यह बड़ा कदम ऐसे समय में उठाया जा रहा है जब घरेलू बाजार में स्टील की मांग मजबूत बनी हुई है और कीमतें भी अच्छी चल रही हैं। SAIL का लक्ष्य अपनी मौजूदा क्षमता से अधिक प्रोडक्शन करना है। कंपनी 2027 तक 22.5 मिलियन टन क्रूड स्टील का उत्पादन करने की योजना बना रही है, जो कि उसकी वर्तमान 21 मिलियन टन की स्थापित क्षमता से कहीं ज्यादा है। इसके लिए ऑपरेशनल सुधारों पर जोर दिया जाएगा और मौजूदा प्लांट्स को उनकी रेटेड लिमिट से आगे चलाकर प्रोडक्शन बढ़ाया जाएगा।
कैपिटल इन्वेस्टमेंट में बड़ी उछाल
SAIL का वित्तीय प्लान कैपिटल एक्सपेंडिचर (CAPEX) में भारी इजाफे को दर्शाता है। फाइनेंशियल ईयर 2026 में जहां यह करीब ₹9,100 करोड़ था, वहीं फाइनेंशियल ईयर 2027 के लिए इसे बढ़ाकर ₹15,000 करोड़ करने का लक्ष्य है। इस फंड का इस्तेमाल IISCO, बोकारो और भिलाई जैसे प्रमुख प्लांट्स के विस्तार और आधुनिकीकरण में किया जाएगा। भविष्य में, जैसे-जैसे विस्तार प्रोजेक्ट आगे बढ़ेंगे, सालाना CAPEX ₹20,000 करोड़ से ₹25,000 करोड़ तक पहुंच सकता है। यह निवेश कंपनी की 2032 तक 35 मिलियन टन प्रति वर्ष क्षमता बढ़ाने की लंबी अवधि की योजना का हिस्सा है।
सेक्टर वैल्यूएशन और रिस्क
बाजार में SAIL के शेयर की वैल्यूएशन (Valuation) काफी प्रीमियम पर चल रही है। कंपनी का प्राइस-टू-अर्निंग (P/E) रेश्यो 29.5x से 34.3x के बीच है, जो कि इंडस्ट्री के औसत 16.8x से 28.5x से काफी ऊपर है। Tata Steel और JSW Steel जैसे बड़े खिलाड़ी भी ऊंचे वैल्यूएशन पर ट्रेड कर रहे हैं। यह दिखाता है कि निवेशक भविष्य में कंपनी से मजबूत ग्रोथ की उम्मीद कर रहे हैं।
लेबर यूनियन का विरोध और अन्य जोखिम
SAIL के वर्कफोर्स में कटौती की योजना, खासकर कॉन्ट्रैक्ट वर्कर्स में 40% की कटौती के फैसले का लेबर यूनियनों ने कड़ा विरोध किया है। यूनियनों ने चिंता जताई है कि कम कर्मचारियों के कारण काम का बोझ बढ़ेगा, जिससे सुरक्षा जोखिम और थकान की समस्याएं पैदा हो सकती हैं। इस विरोध से प्रोडक्शन और विस्तार योजनाओं में देरी हो सकती है। साथ ही, यह हाई कैपिटल एक्सपेंडिचर, जिसका एक हिस्सा कर्ज से आ रहा है, एग्जीक्यूशन (Execution) रिस्क और कर्ज बढ़ने का खतरा पैदा करता है।