भारत सरकार अटके हुए बुनियादी ढांचा (infrastructure) प्रोजेक्ट्स को पुनर्जीवित करने के लिए ₹25,000 करोड़ के एक बड़े जोखिम गारंटी फंड (risk guarantee fund) की स्थापना पर विचार कर रही है। यह पहल संभवतः वित्तीय वर्ष 2027 के केंद्रीय बजट में घोषित की जा सकती है। इस फंड का मुख्य उद्देश्य उन वित्तीय बाधाओं को दूर करना है जिन्होंने देश भर में कई महत्वपूर्ण इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं के पूरा होने में बाधा डाली है। अनुमान है कि भारत को 2030 तक 7 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने के लिए लगभग $2.2 ट्रिलियन के इंफ्रास्ट्रक्चर खर्च की आवश्यकता होगी। यह प्रस्तावित फंड वित्तीय संस्थानों के लिए जोखिम को कम करके इन चुनौतियों से सीधे निपटना चाहता है। यह छोटे व्यवसायों के लिए मौजूदा क्रेडिट गारंटी योजनाओं के समान काम करेगा। नेशनल बैंक फॉर फाइनेंसिंग इंफ्रास्ट्रक्चर एंड डेवलपमेंट (NaBFID) समिति ने इसके लिए सिफारिशें की हैं, और नेशनल क्रेडिट गारंटी ट्रस्टी कंपनी (NCGTC) गारंटी प्रदान करेगी। इससे बैंकों और अन्य वित्तीय संस्थानों को अधिक लचीली शर्तों पर ऋण देने में मदद मिलेगी, जिससे इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स में अधिक क्रेडिट प्रवाहित होगा। विशेषज्ञ मानते हैं कि यह फंड क्रेडिट एन्हांसमेंट टूल के रूप में प्रभावी हो सकता है, बशर्ते इसे ठीक से संरचित किया जाए।
अटके इन्फ्रा प्रोजेक्ट्स को रिवाइव करने के लिए ₹25,000 करोड़ का फंड? बजट 2027 में मिल सकती है कुंजी!
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Overview
भारतीय सरकार अटके हुए बुनियादी ढांचा (infrastructure) प्रोजेक्ट्स की मदद के लिए ₹25,000 करोड़ का जोखिम गारंटी फंड (risk guarantee fund) बनाने पर विचार कर रही है। यह फंड, जो संभवतः वित्तीय वर्ष 2027 के केंद्रीय बजट में घोषित हो सकता है, ऋणदाताओं (lenders) के लिए वित्तीय जोखिमों को कम करने और रुके हुए विकास कार्यों के लिए अधिक ऋण को प्रोत्साहित करने का लक्ष्य रखता है। मौजूदा छोटे व्यवसाय योजनाओं के आधार पर, यह नेशनल क्रेडिट गारंटी ट्रस्टी कंपनी (NCGTC) से गारंटी और NaBFID की सिफारिशों के साथ प्रबंधित होने की उम्मीद है, जिससे आर्थिक विकास के लिए आवश्यक महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचा खर्च को बढ़ावा मिलेगा।
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