY26) में, कच्चे स्टील का प्रोडक्शन 2% बढ़कर 14.35 मिलियन टन रहा, वहीं सेल्स वॉल्यूम में 16.3% का शानदार इजाफा हुआ। इस ऑपरेशनल मजबूती के साथ, कंपनी ने एक और महत्वपूर्ण वित्तीय उपलब्धि हासिल की: इसी नौ महीने की अवधि में लगभग ₹5,000 करोड़ का डेट (Debt) कम किया गया।
वित्तीय अनुशासन और मैनेजमेंट की राय
SAIL के चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर, अमरेंदु प्रकाश (Amarendu Prakash), ने नौ महीने की अवधि में प्रॉफिटेबिलिटी में आए सुधार पर खुशी जताई। उन्होंने बताया कि इस दौरान प्रॉफिट आफ्टर टैक्स (PAT) में साल-दर-साल 60% की वृद्धि दर्ज की गई। प्रकाश ने इसका श्रेय हायर वॉल्यूम, ऑपरेशनल लिवरेज और समझदारी भरे वित्तीय प्रबंधन को दिया। घरेलू मांग में आई मजबूती और मार्केट में बढ़ी पैठ ने भी इसमें अहम भूमिका निभाई। CMD ने कहा कि इनपुट कॉस्ट में उतार-चढ़ाव और प्रतिस्पर्धी मूल्य निर्धारण माहौल के बावजूद, कंपनी ने अपने प्रोडक्ट मिक्स को ऑप्टिमाइज़ करके और लागत अनुशासन बनाए रखकर ऑपरेटिंग प्रॉफिटेबिलिटी (Operating Profitability) को बनाए रखा है।
सेक्टर का माहौल और प्रतिस्पर्धियों की स्थिति
SAIL के नतीजे ऐसे समय में आए हैं जब भारत में FY26 के लिए स्टील की मांग में 8% की वृद्धि का अनुमान है, जिसका मुख्य सहारा इंफ्रास्ट्रक्चर और कंस्ट्रक्शन सेक्टर हैं। भारतीय स्टील सेक्टर ने एक सकारात्मक बदलाव देखा है, जहां इंपोर्ट (Imports) कम हो रहे हैं और एक्सपोर्ट (Exports) बढ़ रहे हैं, जिससे भारत 2025 के अंत तक एक नेट एक्सपोर्टर (Net Exporter) बनने की ओर बढ़ रहा है। घरेलू हॉट-रोल्ड कॉइल (HRC) की कीमतों में भी मजबूती देखी गई है, जो जनवरी 2026 की शुरुआत में लगभग ₹49,000–51,600 प्रति टन तक पहुंच गईं। इसी तिमाही (Q3 FY26) में, JSW Steel ने ₹45,991 करोड़ का रेवेन्यू और 235.2% की जोरदार उछाल के साथ ₹2,410 करोड़ का नेट प्रॉफिट दर्ज किया। वहीं, Tata Steel India ने रिकॉर्ड प्रोडक्शन और डिलीवरी वॉल्यूम हासिल की, लेकिन उसके कंसोलिडेटेड नेट प्रॉफिट में 36% की गिरावट आई और यह ₹327 करोड़ रहा।
वैल्यूएशन, ऑडिटर की टिप्पणी और आगे की राह
हालांकि शेयर में गिरावट के पीछे के सटीक कारणों का तुरंत पता नहीं चला, लेकिन ऐतिहासिक तौर पर SAIL के शेयर अक्सर नतीजों के तुरंत बाद नीचे जाते देखे गए हैं। 29 जनवरी 2026 तक कंपनी का P/E रेश्यो (TTM) 25.40 था, जबकि मार्केट कैप ₹64,953 करोड़ था। यह ध्यान देने योग्य है कि कंपनी के ऑडिटर (Auditors) ने अपनी समीक्षा रिपोर्ट में कुछ अकाउंटिंग ट्रीटमेंट्स पर योग्यताएं (Qualifications) जताई थीं। इसका मतलब है कि यदि इन मामलों को अलग तरह से अकाउंट किया गया होता, तो प्रॉफिट और इक्विटी (Equity) कम हो सकती थी। SAIL ने 2 फरवरी 2026 को एक एनालिस्ट और इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर मीट (Analyst and Institutional Investor Meet) का आयोजन किया है, जिसमें Q3 FY26 के नतीजों पर विस्तार से चर्चा की जाएगी।