SAIL Share Price: बंपर उछाल की तैयारी? ब्रोकरेज ने बढ़ाया Target Price, ₹200 के पार जाने की उम्मीद

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AuthorMehul Desai|Published at:
SAIL Share Price: बंपर उछाल की तैयारी? ब्रोकरेज ने बढ़ाया Target Price, ₹200 के पार जाने की उम्मीद
Overview

Steel Authority of India (SAIL) के निवेशकों के लिए राहत भरी खबर है। कंपनी में अर्निंग्स रिकवरी की उम्मीद जगी है, जिसके चलते एनालिस्ट्स ने इसके शेयर के लिए अपने प्राइस टारगेट बढ़ा दिए हैं। यह तेजी इन्वेंटरी घटने और मजबूत रीबार कीमतों से आने वाले EBITDA per tonne में बढ़ोतरी की वजह से देखने को मिल सकती है।

नतीजों में सुधार और कर्ज में कमी की ओर SAIL

देश की प्रमुख स्टील कंपनी Steel Authority of India (SAIL) के लिए अच्छे दिन आने वाले हैं। कई ब्रोकरेज फर्म्स कंपनी की अर्निंग्स रिकवरी की उम्मीद कर रही हैं और इसके शेयर के लिए अपने प्राइस टारगेट बढ़ा रही हैं। एक प्रमुख एनालिसिस फर्म ने तो टारगेट को ₹175 से बढ़ाकर ₹200 कर दिया है।

यह तेजी मुख्य रूप से EBITDA प्रति टन में बड़े उछाल की उम्मीद पर टिकी है। एनालिस्ट्स का अनुमान है कि अगले दो तिमाहियों में EBITDA प्रति टन बढ़कर ₹7,000–₹7,500 तक पहुंच सकता है, जो Q3 में केवल ₹4,500 था। इस सुधार के पीछे तीन मुख्य वजहें बताई जा रही हैं:

  • लगभग 1.5 मिलियन टन इन्वेंटरी अनवाइंड (स्टॉक का बाहर निकलना) से Q4 वॉल्यूम बढ़कर 5.4 मिलियन टन होने की उम्मीद है।

  • इंफ्रास्ट्रक्चर और कंस्ट्रक्शन प्रोजेक्ट्स में तेजी के कारण रीबार की कीमतों में खास रिकवरी।

  • कर्ज घटाने (Deleveraging) की दिशा में कंपनी का मजबूत कदम।
बढ़ी हुई कीमतों और स्टॉक लिक्विडेशन से FY26 तक नेट डेट में साल-दर-साल 28% की कमी आकर यह ₹20,800 करोड़ पर आ सकता है।

हाल ही में आए Q3 FY25-26 के नतीजों में, SAIL ने साल-दर-साल 163.6% की जोरदार बढ़ोतरी के साथ ₹374 करोड़ का नेट प्रॉफिट दर्ज किया। इसी दौरान रेवेन्यू 12% बढ़कर ₹27,371 करोड़ रहा, जबकि EBITDA 13% बढ़कर ₹2,294 करोड़ दर्ज किया गया।

SAIL का शेयर फिलहाल ₹155-₹160 के आसपास कारोबार कर रहा है, जिसने पिछले एक साल में 44.79% की तेजी दिखाई है। इसका 52-हफ्ते का हाई ₹163.00 और लो ₹101.13 रहा है।

वैल्यूएशन और सेक्टर की चाल

SAIL के वैल्यूएशन मेट्रिक्स पर नजर डालें तो तस्वीर मिली-जुली है। यह अपने सेक्टर के औसत 2.8x और लॉन्ग-टर्म औसत 0.7x प्राइस-टू-बुक (P/B) मल्टीपल से काफी नीचे 1.1x पर ट्रेड कर रहा है। हालांकि, इसका प्राइस-टू-अर्निंग्स (P/E) रेशियो ट्रेलिंग ट्वेल्व मंथ्स (TTM) के आधार पर 23.5x से 32.8x के बीच है, जो इसके पांच साल के हाई के करीब है। इससे लगता है कि बाजार भविष्य की अर्निंग्स ग्रोथ को पहले ही इसमें शामिल कर चुका है।

