SAIL की बड़ी छंटनी योजना
स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड (SAIL) ने लागत कम करने और एफिशिएंसी (efficiency) बढ़ाने के लिए एक आक्रामक कदम उठाया है। कंपनी ने 31 मार्च 2027 तक अपने कॉन्ट्रैक्ट कर्मचारियों की संख्या में 40% की कटौती का लक्ष्य रखा है। यह इस दिशा में एक और बड़ा कदम है, क्योंकि कंपनी पहले ही लगभग 18.8% कॉन्ट्रैक्ट स्टाफ को कम कर चुकी है, जो पिछले टारगेट के करीब है। मिनिस्ट्री ऑफ स्टील (Ministry of Steel) से मिले निर्देशों के तहत यह लागत कटौती का अभियान चलाया जा रहा है।
कटाई का गणित और टारगेट
SAIL की योजना के मुताबिक, अप्रैल 1, 2025 से 20% अतिरिक्त कटौती की जाएगी, ताकि 2027 तक कुल 40% की कटौती पूरी हो सके। खास तौर पर, बोकारो स्टील प्लांट (Bokaro Steel Plant - BSL) में कॉन्ट्रैक्ट स्टाफ को 10,230 से घटाकर 7,678 करने का लक्ष्य है, जिससे 2,552 नौकरियां प्रभावित होंगी। वहीं, SAIL रिफ्रैक्टरी यूनिट (SAIL Refractory Unit - SRU) में 1,956 से 1,173 तक कर्मचारी कम किए जाएंगे, जिसका मतलब है 783 नौकरियों पर असर। यह सब SAIL के मुनाफे (profit) को बढ़ाने और प्रतिस्पर्धी बाजार में बने रहने की रणनीति का हिस्सा है। फिलहाल, SAIL की मार्केट कैपिटलाइजेशन (market capitalization) लगभग $15 बिलियन है और इसका प्राइस-टू-अर्निंग्स रेश्यो (P/E ratio) करीब 15x है।
इंडस्ट्री प्रेशर और प्रतिस्पर्धा
भारतीय स्टील सेक्टर इस वक्त मुश्किल दौर से गुजर रहा है। कच्चे माल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और ग्लोबल प्रतिस्पर्धा के चलते टाटा स्टील (Tata Steel) और जेएसडब्ल्यू स्टील (JSW Steel) जैसी कंपनियां भी लागत घटाने और ऑटोमेशन (automation) पर जोर दे रही हैं। ऐसे में, SAIL पर भी अपनी ऑपरेशनल एफिशिएंसी बढ़ाने का दबाव है।
यूनियनों का विरोध: सुरक्षा पर खतरा
हालांकि, SAIL की इस 40% कॉन्ट्रैक्ट कर्मचारी कटौती की योजना पर लेबर यूनियन्स ने गंभीर चिंता जताई है। भारतीय मजदूर संघ (Bharatiya Mazdoor Sangh) और भारतीय इस्पात मजदूर महासंघ (Bharatiya Ispat Mazdoor Mahasangh) जैसी यूनियन्स का कहना है कि इतनी बड़ी कटौती से बचे हुए कर्मचारियों पर काम का बोझ बढ़ेगा। इससे थकान और गलतियों की वजह से दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ सकता है, जो प्लांट की इंडस्ट्रियल सेफ्टी (industrial safety) के लिए बेहद खतरनाक है। यूनियन्स ने यह भी चेतावनी दी है कि इससे हजारों वर्कर्स की रोजी-रोटी छिन जाएगी, जिसका बुरा असर स्थानीय अर्थव्यवस्था पर भी पड़ेगा।
विकल्प क्या हैं?
यूनियन्स ने SAIL मैनेजमेंट से यह कटौती रोकने और सभी पक्षों के साथ बैठकर बातचीत करने की मांग की है। वे वैकल्पिक तरीकों से लागत बचाने का सुझाव दे रहे हैं, जैसे एडमिनिस्ट्रेटिव खर्चों में कटौती, एनर्जी का बेहतर इस्तेमाल और रीसाइक्लिंग से रेवेन्यू बढ़ाना। उनका मानना है कि बिना कर्मचारियों को प्रभावित किए भी लागत कम की जा सकती है। मिनिस्ट्री ऑफ स्टील के निर्देशों को देखते हुए, SAIL को यह तय करना होगा कि वह तत्काल वित्तीय लक्ष्यों को प्राप्त करने के साथ-साथ अपने प्लांट्स में सुरक्षित और स्थिर संचालन कैसे सुनिश्चित करे।
