Q4 में घाटे की मुख्य वजहें:
कंपनी ने चौथी तिमाही (FY26) में ₹1.49 मिलियन का शुद्ध घाटा (Net Loss) दर्ज किया है। यह पिछले साल की इसी तिमाही में ₹546.39 मिलियन (लगभग ₹54.6 करोड़) के मुनाफे से एक बड़ा उलटफेर है। वहीं, कंपनी का रेवेन्यू साल-दर-साल 5.58% बढ़कर ₹3,085.64 मिलियन (लगभग ₹308.5 करोड़) हो गया।
यह घाटा मुख्य रूप से दो बड़े कारणों से हुआ:
- ₹60 मिलियन (लगभग ₹6 करोड़) की एक बार की लीगल कॉस्ट, जो ROR सेटलमेंट से जुड़ी थी।
- ₹220 मिलियन (लगभग ₹22 करोड़) की बढ़ी हुई US कस्टम ड्यूटी।
इन सब का असर कंपनी के EBITDA मार्जिन पर भी पड़ा, जो इस तिमाही में 18.4% रहा।
ग्लोबल ऑटोमोटिव सेक्टर पर दबाव:
दुनियाभर में ऑटोमोटिव कंपोनेंट इंडस्ट्री मुश्किलों का सामना कर रही है। अमेरिका में, हाइब्रिड वाहनों की ओर बढ़ते रुझान और एनर्जी की कीमतों में अस्थिरता के कारण 2026 में बिक्री में मामूली गिरावट की उम्मीद है। साथ ही, टैरिफ (US कस्टम ड्यूटी) भी एक अहम फैक्टर बने हुए हैं।
यूरोप का ऑटोमोटिव मार्केट भी कमजोर बना हुआ है, जहाँ महंगाई और भू-राजनीतिक मुद्दे हावी हैं। इस बीच, चीनी ब्रांड अपनी उपस्थिति बढ़ा रहे हैं।
Rolex Rings ने भी FY26 की पहली तिमाही में एक्सपोर्ट रेवेन्यू में बड़ी गिरावट देखी है। इसका कारण टैरिफ को लेकर अनिश्चितता और मांग में कमी है।
पूरे साल के नतीजे और आगे की राह:
पूरे फाइनेंशियल ईयर 2026 के लिए, Rolex Rings का रेवेन्यू ₹11.94 बिलियन (लगभग ₹1194 करोड़) रहा, जो FY25 के ₹11.83 बिलियन (लगभग ₹1183 करोड़) से मामूली बढ़त है। हालाँकि, नेट इनकम गिरकर ₹1.41 बिलियन (लगभग ₹141 करोड़) हो गई, जो पिछले साल ₹1.74 बिलियन (लगभग ₹174 करोड़) थी। प्रति शेयर आय (EPS) भी ₹6.39 से घटकर ₹5.18 रह गई।
एनालिस्ट्स की राय और वैल्यूएशन:
IDBI Capital ने कंपनी के मैनेजमेंट के आत्मविश्वास को देखते हुए BUY रेटिंग और ₹175 का टारगेट प्राइस बरकरार रखा है। यह मौजूदा शेयर प्राइस से लगभग 22% का संभावित अपसाइड दिखाता है।
हालाँकि, एनालिस्ट्स की राय बंटी हुई है। कुछ रिपोर्ट्स बताती हैं कि बड़े एनालिस्ट्स के समूह में "Sell" की रेटिंग की ओर झुकाव है, जो "Strong Buy" रिकमेन्डेशन्स के विपरीत है।
Rolex Rings का ट्रेलिंग बारह महीने का P/E (प्राइस-टू-अर्निंग्स) रेशियो लगभग 20.6 है, जो इसके डोमेस्टिक कंपटीटर्स जैसे Schaeffler India (P/E लगभग 51-52) और Timken India (P/E लगभग 60-62) से काफी कम है। यह वैल्यूएशन गैप बाजार की चिंताओं को दर्शाता है कि कंपनी लगातार रेवेन्यू ग्रोथ को मजबूत मुनाफे में बदलने में कितनी सक्षम है, खासकर हालिया Q4 लॉस और एक्सपोर्ट पर ग्लोबल ट्रेड पॉलिसी के असर को देखते हुए।
कंपनी की मजबूती और भविष्य की रणनीति:
कंपनी ने अपनी वित्तीय स्थिति को मजबूत किया है और अब वह डेट-फ्री (कर्ज-मुक्त) है। इसके अलावा, ₹180 करोड़ के शेयर बायबैक (Share Buyback) प्रोग्राम की घोषणा से शेयरधारकों को रिटर्न देने और वित्तीय स्थिरता पर कंपनी का फोकस दिखता है।
कंपनी डोमेस्टिक इंपोर्ट सब्स्टिटूशन (घरेलू आयात प्रतिस्थापन) पर जोर दे रही है, लेकिन ग्लोबल इंडस्ट्रियल स्लोडाउन के प्रभाव को पूरी तरह से Counter करना एक चुनौती रहेगी।