मार्केट कैप के मामले में, SAIL (लगभग ₹65,000 करोड़) अपने बड़े पेयर्स JSW Steel (लगभग ₹303,000 करोड़) और Tata Steel (लगभग ₹260,000 करोड़) से काफी छोटा है।

भारतीय स्टील सेक्टर में FY2026 में इंफ्रास्ट्रक्चर और कंस्ट्रक्शन की बदौलत 7-10% की डिमांड ग्रोथ की उम्मीद है। लेकिन, बढ़ती स्टील इंपोर्ट (पिछले दो साल से भारत नेट इंपोर्टर है) घरेलू कीमतों और मार्जिन पर दबाव डाल सकती है, जब तक कि ट्रेड प्रोटेक्शन मेजर्स लागू न हों। इसके अलावा, बड़े प्लेयर्स द्वारा आक्रामक क्षमता विस्तार से ओवरसप्लाई की स्थिति बन सकती है। कोकिंग कोल की कीमतों में हालिया उतार-चढ़ाव भी एक चिंता का विषय है।

क्या हैं जोखिम? (The Bear Case)

इस उम्मीद से भरी तस्वीर के बावजूद, SAIL के लिए कुछ अहम जोखिम भी मौजूद हैं। EBITDA प्रति टन को ₹7,500-₹8,000 तक ले जाने का अनुमान स्टील-कोकिंग कोल स्प्रेड $350/t पर निर्भर करता है, जो इनपुट कॉस्ट में उतार-चढ़ाव से प्रभावित हो सकता है।

भारत में बढ़ते स्टील इंपोर्ट एक बड़ा खतरा हैं, जो घरेलू कीमतों की ताकत को कमज़ोर कर सकते हैं, खासकर यदि एंटी-डंपिंग मेजर्स प्रभावी न हों। घरेलू क्षमता विस्तार और इंपोर्ट के बढ़ते दबाव से ओवरसप्लाई का खतरा भी बना हुआ है।

हालांकि SAIL का P/B रेशियो आकर्षक लग रहा है, लेकिन इसका TTM P/E रेशियो बहुत कम नहीं है और अपने ऐतिहासिक उच्च स्तरों के करीब है। अगर अर्निंग्स ग्रोथ उम्मीद के मुताबिक नहीं रही, तो शेयर महंगा साबित हो सकता है। कई एनालिस्ट्स की राय मिले-जुले (न्यूट्रल) संकेत दे रही है, और उनके औसत प्राइस टारगेट हालिया बुलिश टारगेट से कम हैं, जो विशेषज्ञों की राय में अंतर को दर्शाता है।

आगे का रास्ता

भविष्य में, SAIL के लिए मार्जिन स्थिरता बनाए रखना महत्वपूर्ण होगा। यह इन्वेंटरी मैनेजमेंट, बेहतर प्रोडक्ट मिक्स और कोल ब्लेंडिंग एफिशिएंसी के साथ-साथ घरेलू कीमतों के सपोर्ट पर निर्भर करेगा। भले ही एक एनालिस्ट ने आकर्षक वैल्यूएशन और निकट अवधि के कैटेलिस्ट्स के चलते टारगेट ₹200 तक बढ़ाया हो, लेकिन पूरा सेक्टर इंपोर्ट प्रेशर और इनपुट कॉस्ट वोलैटिलिटी जैसी चुनौतियों का सामना कर रहा है। कंपनी की सफलता इन जटिल बाजार शक्तियों से निपटने और अपने अनुमानित ऑपरेशनल और फाइनेंशियल सुधारों को पूरा करने पर टिकी रहेगी।

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