Rolls-Royce का दम! INS महेंद्रगिरि फ्रिगेट में लगे mtu जनरेटर, भारत की नौसेना शक्ति में इजाफा

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AuthorAditya Rao|Published at:
Rolls-Royce का दम! INS महेंद्रगिरि फ्रिगेट में लगे mtu जनरेटर, भारत की नौसेना शक्ति में इजाफा

Rolls-Royce ने भारतीय नौसेना के नए INS महेंद्रगिरि युद्धपोत के लिए चार 1 MW के mtu जनरेटर सेट की सप्लाई की है। यह सप्लाई नौसेना के स्वदेशी जहाज़ निर्माण कार्यक्रम में कंपनी की महत्वपूर्ण भूमिका को दर्शाता है।

INS महेंद्रगिरि में Rolls-Royce की ताकत

भारतीय नौसेना ने अपने छठे स्वदेशी INS महेंद्रगिरि स्टील्थ फ्रिगेट को कमीशन किया है, जो अब Rolls-Royce की एडवांस्ड पावर जनरेशन टेक्नोलॉजी से लैस है। इस युद्धपोत में चार mtu 12V 396 TE54 जनरेटर सेट लगाए गए हैं, जिनमें से हर एक 1 MW पावर जेनरेट करता है। यह पावर फ्रिगेट के कॉम्बैट, कम्युनिकेशन और ऑपरेशनल सिस्टम्स को सपोर्ट करती है। बता दें कि INS अग्रे (Agray) और INS दूनगिरि (Dunagiri) जैसे जहाज़ों में भी Rolls-Royce के mtu इंजन सॉल्यूशन का इस्तेमाल किया गया है।

स्वदेशी जहाज़ निर्माण में अहम भूमिका

नीलगिरि-क्लास के ये फ्रिगेट भारत की समुद्री रक्षा रणनीति का एक अहम हिस्सा हैं, जिनका 75% से ज़्यादा हिस्सा देश में ही तैयार किया गया है। इन जहाज़ों का निर्माण Mazagon Dock Shipbuilders Ltd (MDL) और Garden Reach Shipbuilders & Engineers Ltd (GRSE) जैसी बड़ी भारतीय डिफेंस शिपबिल्डर्स की मदद से हो रहा है। स्थानीय सपोर्ट और टेक्नोलॉजी इंटीग्रेशन प्रदान करके Rolls-Royce, सरकार के 'मेक इन इंडिया' डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग पर फोकस के साथ अपने ऑपरेशन्स को जोड़ रहा है।

लंबी अवधि की रणनीतिक उपस्थिति

Rolls-Royce की भारतीय बाज़ार में 90 सालों से मजबूत उपस्थिति है। नौसेना के जहाज़ों के अलावा, कंपनी भारतीय वायु सेना, थल सेना और तटरक्षक बल के लिए भी इंजन सप्लाई करती है। फिलहाल, कंपनी के पास 1,400 से ज़्यादा इंजन सर्विस में हैं। भारत में Rolls-Royce के लगभग 4,000 कर्मचारी काम करते हैं, जिनमें से बड़ी संख्या में इंजीनियर ग्लोबल रिसर्च और डेवलपमेंट (R&D) पर फोकस करते हैं।

निवेशकों के लिए अहम जानकारी

निवेशकों के लिए यह खबर कंपनी के भारत के नौसैनिक आधुनिकीकरण कार्यक्रम में लगातार जुड़ाव को दिखाती है। भले ही हर जनरेटर सेट से होने वाला रेवेन्यू वैश्विक स्तर पर मामूली लगे, लेकिन ऐसे लगातार मिलने वाले ऑर्डर डिफेंस सेक्टर में कंपनी की स्थिति को मजबूत करते हैं। इस सेगमेंट में सबसे अहम बात भारतीय नौसेना की तरफ से स्वदेशी हार्डवेयर की लगातार मांग और लोकल कंटेंट की ज़रूरतों को पूरा करने की वैश्विक टेक्नोलॉजी फर्मों की क्षमता पर निर्भर करती है।

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