मुनाफे में रिकॉर्ड उछाल, पर क्यों गिरे शेयर?
स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड (SAIL) ने फाइनेंशियल ईयर 2026 के चौथे क्वार्टर के नतीजे जारी किए हैं, जिसमें कंपनी का नेट प्रॉफिट 46.7% बढ़कर ₹1,836 करोड़ पहुंच गया। यह शानदार प्रदर्शन कंपनी के रिकॉर्ड प्रोडक्शन और बिक्री की वजह से संभव हुआ। पूरे फाइनेंशियल ईयर 2026 में क्रूड स्टील प्रोडक्शन 19.43 मिलियन टन और सेल्स वॉल्यूम में 11.4% की बढ़ोतरी हुई।
###valuation की मार और ब्रोकरेज का डाउनग्रेड
इतने मजबूत ऑपरेशनल मैट्रिक्स और रिकॉर्ड वॉल्यूम के बावजूद, 15 मई 2026 को SAIL का शेयर 3.37% गिर गया। इस गिरावट की मुख्य वजह Nuvama ब्रोकरेज फर्म का स्टॉक को डाउनग्रेड करना रहा, जिसने महंगेvaluation का हवाला देते हुए टारगेट प्राइस में 25% की कटौती की।
SAIL का मौजूदा P/E रेश्यो 29.54x से 33.99x के बीच है, जो इसके 10 साल के औसत 15.84x और स्टील इंडस्ट्री के औसत 16.82x से काफी ज्यादा है। यहvaluation Tata Steel (~31.13x P/E) के करीब है और JSW Steel (40-50x P/E) के करीब पहुंच रहा है। इससे साफ है कि निवेशक कंपनी के शानदार प्रदर्शन के साथ-साथ उसकेvaluation को लेकर भी सतर्क हो गए हैं, खासकर एक साइक्लिकल इंडस्ट्री के लिए।
मजबूत ऑपरेशनल परफॉर्मेंस
चौथी तिमाही में, कंपनी का कंसोलिडेटेड रेवेन्यू 5.1% बढ़कर ₹30,813 करोड़ रहा। EBITDA में 30.3% का उछाल आया और यह ₹4,409 करोड़ पर पहुंच गया, वहीं मार्जिन 11.5% से सुधरकर 14.3% हो गया। पूरे फाइनेंशियल ईयर 2026 में प्रॉफिट आफ्टर टैक्स 50.5% बढ़कर ₹3,233 करोड़ हुआ। कंपनी ने अपना कर्ज भी ₹8,148 करोड़ कम किया है, जो एक सकारात्मक संकेत है। इसके अलावा, कंपनी ने ₹2.35 प्रति शेयर के फाइनल डिविडेंड की भी सिफारिश की है।
मैनेजमेंट का भविष्य का प्लान
मई 2026 में नए CMD डॉ. AK Panda के चार्ज संभालने के बाद, SAIL अपनी ग्रोथ के अगले चरण की तैयारी कर रहा है, जिसमें क्षमता को 35 MTPA तक बढ़ाने का लक्ष्य है। डॉ. पांडा, जो 1992 से SAIL के फाइनेंस और ऑपरेशंस से जुड़े हैं, कंपनी की स्ट्रैटजी में वैल्यू-एडेड और स्पेशल स्टील प्रोडक्ट्स को बढ़ाने, मार्केट रीच को मजबूत करने और शेयरधारकों के लिए वैल्यू बनाने पर जोर दे रहे हैं।
बाजार की चिंताएं
निवेशकों की मुख्य चिंता SAIL के ऊंचेvaluation मल्टीपल्स हैं। यह शेयर की कीमतों में किसी भी बड़ी गिरावट के जोखिम को बढ़ा सकता है, खासकर अगर भविष्य में मांग में कमी आती है या प्रोडक्शन कॉस्ट बढ़ती है। रेवेन्यू अनुमानों से थोड़ा पीछे रहने की बात भी दबाव का एक कारण हो सकती है।